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author Nijamul Nov 12, 2025

Dr. Salim Ali - Bird Man Of India

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डॉ. सलीम अली भारतीय पक्षी विज्ञान के उस चमकते सितारे का नाम है, जिसने अपने जीवन को पूरी तरह पक्षियों की दुनिया के अध्ययन और संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उन्हें “भारतीय पक्षी पुरुष” या “बर्ड मैन ऑफ इंडिया” के नाम से जाना जाता है। उनका पूरा नाम सलीम मोईज़ुद्दीन अब्दुल अली था। उनका जन्म 12 नवम्बर 1896 को मुंबई में हुआ था। बचपन से ही उन्हें प्रकृति और खास तौर पर पक्षियों से गहरा लगाव था। कहा जाता है कि जब वे बहुत छोटे थे, तब उन्होंने एक घायल चिड़िया को देखकर उसमें गहरी रुचि दिखाई, और यहीं से उनके जीवन की दिशा तय हो गई।
डॉ. सलीम अली ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में प्राप्त की और फिर आगे की पढ़ाई के लिए यूरोप गए, जहाँ उन्होंने पक्षी विज्ञान का गहन अध्ययन किया। उन्होंने बर्लिन में प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी डॉ. एर्न्स्ट मेयर के साथ काम किया, जिनसे उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुसंधान की गहराई समझने का अवसर मिला। भारत लौटने के बाद उन्होंने पक्षियों पर कई वर्षों तक शोध किया और देशभर में भ्रमण कर विभिन्न प्रजातियों का अध्ययन किया।
सलीम अली का योगदान सिर्फ पक्षियों की पहचान तक सीमित नहीं था। उन्होंने यह दिखाया कि पक्षियों का अध्ययन पर्यावरण और पारिस्थितिकी की समझ के लिए कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत के लगभग हर हिस्से की यात्रा की और “द बुक ऑफ इंडियन बर्ड्स” जैसी प्रसिद्ध पुस्तकें लिखीं, जो आज भी पक्षी विज्ञान के विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक मार्गदर्शक हैं। उनकी रचनाओं में भारत के पक्षियों के व्यवहार, निवास, प्रवास और पारिस्थितिकी के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है।
उनके अनुसंधान कार्य ने भारत में वन्यजीव संरक्षण आंदोलन को नई दिशा दी। उनकी कोशिशों से कई राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य स्थापित किए गए। उन्होंने यह संदेश दिया कि प्रकृति का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। सलीम अली का मानना था कि यदि पक्षी किसी क्षेत्र से गायब होने लगें, तो यह पर्यावरण के असंतुलन का संकेत है।
उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें पद्म भूषण (1958) और पद्म विभूषण (1976) जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। वे बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी से लंबे समय तक जुड़े रहे और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनके शोध कार्यों ने भारत को पक्षी विज्ञान के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर स्थापित किया।
डॉ. सलीम अली का निधन 20 जून 1987 को हुआ, लेकिन उनका कार्य आज भी जीवित है। उनके नाम पर “सलीम अली बर्ड सैंक्चुअरी” जैसी कई संस्थाएँ और अभयारण्य देश के विभिन्न हिस्सों में स्थापित हैं। उन्होंने अपने जीवन से यह सिखाया कि अगर इंसान प्रकृति से प्रेम करे और उसे समझे, तो वह धरती को एक बेहतर जगह बना सकता है।
डॉ. सलीम अली की विरासत हमें यह याद दिलाती है कि पक्षी केवल सुंदर जीव नहीं, बल्कि प्रकृति की संतुलन श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं। उनके जीवन से हमें प्रेरणा मिलती है कि विज्ञान और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकते हैं — और सच्चा ज्ञान वही है जो इंसान को प्रकृति के करीब ले जाए।

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