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author Nijamul Feb 06, 2026 8 min

Janbaaz Haider - Episode 3

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दावत के बाद

 

हैदर :- अमीर उल मोमीनीन, आखिर आपके पास इतनी बड़ी फौज है आखिर मेरे जैसे एक मामूली पहलवान जो चोर चक्कों को पकड़ने वाला आपकी कैसे मदद कर सकता है
खलीफा :- मुझे मेरे वजीरो और सिपाहसालारों पर शक है 
इसलिये मैं इन्हें इस काम को पुरा करने का भरोसा नही रखता आखिर में यह मेरा भी कत्ल कर सकते हैं 
तुम मेरे बेटे जैसे हो हैदर अगर तुम इस काम को पुरा कर देते हो मैं तुम्हें शाही दरबार में एक बड़ा ओहदा दे दूंगा 
हैदर :- या अमीर ऊल मोमिनीन में माफी चाहूँगा मैं किसी काम के बदले में कुछ नहीं लेता मैं हर काम लोगो की निस्वार्थ मदद के लिए करता हूँ मुझे बदला सिर्फ मेरे रब से चाहिये जिसने मुझे पैदा किया और जो मुझे हर काम में फतेह देने वाला है 
खलीफा :- मैं तुम्हारे गुरुर पर फक्र करता हूँ 
कहते हुये अपने हाथ हैदर के कंधे पर रखते हैं

 

हैदर अपना हाथ अपने सिने में रखकर खलीफा को सम्मान देता है हुआ कहता है : - मेरे हुजूर आपका हर हुकम मेरे लिए पत्थर की लकीर है मैं आपके लिए अपनी जान की बाजी लगा सकता हूं

खलीफा :- मुझे तुम पर पूरा भरोसा है हैदर एक तुम ही शहर में वो ज़ाँबाज हो जो यह काम पूरी दिलेरी से कर सकता हैं अल्लाह तुम्हें इस मकसद में जरूर फतेह देगा

 

शाम होने से पहले ही हैदर घर लौट आया
हैदर अपने चाचा के घर आता हुआ

 

चाचा और फरजाना दोनों ही बैठे हुये इस पर बात कर रहे थे कि खलीफा ने हैदर को क्यों बुलाया होगा

 

हैदर को देखकर चाचा , 
चाचा :- हैदर , क्या कहा खलीफा ने 
हैदर :- शहजादे गायब है , मुझे उन्हें कहीं से भी ढूँढ कर लाना होगा 
चाचा:- मगर हम मामूली लोग कैसे इस गंभीर समस्या को हल कर पायेंगे 
हैदर :- मुझे यह खतरा उठाना ही होगा चाचा वरना लोग जो मुझे जाँबाज़ कहते फिरते है 
मैं उनको सकल दिखाने के काबिल नही रहूँगा
चाचा :- अल्लाह तुम्हारा हामी और नासिर हो 
मगर इस सफर में मैं तुम्हारे साथ रहूँगा
हैदर :- नही चाचा आप इस उम्र में इस सफर को कैसे तय कर पायेंगे 
इस बेजान रेगिस्तानी सफर में बिना खायें पियें ना जाने कितने दिन हमें गुजारने पड़ेंगे 
चाचा:- मैने तुम्हारी परवरिश की और मैं तुम्हारे वालिद जैसा हुँ , मैं आखिरी साँस तक तुम्हारे साथ रहूँगा बेटा

 

रात का वक्त था सुरज डूब गया और अब सितारे आसमान में चमक रहे थे

फरजाना अपने घर के छत पर बैठे तारों को निहार रही थी

हैदर छत पर आता हुआ

फरजाना :- आखिर तुम कल जा रहे हो सफर में 
हैदर :- हाँ , कल हम चले जायेंगे 
फरजाना:- फिर लौटोगे कब
हैदर :- मालुम नही मुझे 
फरजाना:- एक ऐसा सफर जिसकी मंजिल तुम नही जानते हैदर और मुझे यहाँ तन्हा छोड़ कर जा रहे हो
हैदर :- मैं कोशिश करूँगा जल्द लौटने कि फरजाना 
फरजाना:- मैं तुम्हारा इंतजार करूँगी

 

हैदर , फरहीद दोनो ही सफर के लिये तैय्यार थे

 

