इन दिनों भारत में तालिबानी विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी 7 दिन के लिए भारत के दौरे पर हैं वह 7 दिन यही भारत में बिताएंगे और भारत के साथ अपने उभरते रिश्तों का लेकर बात करेंगे। लेकिन उनके आने से जहां भारत में सियासत गरमा गई है तो वहीं मौजूदा सरकार इसको भारत की सुरक्षा से जोड़ रही है। भारत सरकार ने तालिबान से उनके देश से भारत में होने वाली आतंकवादी गतिविधियों के बारे में कुछ सवाल पूछा। जिसको तालिबान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने सिरी से नकार दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी को ऐसा लगता है तो वह हमें सबूत पेश करें हमने या विश्वास दिलाते हैं कि हम कार्यवाही जरूर करेंगे।
किसी भी सोशल मीडिया पर भी बहसबाजी तेज हो गई है। कहीं कुछ लोग तालिबान विदेश मंत्री का भारत दौरे का समर्थन कर रहे हैं तो तो कहीं कई लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
आईए जानते हैं कि भारतीय पत्रकारों ने तालिबानी विदेश मंत्री आमिर खान मुक्तकी से क्या सवाल जवाब किये। तालिबानी (अफगानिस्तान के) विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी और उनके प्रवक्ता आदि से पत्रकारों ने काफी महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं। उनके जवाबों से यह स्पष्ट होता है कि वे अपनी सरकार की नीतियों को कैसे पेश करना चाहते हैं। नीचे कुछ प्रमुख सवाल और उनके जवाब दिए गए हैं:
प्रमुख सवाल और उनके जवाब
भारत दौरे के दौरान पूछे गए सवाल
1. क्या अफगानिस्तान की भूमि का उपयोग भारत या अन्य देशों के खिलाफ आतंकवाद के लिए किया जाएगा?
मुत्ताकी ने कहा कि अफगानिस्तान की भूमि किसी तीसरे देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने दी जाएगी। (Reuters)
2. पाकिस्तान पर सरासर आरोप — क्या आप यह कहेंगे कि आतंकवाद को अफगानिस्तान से बढ़ावा दिया गया है?
उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में उन्होंने (तालिबान सरकार ने) सभी आतंकी समूहों को खदेड़ दिया है। उन्होंने पाकिस्तान को कहा कि वो भी आतंकवादी समूहों पर कार्रवाई करे जैसे अफगानिस्तान ने की। www.ndtv.com
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि एक धमाका हुआ था और उन्होंने उसे पाकिस्तान की मिलीभगत का एक कृत्य बताया। www.ndtv.com
3. भारत के साथ संबंध कैसे बढ़ाए जाएँ?
मुत्ताकी ने कहा कि भारत अफगानिस्तान का करीबी दोस्त है और दोनों देशों को परस्पर सम्मान, व्यापार, और जन-संपर्क पर आधारित संबंध बनाने चाहिए। www.ndtv.com
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी तकनीकी मिशन को काबुल में दूतावास (embassy) स्तर तक बढ़ाएगा और अफगानिस्तान भी अपने राजनयिकों को भारत भेजेगा। Reuters
4. क्या तालिबान अल-कायदा या अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों को शरण देता है?
पिछले साक्षात्कारों में उत्तर यह रहा है कि यदि प्रमाण पेश किया जाए, तो वे मामले को अफगान अदालत के सामने लाएंगे या इस्लामी विद्वानों की समिति बना सकते हैं।
तालिबान प्रवक्ता ने कहा है कि यह आरोप “बिना सबूत” हैं और वे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा नहीं हैं। ( The new humanitarian)
5. संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों (यात्रा प्रतिबंध, वित्तीय प्रतिबंध आदि) के बारे में क्या राय है?
उन्होंने कहा है कि ये प्रतिबंध आम जनता को प्रभावित करते हैं, न कि सरकार को। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ये प्रतिबंध अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था और मानवीय सहायता के प्रवाह को बाधित करते हैं। ( the new humanitarian )
भारत दौरे के दौरान जब अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्ताक़ी से पत्रकारों ने पूछा कि — “आप देवबंद क्यों जाना चाहते हैं? वहां जाने का उद्देश्य क्या है?”
तो मुत्ताक़ी ने जवाब दिया —
“देवबंद एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है, जहाँ से इस्लामी शिक्षा और विचारधारा का बड़ा योगदान रहा है। हमारे बहुत से विद्वान वहीं से पढ़े हैं। हम वहाँ केवल धार्मिक और शैक्षणिक कारणों से जाना चाहते हैं, राजनीति से इसका कोई लेना-देना नहीं है।”
उन्होंने आगे यह भी कहा कि —
“देवबंद का संबंध अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की आस्था और आध्यात्मिक इतिहास से जुड़ा है। हम वहाँ सम्मान के साथ दर्शन करना चाहते हैं, ताकि दोनों देशों के बीच संस्कृतिक और धार्मिक रिश्ते और मज़बूत हों।”
इस जवाब के बाद भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया पर हलचल मच गई कई लोगो कहा कि यह “सॉफ्ट डिप्लोमेसी (Soft Diplomacy)” का तरीका है, जबकि कुछ ने इसे “कट्टरपंथी प्रतीकवाद” बताया।
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