माता का स्वरूप
नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा की जाती है। माता का स्वरूप भयमुक्ति और शक्ति का प्रतीक है। वे काले रंग की हैं, उनके चार हाथ हैं – जिनमें तलवार और वरद मुद्रा शामिल हैं। उनका वाहन घोड़ा है।
माता कालरात्रि अपने भक्तों में साहस, निडरता और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति प्रदान करती हैं। उनका रूप शक्तिशाली और भयंकर है, लेकिन भक्तों के लिए अत्यंत करुणामयी और दयालु हैं।
संदेश: “भय और नकारात्मकता को छोड़कर केवल श्रद्धा और भक्ति से ही जीवन सुरक्षित और सफल बनता है।”
पूजा और व्रत विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माता कालरात्रि का ध्यान करें।
- कलश स्थापना करें और अखंड दीपक जलाएँ।
- माता को सिंहासन, काले फूल, रोली और चावल अर्पित करें।
- व्रतधारी दुर्गा सप्तशती या कालरात्रि स्तोत्र का पाठ करें।
- इस दिन विशेष रूप से नकारात्मक शक्तियों और भय से मुक्ति के लिए प्रार्थना की जाती है।
व्रत में क्या खाएँ?
- फलाहार: मौसमी फल जैसे केला, सेब, संतरा।
- दूध, दही और मिश्री।
- साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, आलू और शकरकंद के हलवे/भुजिया।
- सूखे मेवे जैसे बादाम, काजू और किशमिश।
- सेंधा नमक का प्रयोग करें।
व्रत में क्या न खाएँ?
- गेहूँ, चावल और दाल।
- प्याज, लहसुन और मसालेदार भोजन।
- मांसाहार और मदिरा।
महत्व
माता कालरात्रि की पूजा से भक्तों को भयमुक्ति, साहस और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। यह दिन विशेष रूप से घर-परिवार में सुख-शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
माता कालरात्रि हमें सिखाती हैं कि भय को त्यागकर, भक्ति और साहस के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति मानसिक रूप से सशक्त और नकारात्मक प्रभावों से मुक्त होता है।
भावनात्मक संदेश: “माँ कालरात्रि अपने भक्तों को भयमुक्ति और शक्ति देती हैं, जिससे वे जीवन की हर चुनौती का सामना निडर होकर कर सकते हैं।
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