फरहीद अपने पड़ोसी जो कि उसका चचा जाद भाई भी था
उससे कहते है :- मैं अपनी बेटी को तुम्हारी हिफाजत में देकर जा रहा हुँ भाई तुम उसका ख्याल अपनी बेटी कि तरह रखना
फरहीद के चचाजाद भाई :- आप बेफिक्र रहे भाईजान , फरजाना मेरी बेटी कि तरह है
फरहीद अपने चचाजाद भाई से गले लगकर विदा लेते हैं

 

हैदर का काफ़िला रेगिस्तानी समंदर में बढ़ा जा रहा था दारुल खिलाफत के 100 फौजियों का एक दस्ता हैदर के पीछे पीछे आ रहा था हैदर के साथ उसके चाचा, साथ में हैदर का एक दोस्त वाजिद जो कभी उसके चाचा के घर पर ही काम किया करता था आखिर उसने भी हैदर को मना लिया था उसके साथ जाने के लिये

 

तभी एक इंसान दूर से चिल्लाता हूआ हैदर रुको हैदर रुको मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा 
हैदर को उसके के चाचा उंगली का इशारा करते हुए दिखाते हैं वहाँ , वहाँ देखो

 

जोरावर:- मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा हैदर
हैदर :- मगर क्यों 
जोरावर :- मैं भी खलीफा के सामने खुद को साबित करना चाहता हूँ 
हैदर :- मगर हम यह काम खलीफा को खुश करने के लिये नहीं कर रहे 
जोरावर :- हैदर में तुम्हारे पैर पकड़ता हूँ , मुझे भी अपने साथ ले चलो 
हैदर :- ठीक है 
चाचा :- रुको, हैदर मुझे इस पर शक है 
हैदर :- चाचा में समझ सकता हूं, मगर इस बार में इसे एक मौका देता हूं 
चाचा (जोरावर से):- ठीक है मगर मेरी नजर तुम पर रहेगी समझे
हैदर :- मेरी भी 
चाचा :- हैदर हम कहाँ जा रहे हैं 
हैदर :- मालूम नहीं चाचा, मंजिल की तरफ अल्लाह ही लेकर जायेगा 
चाचा:- अल्लाह हमारी राह आसन करे
हैदर :- आमीन

 

शहजादे का अपहरण करने वाले डाकु कोई छोटी मोटी गिरोह ​​नहीं थे डाकूओं का सरदार किसी काले कपड़े पहनने वाले कबाली जादूगर को मानने वाला था और उसी की इताअत करता था

 

गुफा में कैद शहजादे बहुत तकलीफ में थे
कहाँ महल कि शानो शौकत और एक आवाज में हजारो गुलाम खड़े हो जाने वाले और कहाँ भुखे प्यासे दिन गुजारना पड़ रहा था

 

डाकूओ का सरदार उसके गुरू जादुगर से :- मालिक क्या मुझे अब बगदाद कि सल्तनत मिलेगी

वह जादुगर :- मिल सकता था , मगर अब नहीं मिलेगा

डाकुओं का सरदार :- मगर क्यू हुजूर

वह जादुगर :- तुम्हारे रास्ते में अल्लाह का एक नेक बंदा आ रहा है जो तुम्हारे लिए परेशानी का सबब बनेगा

डाकुओं का सरदार :- मगर मैने तो आपके कहने पर ही किया है

जादुगर :- अब कुछ नहीं हो सकता , उससे लड़ो अपनी डाकुओं की फौज बढ़ाओ

डाकुओं का सरदार :- वो कौन है ? , हुजूर उसके बारे में कुछ बतायें ?

जादुगर:- जाँबाज हैदर बगदाद शहर का रखवाला

डाकुओं का सरदार :- हैदर मैं तुझे नहीं छोड़ुँगा , आखिर तु मुझे बगदाद का सुल्तान बनने से नही रोक सकता

 

हैदर को रोकने के लिये , डाकुओं का सरदार कई तीस पचास तलवार बाज डकैतो को भेज देता है

तीस से पच्चास कातिल डाकुओं का दस्ता हैदर के काफिले तक पहुँच चुका था

बीच रेगिस्तान में ही पड़ाव डाले हैदर और उसके साथी आराम कर रहे थे

तभी वो डकैत नंगी तलवारे लेकर उनके पड़ाव को चारों तरफ से घेर लेते हैं

चारों तरफ से घिरा हैदर और उसकी नजरें अपने चारों तरफ उन रेगिस्तानी डकैतो कि तरफ थी

 

एक हाथ में तलवार लिये हैदर कि तरफ आता हुआ आदमी हैदर पर तलवार चलाने आता है
हैदर सामने से उठकर उसके सीने में लात मारता हुआ खड़ा होता है 
और उसे उठा कर सामने वाले गुंडों पर गिरा देता है

