भारत में अब एक्स्ट्रा मैरिटल रिलेशनशिप्स की दुनिया भी तेजी से डिजिटल हो रही है। फ्रांस की मशहूर एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग प्लेटफॉर्म Gleeden ने हाल ही में भारत में 40 लाख यूजर्स का बड़ा माइलस्टोन हासिल कर लिया है। यह आंकड़ा साफ बता रहा है कि शादीशुदा भारतीय अब अपनी अनकही इच्छाओं और भावनाओं को व्यक्त करने के लिए खुलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सहारा ले रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बेंगलुरु इस पूरे ट्रेंड का सबसे बड़ा हब बनकर उभरा है। Gleeden की रिपोर्ट के अनुसार, पूरे भारत के 40 लाख यूजर्स में से करीब 18% यूजर्स सिर्फ बेंगलुरु से हैं। यानी हर पांचवें यूजर में से एक बेंगलुरु का है। सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर इस शहर में हाई-प्रोफाइल जॉब्स, लंबे वर्किंग आवर्स, स्ट्रेसफुल लाइफस्टाइल और डिजिटल कल्चर की वजह से ऐसा लगता है कि लोग अब रिलेशनशिप्स में भी कुछ नया और एक्साइटिंग तलाश रहे हैं।
बेंगलुरु के बाद इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैदराबाद है, उसके बाद दिल्ली, मुंबई और पुणे का नंबर आता है। ये सभी बड़े मेट्रो शहर हैं जहां आईटी, कॉर्पोरेट जॉब्स और मॉडर्न लाइफस्टाइल का बोलबाला है। इन शहरों में रहने वाले प्रोफेशनल्स की व्यस्त दिनचर्या और पर्सनल स्पेस की कमी उन्हें ऐसे प्लेटफॉर्म्स की ओर ले जा रही है जहां वे बिना किसी जजमेंट के अपनी फीलिंग्स शेयर कर सकें।
लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि अब ये ट्रेंड सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहा है। टियर-2 शहरों से भी यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अहमदाबाद, चंडीगढ़, कोच्चि, इंदौर, लखनऊ, जयपुर जैसे शहरों में भी लोग अब Gleeden जैसे प्लेटफॉर्म्स से जुड़ रहे हैं। यह साफ संकेत है कि ये सामाजिक बदलाव धीरे-धीरे पूरे देश में फैल रहा है। छोटे शहरों में रहने वाले लोग भी अब पारंपरिक सोच से थोड़ा आगे निकलकर अपनी प्राइवेसी और डिजायर्स को एक्सप्लोर कर रहे हैं।
यूजर प्रोफाइल: कौन जुड़ रहा है?
Gleeden के यूजर्स में लिंग अनुपात की बात करें तो अभी भी पुरुषों की संख्या ज्यादा है। कुल यूजर्स में लगभग 65% पुरुष और 35% महिलाएं हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। खासकर बेंगलुरु में पिछले 3-4 सालों में महिलाओं की संख्या में काफी बड़ा उछाल देखा गया है।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय समाज में महिलाओं के लिए ऐसे मुद्दों पर खुलकर बात करना या प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करना पहले काफी मुश्किल माना जाता था। अब महिलाएं भी अपनी सेक्सुअल और इमोशनल जरूरतों को समझ रही हैं और उन्हें पूरा करने के लिए सुरक्षित प्लेटफॉर्म चुन रही हैं।
यूजर्स किस उम्र के हैं और क्या पसंद करते हैं?
पुरुष यूजर्स ज्यादातर 25 से 45 साल के बीच के हैं और वे 25-30 साल की आकर्षक, एनर्जेटिक महिलाओं को ज्यादा पसंद करते हैं। वहीं महिलाएं 30 से 40 साल के बीच के स्थिर, प्रोफेशनल, समझदार और अच्छी कमाई वाले पुरुषों को प्राथमिकता देती हैं। महिलाओं को ऐसे पार्टनर चाहिए जो उनकी भावनाओं को समझ सकें, अच्छी बातचीत कर सकें और जिनके साथ वे बिना किसी तनाव के क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकें।
एक्टिविटी पैटर्न: कब सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं यूजर्स?
Gleeden पर यूजर्स का एक्टिविटी पैटर्न भी काफी दिलचस्प है। औसतन हर यूजर रोजाना 1 से 1.5 घंटे तक ऐप पर एक्टिव रहता है। दिन में दो पीक टाइम हैं:
- दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक (लंच टाइम या ब्रेक के दौरान)
- रात 10 बजे के बाद (जब घर का कामकाज और फैमिली टाइम खत्म हो जाता है)
रात का समय सबसे ज्यादा एक्टिव रहता है क्योंकि इस दौरान लोग अकेले होते हैं और खुलकर चैटिंग, प्रोफाइल ब्राउजिंग और कनेक्शन बनाने में समय बिता सकते हैं।
क्यों बढ़ रहा है ये ट्रेंड?
आज की भागती-दौड़ती जिंदगी, लंबे वर्किंग आवर्स, ऑफिस का स्ट्रेस, और रूटीन में फंस गई शादीशुदा जिंदगी लोगों को अपनी पार्टनर से अलग कुछ एक्साइटमेंट, अटेंशन और नई ऊर्जा की तलाश में मजबूर कर रही है। कई लोग कहते हैं कि शादी के बाद भी उन्हें रोमांस, फ्लर्टिंग और इमोशनल कनेक्शन की जरूरत महसूस होती है, जो घर पर पूरी नहीं हो पाती।
Gleeden जैसे प्लेटफॉर्म्स इसी जरूरत को पूरा करने का एक सुरक्षित, प्राइवेट और डिस्क्रीट तरीका मुहैया करा रहे हैं। यहां यूजर्स अपनी असली पहचान छुपाकर भी अपनी इच्छाओं को एक्सप्लोर कर सकते हैं।
निष्कर्ष
40 लाख यूजर्स का आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं है। यह भारत में रिलेशनशिप्स, मैरिज और पर्सनल फ्रीडम को लेकर हो रहे बड़े सामाजिक बदलाव का संकेत है। चाहे वो बेंगलुरु हो, हैदराबाद हो या कोई टियर-2 शहर, लोग अब अपनी खुशी और संतुष्टि को पहले रखने लगे हैं।
डिजिटल युग में प्राइवेसी और पर्सनल चॉइस का सम्मान बढ़ रहा है। Gleeden का यह आंकड़ा इसी बदलते भारत की तस्वीर पेश करता है।
आप क्या सोचते हैं? क्या शादीशुदा लोगों को एक्स्ट्रा मैरिटल रिलेशनशिप्स के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म्स इस्तेमाल करने का अधिकार होना चाहिए? या फिर ये नैतिक रूप से गलत है?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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