जगह :- बगदाद शहर के बाहर का रेगिस्तान
रेगिस्तान की तमतमाती धूप और चलने वाले गर्म हवाओं के बीच बगदाद के खलीफा के नौजवान फरजंद अपने दोस्तों और सिपाहसालारों के साथ एक सफ़र में जा रहे थे , अचानक से बीच पड़ाव में तेज दौड़ाते हुये घोड़ों पर बैठे हाथों में तलवार लिये डाकुओं कि फौज उन्हें घेर लेतें हैं
शहजादा:- कौन ओ तुम लोग , और क्यों घेरा है हमें जानते हो हम कौन है
डाकुओ का सरदार :- हमला करो इन पर और शहजादे को जिंदा रखना ताकि हमें इनकी खिदमत करने का सर्फ हासिल हो सके
और जोरो से हँसता हुआ
शहजादा पीछे देखते है उनकी फौज भी हथियार डाल देती है
शहजादा :- यह कैसे हो सकता है जरूर , जरूर हमारे ही किले में कोई गद्दार है
डाकुओं की फौज , शहजादे का अपहरण कर लेती है
जगह :- बगदाद शहर का अखाड़ा
अखाड़े के चारो तरफ लोगो कि भीड़ जोर जोर से चिल्लाते हुये हैदर........हैदर.......
एक गुस्सैल पहलवान तेजी से दोड़ता हुआ मुक्का मारने की स्थिति में आगे बढ़ता हुआ तभी उसके मुक्के को अपने एक हाथ से रोकता हुआ हैदर दुसरे हाथ से उसके गले को पकड़ता हुआ उसे उठाकर फेंक देता है
उस जामवड़े में खुशी की तेज लहर दौड़ उठती है सब लोग फिर से हैदर का नाम लेने लग जाते हैं
हैदर:- जोरावर आज जितनी जोर लगाना है लगा ले मगर तु इस बार भी हारेगा
जोरावर :- आज में पूरी तैय्यारी के साथ आया हूँ
हैदर , आज तुझे तेरा चाचा भी नहीं बचा पायेगा
हैदर(चिल्लाता हुआ): - जोरावर,
चाचा पर जाकर आज तूने बहुत बड़ी गलती कर दी है
जोरावर:- आजा आजा
हैदर:- तेजी से दौड़ता हुआ हैदर , जोरावर पर शेर कि तरह कूदता है और जोरावर को एक के बाद एक घुसे मारे जाता है
जोरावर उसके एक्शन को रोकने के लिए तैयार हो रहा होता है मगर जोरावर की तैय्यारी हैदर के लात और मुक्को को नहीं रोक पाती
हैदर :- मैने कहा था न चाचा पर जाकर तुने गलती कर दी है
बीच में फैसला करने वाला आकर दोनों को रोकता हुआ
:- मैं कहता हूँ रूक जाओ , वरना दोनो को ही किसी अखाड़े में आने का मौका नही मिलेगा
हैदर वहाँ से जाता हुआ मगर हैदर को पीछे से एक चुनौती सुनायी देती है
जोरावर:- अरे हाँ हाँ मुक्केबाजी तो कोई भी जीत जाएगा दम है तो क्यों ना तलबार बाजी में दो दो हाथ हो जाए
हैदर झुके हुए सिर को थोड़ा सा हंसते हुए उठाता है
हैदर:- लगता है तुझे आज तेरी मौत आई है जोरावर
तलवार से तलवार टकराने कि आवाज़ और चिंगारियों ने अखाड़े का समाँ बाँध दिया था
हैदर के तलवार पकड़े हाथ ने जैसे , जोरावर के जिस्म के सारी ताकत को अपने ताकत से दबा कर रखा था
तलवार बाजी में माहिर हैदर , जोरावर के हर वार का जबाव दे रहा था
जोरावर , हैदर के कई वार को सह नही पाता और उसके हाथ से तलवार गिर जाती है
अब जोरावर जमीन पर पड़ा हुआ था, और उसके सीने पर हैदर ने तलवार रखा हुआ था
जोरावर :- मुझे माफ कर दो मुझे माफ कर दो हैदर