पड़ाव में अफरातफरी में फरहीद वाजिद और जोरावर भी तलवारे लेकर खड़े हो चुके थे

हैदर एक डकैत के तलवार वाले हाथ को पकड़ कर उसके मुंह पर जोर का एक गुस्सा मारता हुआ अपनी कोहनी से पीछे से आते हुए डकैत के मुंह पर मारता है

हैदर के बाईसेप इतने बड़े थे कि उन डकैतों का पूरा एक चेहरा ढ़क जाये अचानक एक डकैत उसकी तरफ आ ही रहा था कि हैदर ने उसे देखा और उसके सीने पर एक जोर का लात मरता है और वो दूर बाकी के गुंडों में जा कर गिरता है

हैदर एक डकैत की एक हाथ पकड़ कर उसके मुँह पड़ लगतार मुक्कों ही मुक्कों मारता रहता हैं 
जब तक की वो गिर नहीं जाता

लम्बा चौड़ा कद काठी का नौजवान हैदर अपने तलवारबाजी की महारत दिखाता हुआ रेगिस्तान में डकैतो के छक्के छुड़ा रहा था 
डकैतो के तलवार के हर वार को अपनी तलवार बाजी के महारत और कला से एक के बाद एक जबाव दे रहा था
और सिर्फ तलावार बाजी की महारत से ही नहीं बल्कि अपने भुजाओ के जोर से भी वो अपनी ताकत दिखा रहा था

डकैतो का एक आदमी नफरत भरे अंदाज से हैदर की तरफ दौड़ता हुआ आता है तभी उसके सामने से आते हुये चाचा उस डकैत के सीने पर तलवार से उसका सीना चिर देता है और वो जमीन में जा गिरता है

हैदर पीछे देखता हैं और तलवार से उसके पीछे से आते हुए दुश्मन के सिने के आर पार कर देते हैं

यहाँ पर जोरावर भी अपना थोड़ा बहुत अपनी फाइटिंग स्किल्स दिखाता है

डकैतो के आधे से ज्यादा आदमी मारे जातें है कुछ भागने में कामयाब होते हैं 
तो एक दो को पकड़ लिया जाता है

 

हैदर एक डकैत के गर्दन पर तलवार रखकर :- 
बता बता कहाँ है शहजादे 
कहाँ है शहजादे 
वरना तेरी गर्दन यही जमीन पर कट के गिरेगी

बता , चिल्लाता हुआ हैदर

वो डकैत :- अगर मुझे जिंदा जाने दोगे वादा करो तो फिर बताऊँगा

हैदर :- हाँ जाने दूँगा, अब बताओ

वो डकैत :- पुर्व दिशा कि और चलते जाओ चलते जाओ जब तक रेगिस्तान के आखिरी छोर पर नही आ जाते
अब तो छोड़ दो

हैदर :- ठीक है तुम जा सकते हो

हैदर जोरावर के पास भी जाता है

हैदर जोरावर से :- तुमने मेरा दिल जीत लिया आज
अच्छा लड़े
अब तुम भरोसे के लायक हो रहे हो

जोरावर मन ही मन में :- एक बार मुझे वहाँ पहुँच ही जाने दो फीर सबका कत्ल कर दूँगा

हैदर और उसका काफिला पुरब दिशा कि ओर बढ़ने लगती है

 

इधर घाटी में

आहहहहहहह !
चिल्लाता हुआ जादुगर अपने बिस्तर से उठकर भागने लगता है

डाकुओं का सरदार :- हुजूर हुजूर किया हुआ
जादुगर :- भाग यहाँ से और मुझे यहाँ से जाना होगा 
तुम्हारे डकैत किसी काम के नही रहे 
हैदर ने उन सब का काम तमाम कर दिया है
वो किसी भी वक्त यहाँ पहुँच सकता है 
वो तो भला हो उस डकैत का जिसने उन्हें गलत पता दिया और उन्हें रेगिस्तान में भटका दिया

जादुगर, अपने घोड़े पर बैठ कर उस घाटी को छोड़कर दूर चला जाता है

अपने आका को जाता देख डाकुओं का सरदार, हिम्मत हार चुका था
:- आने दो , आने दो हैदर को , मैं जिंदा नही छोड़ुँगा उसे

जोर से पागलों की तरह हँसता हुआ

 

कहानी जारी है ...................

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