माता का स्वरूप
नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। यह माता शक्ति और साहस की देवी मानी जाती हैं। उनके चार हाथ हैं – दो हाथों में शस्त्र, एक हाथ में वरद मुद्रा और एक हाथ में कमल है। माता सिंह पर सवार हैं और उनका रूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है।
माता कात्यायनी भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और मनोकामना पूर्ति प्रदान करती हैं। कहा जाता है कि इस दिन विशेष रूप से विवाहित जीवन में सुख-शांति और कन्याओं को अच्छे वर की प्राप्ति के लिए माता की आराधना की जाती है।
संदेश: “सच्ची भक्ति और साहस से जीवन में हर लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।”
पूजा और व्रत विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- कलश स्थापना करें और माता कात्यायनी का ध्यान करें।
- माता को सफेद और पीले फूल, रोली, चावल और अक्षत अर्पित करें।
- व्रतधारी दुर्गा सप्तशती या कात्यायनी स्तोत्र का पाठ करें।
- इस दिन कन्याओं और स्त्रियों के लिए विशेष रूप से माता की आराधना शुभ मानी जाती है।
व्रत में क्या खाएँ?
- फलाहार: मौसमी फल जैसे केला, सेब, पपीता, संतरा।
- दूध, दही और मिश्री।
- साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, आलू और शकरकंद के हलवे/भुजिया।
- सूखे मेवे जैसे बादाम, काजू और किशमिश।
- सेंधा नमक का प्रयोग करें।
व्रत में क्या न खाएँ?
- गेहूँ, चावल और दाल।
- प्याज, लहसुन और मसालेदार भोजन।
- मांसाहार और मदिरा।
महत्व
माता कात्यायनी की पूजा से भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और मनोकामना पूर्ति प्राप्त होती है। यह दिन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है और घर-परिवार में सुख-शांति का संचार करता है।
कात्यायनी माता हमें यह सिखाती हैं कि भक्ति, साहस और ईश्वर में विश्वास से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन में सफलता और समृद्धि आती है।
भावनात्मक संदेश: “माँ कात्यायनी हमें याद दिलाती हैं कि आत्मविश्वास और भक्ति से हर बाधा पर विजय पाई जा सकती है।”
Blog Comments (0)