हैदर :- कहा था ना आज तुझे तेरी मौत आयी है
पीछे से फरहीद चाचा , हैदर के पास आते हुये
फरहीद :- हैदर रूक जाओ
हैदर :- चाचा
फरहीद :- हैदर उसे माफ कर दो
फरहीद , हैदर के गुस्से को शांत करते हुये , उसे समझा बुझा कर ले जाते हुये
मगर पीछे से जोरावर आकर हैदर को पिछे से मारने के लिये आता है
तभी हैदर उसके अपनी तरफ बढ़ने कि आहट को सुन लेता है
और तैयार होकर उसके गले को पकड़ कर उसे उठा कर वहीं जमीन मे धँसा देता है
और फैसला करने वाला हैदर को विजयी घोषित कर देता है
हैदर इस जीत से मिले इनाम के कुछ हिस्सों को लेकर अब अपने दोस्तों के साथ बीच शहर के बड़े बाजार में घुम रहा था
तभी शाही दरबार के दो घुड़सवार सिपाही आकर कहते हैं
:- तुम में से हैदर कौन है
हैदर , अपने दोस्तों कि तरफ देखते हुये
फिर उन घुड़सवार सिपाही से कहता है
:- मैं ही हुँ हैदर
एक सिपाही :-
खलीफा का हुक्म है कि हैदर को शाही दरबार में पेश किया जाये
सब एक दूसरे कि तरफ देखते हुये
हैदर :- मगर मुझसे क्या काम है
सिपाही :- वो तुम्हें वहाँ जाकर ही पता चलेगा
खलीफा के दरबार में पहुँचकर
हैदर :- खलीफा पर अल्लाह की सलामती हो
खलीफा :- तुम पर भी अल्लाह की सलामती हो हैदर
यह कहते हुए खलीफा की आंखे नम होकर रोने लग जाते हैं
हैदर (हैरत से) :- मेरे हुजूर ऐसा क्या हुआ जिसने आपको इतना परेशान किया है
हैदर , शाही दरबार में सभी सिपाहसालारो और अमीरो को देखता हुआ सब मायुस चेहरा लेकर नज़रे झुकाये हुये थे
खलीफा( कमजोर आवाज के साथ ) :- मेरा बेटा मेरा लख्ते जिगर अपने सिपाहसालारो के साथ कल सफर में निकला था रास्ते में रेगिस्तानी क्रुर डाकुओ ने उसका अपहरण कर लिया है कल से पूरे बगदाद शहर और उसके आसपास के सब इलाको में फौजी दस्तो की छापेमारी कर दी गई है मगर उसका कोई पता नहीं चला मुझे नहीं मालूम की वो कहाँ है मुझे तुम्हारे मदद की जरूरत है हैदर
आज के शाही दावत में तुम मेरे साथ रहोगे और वही तुम्हें आगे कि सारी तरकीब बता दी जायेगी
इधर हैदर के दोस्त भागे भागे , फरहीद चाचा के पास आते हैं
हैदर का एक दोस्त वाजिद :- फरहीद चाचा फरहीद चाचा
फरहीद :- क्या बात है मेरे जवानो ऐसी कौनसी आफत आयी है
वाजिद:- जी चाचा वो हैदर को शाही फौजों का दस्ता खलिफा के पास लेकर गयी है
फरहीद:- क्या , या मेरे अल्लाह आखिर हैदर से कोई गलती तो नही हो गयी
फरजाना (फरहीद की इकलौती बेटी) :- आखिर तुम लोग हमसे कोई मसखरा तो नही कर रहे
वाजिद:- नही नही फरजाना बाजी हैदर को वो हमारे सामने से लेकर गये हैं
फरजाना दुखी चेहरे के साथ कमरे के अंदर चली जाती है
फरहीद :- मैं शाम तक उसका इंतजार करूँगा
वो नही लौटा तो फिर दरबार में जाऊँगा
हैदर के दोस्त :- जी चाचा हम भी आपके साथ रहेंगे
कहानी जारी है .................
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