माता का स्वरूप
नवरात्रि के पांचवें दिन माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है। इनका नाम उनके पुत्र स्कंद (कार्तिकेय) से आया है। माता का स्वरूप अत्यंत सुंदर और दिव्य है। उनके चार हाथ हैं – दो हाथों में अपने पुत्र स्कंद को गोद में धारण किया हुआ है और बाकी दो हाथों में शस्त्र और वरद मुद्रा। उनका वाहन सिंह है।
माता स्कंदमाता अपने भक्तों में संतान सुख, मातृत्व की शक्ति और आशीर्वाद प्रदान करती हैं। यह माता जीवन में माता-पिता और परिवार के प्रति प्रेम, समर्पण और करुणा का प्रतीक हैं।
संदेश: “माँ का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है, जो हर कठिनाई को दूर कर सकती है।”
पूजा और व्रत विधि
- सुबह स्नान कर के स्वच्छ वस्त्र पहनें और माता स्कंदमाता का ध्यान करें।
- कलश स्थापना करें और अखंड दीपक जलाएँ।
- माता को सफेद और पीले फूल, रोली और चावल अर्पित करें।
- व्रतधारी दुर्गा सप्तशती या स्कंदमाता स्तोत्र का पाठ करें।
- इस दिन संतान सुख, परिवार की खुशहाली और ज्ञान की वृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना करें।
व्रत में क्या खाएँ?
- फलाहार: मौसमी फल जैसे केले, सेब, पपीता, संतरा।
- दूध, दही और मिश्री।
- साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, आलू और शकरकंद के हलवे/भुजिया।
- सूखे मेवे जैसे बादाम, काजू और किशमिश।
- सेंधा नमक का प्रयोग करें।
व्रत में क्या न खाएँ?
- गेहूँ, चावल और दाल।
- प्याज, लहसुन और मसालेदार भोजन।
- मांसाहार और मदिरा।
महत्व
माता स्कंदमाता की पूजा से भक्तों को संतान सुख, माता-पिता का आशीर्वाद और घर-परिवार में खुशहाली प्राप्त होती है। इस दिन व्रत और पूजा करने से मनुष्य में करुणा, धैर्य और संयम की भावना विकसित होती है।
माता स्कंदमाता का आशीर्वाद जीवन में हर कार्य में सफलता, मानसिक शांति और परिवार में सौहार्द लाता है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त अपनी साधना और भक्ति में एकाग्र होते हैं और माता की कृपा से जीवन की सभी बाधाओं से मुक्त होते हैं।
भावनात्मक संदेश: “माँ स्कंदमाता हमें सिखाती हैं कि अपने परिवार और बच्चों के लिए प्रेम, समर्पण और भक्ति जीवन को सच्चा अर्थ देती है।”
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