माता का स्वरूप
नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी की पूजा की जाती है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनका वर्ण भी चंद्रमा के समान उज्ज्वल और निर्मल है।
माता के चार हाथ हैं – त्रिशूल, डमरू और वर-मुद्रा व अभय-मुद्रा से वे भक्तों का कल्याण करती हैं।
उनका वाहन बैल (नंदी) है।
संदेश: “माँ महागौरी पवित्रता, शांति और वैवाहिक सुख का आशीर्वाद देती हैं।”
पूजा और व्रत विधि
- सुबह स्नान कर सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनें।
- घर के मंदिर या पूजा स्थान पर माँ महागौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- माता को सफेद फूल, अक्षत, रोली और चंदन अर्पित करें।
- विशेष प्रसाद के रूप में सफेद मिठाई (खीर, नारियल या मिश्री) चढ़ाएँ।
- दुर्गा सप्तशती के सप्तम और अष्टम अध्याय का पाठ करें।
- कन्या पूजन का विशेष महत्व है — 9 कन्याओं और 1 छोटे बालक (लंगूर) को भोजन कराकर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
व्रत में क्या खाएँ?
- दूध और दूध से बने व्यंजन।
- नारियल, मिश्री, खीर और पंजीरी।
- साबूदाना खिचड़ी, आलू और फलाहार।
- सूखे मेवे और दही।
व्रत में क्या न खाएँ?
- गेहूँ, चावल और दालें।
- प्याज, लहसुन और मांसाहार।
- शराब या किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहें।
महत्व
माता महागौरी की पूजा से वैवाहिक सुख, पवित्रता और परिवार में शांति प्राप्त होती है।
भक्तों के जीवन से पाप और दुखों का नाश होता है तथा उन्हें सौंदर्य और तेज का आशीर्वाद मिलता है।
अष्टमी के दिन कन्या पूजन करके माता को प्रसन्न करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
भावनात्मक संदेश: “माँ महागौरी अपने भक्तों के जीवन में शांति, सौभाग्य और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद देती हैं।”
Blog Comments (0)