तेरहवीं सदी मुस्लिम दुनिया पुरी तरह से एक दूसरे से कट चुकी थी चारो तरफ से गैर मुस्लिम, मुस्लिम सल्तनतो पर हावी होने की कोशिश कर रहे थे इस दौर में कई सल्तनतों का जवाल हुआ तो इसी के साथ नए सल्तनतों का ऊरुज हुआ
दोपहर का समय , सुरज पुरी तरह अपने ताकत पर निकला हुआ था , बगदाद का बाजार लोगो के जमावड़े से पुरी तरह भरा पड़ा था ,
कहीं मसाले बिक रहे थे कही तरह तरह के खाने के सामान , कहीं खुबसूरत लिबास तो कहीं ऊँट और घोड़े |
इसी बीच लोगो का एक जमावड़ा, गुलाम लोगो के खरीद फरोख्त कि जगह को घेरे था
चबूतरे पर एक चालाक और अनुभवी व्यापारी एक दस साल के बच्चे का दाम लगा रहा था
वह व्यापारी :- बगदाद के लोगों जरा देखो इस बच्चे को , मोतियों की खान में चमकता हुआ हीरा है ,
है कोई अमीर जो इस बच्चे कि उम्दा और बेहतर किमत लगा सके
भीड़ में से एक अमीर :- बिल्कुल सही कहा बड़ा ही खूबसूरत है ये बच्चा मैं कमसकम इसके 50 सोने के सिक्के दूँगा , मुझे दे दो यह बच्चा
वह व्यापारी:- नहीं जनाब इस हीरे की कीमत इतनी कम नही हो सकती है और कोई है जो ज्यादा ज्यादा कीमत लगाये
वह अमीर : कोई नहीं होगा , लाओ ये बच्चा मुझे दे दो
बहुत देर तक व्यापारी और जमावड़ा में मौजूद अमीरों मे कीमत को लेकर बहस होती है
कोई पचास कोई पिछतर तो कोई सौ तक बोली लगाता है
तभी एक भारी आवाज उस भीड़ से निकलती है , सब चुप होकर एक टक उन्हें देखते हैं
:- रुको में इसके 300 सोने के सिक्के दूँगा , बस
वह व्यापारी 300 सोने के सिक्के सुनकर खुशी से पागल हो ऊठता है
व्यापारी :- हुजूर मेरे हुजूर आपने तो जैसे मुझे ही खरीद लिया
जल्दी जल्दी बच्चे के हाथों से रस्सी खोलता हुआ
लीजिये यह लीजिये आज से यह बच्चा आपका है
एक बुढ़ा शख्स उस अमीर से :- क्या ये बहुत ज्यादा नहीं है इस छोटे से बच्चे कि कीमत इतनी क्यों लगा दी
अमीर:- ताकि मेरे अलावा इसे और कोई खरीद ना पाये
जरा देखो इस बच्चे को ये बच्चा कोई गुलाम नहीं लगता , जरा इसके जिस्मानी हालत पर गौर करो , देखो इसकी खूबसूरती , देखो यह कोई रईसजादा लगता है
वह बुढ़ा शख्स सिर हिलाकर नजरे झुकाते हुये:- जैसा आप ठीक समझे हुजूर
वह व्यापारी चिल्लाते हुये :- बगदाद के लोगो , इस शहर के लोगों , आज से ये बच्चा बगदाद शहर के एक अमीर , अमीर अबू जाफर इब्ने सलीम का हो गया है
अमीर अबु जाफर , उस वक्त बगदाद शहर के बड़े बड़े रईसों में एक थे , शाही दरबार के कई बड़े बड़े सिपाहसालारों और वजीरों से जान पहचान रखते थे
अबू जाफर उस बच्चे को अपने आलीशान मकान में लाते हुये ,
फरहीद इधर आईये फरहीद कहाँ है आप
एक मजबूत जिस्म वाला हट्टा कट्टा अधेड़ उम्र का शख्स दौड़ते हुये वहाँ पहुँचता है
जी हुजूर :- आज से यह बच्चा हमारे साथ रहेगा फरहीद इसकी परवरिश बिल्कुल मेरे बच्चों की तरह करना ठीक है
फरहीद :- जी बिल्कुल ऐसा ही होगा
अबू जाफर, फरहीद के कान में :- ये गुलाम नहीं है इसे एक मजबुत लड़ाकु बनाओ , हमारे कुश्ती खाने में ऐसा कोई पहलवान ना मिले जो इस बच्चे से हारा ना हो , जाओ
फरहीद :- जी , मैं कोई कसर बाकि नही छोड़ुँगा इसे एक बहादुर मजबूत पहलवान बनाने में
