माता का स्वरूप
नवरात्रि के चौथे दिन भक्तजन माता कूष्मांडा की पूजा करते हैं, जो ब्रह्मांड की रचयिता और ऊर्जा की देवी मानी जाती हैं। आठ हाथों में अस्त्र-शस्त्र, जपमाला और वरद मुद्रा धारण करने वाली माता सिंह वाहन पर विराजमान हैं। व्रतधारी फलाहार करते हैं और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। माता कूष्मांडा की उपासना करने से शरीर और मन में शक्ति, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा आती है। यह दिन जीवन में खुशहाली, स्फूर्ति और समृद्धि का संदेश देता है।
माता कूष्मांडा अपने भक्तों में सकारात्मक ऊर्जा, स्वास्थ्य और शक्ति का संचार करती हैं। कहा जाता है कि वे घर-परिवार में खुशहाली और जीवन में ऊर्जा लाती हैं।
संदेश: “सकारात्मक ऊर्जा और सच्चे प्रयास से जीवन में किसी भी कठिनाई को मात दी जा सकती है।”
पूजा और व्रत विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- कलश स्थापना करें और माता कूष्मांडा का ध्यान करें।
- उन्हें सफेद और पीले रंग के फूल, रोली और चावल अर्पित करें।
- अखंड दीपक और धूप जलाएं।
- व्रतधारी दुर्गा सप्तशती या कूष्मांडा स्तोत्र का पाठ करें।
व्रत में क्या खाएँ?
- फलाहार: मौसमी फल जैसे सेब, केला, पपीता, संतरा।
- दूध, दही और मिश्री।
- साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, आलू और शकरकंद के हलवे/भुजिया।
- सूखे मेवे जैसे बादाम, काजू और किशमिश।
- सेंधा नमक का प्रयोग।
व्रत में क्या न खाएँ?
- गेहूँ, चावल और दाल।
- प्याज, लहसुन और अन्य मसालेदार भोजन।
- मांसाहार और मदिरा।
महत्व
माता कूष्मांडा ब्रह्मांड की रचयिता और ऊर्जा की देवी हैं। उनकी पूजा करने से शरीर और मन में शक्ति, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा आती है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ है जो जीवन में ऊर्जा और स्फूर्ति चाहते हैं।
माता कूष्मांडा का आशीर्वाद जीवन में संपूर्ण स्वास्थ्य, घर-परिवार में खुशहाली और मानसिक शक्ति प्रदान करता है। इस दिन व्रत रखने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और व्यक्ति अपने कार्य में सफल होता है।
भावनात्मक संदेश: “माता कूष्मांडा हमें सिखाती हैं कि शक्ति और ऊर्जा से ही हम अपने सपनों और कठिनाइयों को साकार कर सकते हैं।”
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