दुनिया के हर कोने में खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं बल्कि संस्कृतियों, समाजों और विचारों को जोड़ने का सेतु भी हैं। इसी भावना को केंद्र में रखकर 1981 में सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक ऐतिहासिक पहल की गई — इस्लामिक सॉलिडेरिटी स्पोर्ट्स एसोसिएशन (ISSA) की स्थापना। यह संस्था इस्लामी देशों के बीच खेलों के जरिये एकता, भाईचारे और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी।
ISSA, ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) का एक अंग है, जो 57 मुस्लिम देशों का समूह है। OIC का उद्देश्य मुस्लिम उम्मत के हितों की रक्षा करना और विश्व स्तर पर एकजुट आवाज़ पेश करना है। ISSA उसी दिशा में खेलों को माध्यम बनाकर आगे बढ़ता है।
स्थापना और उद्देश्य
8 May 1985 में ISSA की स्थापना की गई और इस विचार पर की गई थी कि इस्लामी दुनिया में युवा शक्ति को केवल धार्मिक या राजनीतिक मंचों पर नहीं, बल्कि खेलों के मैदानों में भी जोड़ा जाए। इसका मूल उद्देश्य इस्लामी एकजुटता को मज़बूत करना, देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना और युवाओं में खेल भावना के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को भी सशक्त करना था।
संस्था का घोषवाक्य "खेलों के जरिये एकता" इस सिद्धांत को स्पष्ट करता है। ISSA न केवल प्रतियोगिताएँ आयोजित करती है, बल्कि खेल शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध को भी बढ़ावा देती है ताकि इस्लामी देशों में खेलों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँच सके।
इस्लामिक सॉलिडेरिटी गेम्स: एक अनोखा मंच
ISSA की सबसे बड़ी उपलब्धि है — इस्लामिक सॉलिडेरिटी गेम्स, जो हर चार वर्ष में आयोजित होते हैं। यह बहु-खेल प्रतियोगिता ओलंपिक की तरह है, लेकिन इसमें केवल OIC सदस्य देश भाग लेते हैं।
पहले इस्लामिक सॉलिडेरिटी गेम्स 2005 में सऊदी अरब के मक्का और मदीना में आयोजित किए गए थे। इसमें लगभग 6,000 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। उसके बाद से यह खेल तुर्की, इंडोनेशिया, अज़रबैजान और अन्य देशों में आयोजित हो चुके हैं।
इन खेलों में एथलेटिक्स, फुटबॉल, तैराकी, वॉलीबॉल, वुशु, तीरंदाजी और कई अन्य पारंपरिक व आधुनिक खेल शामिल होते हैं। हर आयोजन न केवल खेल प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाता है बल्कि देशों के बीच आपसी संबंधों को भी मजबूत करता है।
खेल और इस्लामी मूल्यों का संगम
ISSA की खासियत यह है कि यह केवल प्रतिस्पर्धा पर ध्यान नहीं देता, बल्कि खेलों में इस्लामी नैतिकता और चरित्र निर्माण को भी महत्वपूर्ण मानता है। यह संस्था इस बात पर ज़ोर देती है कि खेल केवल जीत या हार का साधन नहीं, बल्कि ईमानदारी, अनुशासन और भाईचारे की शिक्षा देने वाला एक माध्यम है।
युवाओं को अवसर और पहचान
ISSA की एक और बड़ी भूमिका है — युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना। कई मुस्लिम देशों में खेल ढाँचा अभी विकासशील स्थिति में है, लेकिन ISSA के माध्यम से इन देशों के खिलाड़ी विश्व स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अनुभव प्राप्त करते हैं।
इन खेलों में शामिल खिलाड़ियों के लिए यह केवल खेल नहीं, बल्कि इस्लामी पहचान और गर्व का प्रतीक होता है। जब विभिन्न देशों के खिलाड़ी एक झंडे के नीचे “इस्लामी एकता” के नारे के साथ मैदान में उतरते हैं, तो यह दृश्य न केवल खिलाड़ियों के लिए बल्कि पूरी उम्मत के लिए प्रेरणादायक बन जाता है।
OIC के सहयोग से बढ़ती भूमिका
ISSA, OIC के सहयोग से खेल शिक्षा, रिसर्च, और प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना में भी मदद करती है। कई देशों में खेल अकादमियाँ और कोचिंग प्रोग्राम इसी संस्था की प्रेरणा से शुरू हुए हैं। इसका उद्देश्य है कि हर मुस्लिम देश के पास आधुनिक खेल सुविधाएँ और प्रशिक्षित कोच उपलब्ध हों।
ISSA खेलों को “राजनयिक उपकरण” के रूप में भी इस्तेमाल करता है। जब दो देशों के बीच तनाव या राजनीतिक मतभेद होते हैं, तो खेल आयोजन संवाद और मेल-मिलाप का रास्ता खोलते हैं। इस तरह यह संगठन एक तरह से “स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी” का भी प्रतीक बन चुका है।
महिला खिलाड़ियों की भागीदारी
ISSA ने इस्लामी देशों में महिला खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए भी अहम कदम उठाए हैं। कई इस्लामिक सॉलिडेरिटी गेम्स में महिला वर्ग के लिए विशेष प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं, जहाँ उन्हें इस्लामी परंपरा के अनुसार भाग लेने की स्वतंत्रता दी जाती है। इससे मुस्लिम महिलाओं को खेल जगत में नई पहचान और आत्मविश्वास मिला है।
भविष्य की दिशा
आज के समय में ISSA के सामने सबसे बड़ी चुनौती है — इस्लामी देशों में खेलों के लिए उचित संसाधन, तकनीकी विशेषज्ञता और युवा भागीदारी को बढ़ाना। संस्था का लक्ष्य है कि 2030 तक इस्लामी देशों में खेल शिक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य बनाया जाए और प्रत्येक देश में आधुनिक खेल केंद्र स्थापित किए जाएँ।
भविष्य में ISSA डिजिटल खेलों (e-sports), हरित खेल आयोजनों और विकलांग खिलाड़ियों के लिए विशेष कार्यक्रमों को भी प्रोत्साहित करने की योजना बना रहा है। यह पहल खेलों को अधिक समावेशी और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगी।
इस्लामिक सॉलिडेरिटी स्पोर्ट्स एसोसिएशन (ISSA) केवल एक खेल संस्था नहीं, बल्कि इस्लामी दुनिया की एकजुटता, सम्मान और भाईचारे का प्रतीक है। यह संस्था इस बात का प्रमाण है कि खेल न केवल शरीर को मज़बूत करते हैं, बल्कि आत्मा को भी जोड़ते हैं।
जब मुस्लिम दुनिया के युवा मैदान में एक साथ उतरते हैं, तो वह केवल पदक के लिए नहीं, बल्कि उम्मत की प्रतिष्ठा और एकता के लिए खेलते हैं। यही भावना ISSA को विशिष्ट बनाती है — एक ऐसा संगठन जो खेलों के माध्यम से इस्लामी सभ्यता की आत्मा को जीवित रखे हुए है।
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