वो बच्चा एक कमरे में बैठकर रोते हुए
फरहीद उसे देख कर उसकी तरफ बढ़ते हुये
रोओ मत , मेरी बात सुनो बच्चे , तुम यहाँ गुलाम की निस्बत से नहीं लाए गए हो बल्कि एक बहादुर बनने के लिये लाये गये हो
और बहादुर रोता नही है
तुम हमेशा मेरे साथ ही रहोगे ठीक है
फरहीद उस बच्चे को तलवार बाजी सिखा रहे होते हैं
फरहीद :- ठीक से तुम्हारा सारा ध्यान मेरे तलवार पर होना चाहिए बच्चे
हर एक वक्त अपनी नजर मेरे तलवार और मेरे हाथों पर रखो एक पल के लिये भी अपनी नजरे इनसे मत हटाना
वह छोटा बच्चा :- जी ऐसा ही करूँगा
फरहीद : - अपने हाथो से अपनी तलवार को जोर से पकड़ो की तुम्हारा हाथ तुम्हारे शरीर से अलग हो जाए मगर तुम्हारा हाथ तलवार से अलग न हो पाये
वह बच्चा :- जी याद रखुँगा
फरहीद :- आज के लिए इतना ही कल हम तुम्हे तलवार बाजी के साथ साथ तीर बाजी का भी हुनर सिखायेंगे फिर तुम्हें अखाड़े में कुश्ती लड़ना सिखायेंगे
वह बच्चा :- जी
फरहीद , उसे अपने पास लाते हुये:- आज से तुम्हारा नाम हैदर है
बच्चा :- हैदर
फरहीद :- बेटा इस नाम की अजमत जानते हो
बच्चा :- जी ये हजरत इमाम अली मौला रजि अल्लाह तआला अन्हु का नाम है
फरहीद :- हाँ बेटा ये नाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहुअलैहिवसल्लम के चाचाजाद भाई हजरत इमाम अली मौला रजि अल्लाह तआला अन्हु का नाम है उनकी वालिदा ने उनका नाम हैदर रखा था जिसका मतलब होता शेर और पता है यह नाम मैने तुम्हें क्यों दिया
बच्चा :- जी नहीं मालूम
फरहीद :- बेटा में चाहता हुँ तुम भी एक शेर बनो जानते हो हजरत इमाम अली मौला रजि अल्लाह तआला अन्हु ने खैबर की जंग में खैबर के किले का दरवाजा ही अपने हाथो से उखाड़ फेंका और उसकी एक किवाड़ को अपनी ढाल बना ली थी उनकी तलवार का नाम जुल्फिकार है जुल्फिकार जिसके दो सिरे हैं बेटा मैने तुम्हरा नाम हैदर इसलिये रखा है कि तुम इस नाम की अजमत की तरह ही दिलेर बनो
बहादुर बनो
अपने अब्बा अम्मी के बारे में कुछ जानते हो , वो कहाँ है और तुम किस तरह व्यापारियों के कब्जे में आये ? सकल से तो तुम कोई गुलाम नही लगते
बच्चा :- जी नही , मगर मैं इतना जानता हुँ कि वो या तो कत्ल कर दिये गये या फिर उनका हाल भी मेरी तरह ही हुआ
फरहीद :- क्या हुआ था
बच्चा :- मेरे अब्बा हमारे कबीले के एक बड़े व्यापारी हैं, हमारे तिजारती काफिले पर हमला हुआ था, जिसमें मुझे बंदी बना लिया गया और मुझे पहले व्यापारियों को बेचा गया
और फिर व्यापारियों ने यहाँ बेच दिया
फरहीद :- बेटा मेरे हाथ में इतना कुछ तो नही है, मगर में जहाँ तक ताकत रखता हूँ, तुम्हारे अब्बा अम्मी कि खोज करवाता रहूँगा
फरहीद :- मेरा भी एक बेटा हुआ करता था ,
मगर वो नाफरमान निकला , उसने मुझे छोड़ दिया
और कहीं दुर चला गया
बेटा तुममें मै अपना बेटा देखता हूँ
मुझसे वादा करो , कि तुम मुझे छोड़ कर नही जाओगे
वादा करो
बच्चा :- मैं आपसे वादा करता हूँ
क्या मैं आपको चाचा कह सकता हूं
फरहीद हँसते हुये :- बिल्कुल
कहानी जारी है ................
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