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author Nijamul Feb 07, 2026 6 min

Janbaaz Haider - Episode 4

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इधर बगदाद में 
फरजाना तन्हाई में बैठकर खिले हुये चाँद को तकते हुये सोचती है

हैदर , तुम मुझे यहाँ तन्हा छोड़ गये और यह भी नही बताया कि कब लौटोगे
ठीक है मैं भी तुम्हारे जिद्द के मुकाबले में कम जिद्दी नही हुँ खुद को तुम्हारे यादों में भुला दूँगी हैदर

 

रातों में आग जलाकर रेगिस्तान में ठंड हवाओं में हैदर , फरजाना को याद करता है

मुझे मंजिल का दुर दुर तक कोई नामो-निशान नही मिला अगर मैं वापिस नही आया तो फरजाना खुद को इस रेगिस्तान कि तरह बेरहम मत होने देना

 

फरजाना:- मेरी दुआयें तुम्हारे साथ है हैदर जल्द लौटना

 

करीब दो महीनों की रेगिस्तानी सफर के बीच हैदर और उसके साथी थक गये थे

 

वाजिद :- इतने दिनों से चले जा रहे हैं, डाकुओं का कोई नामो-निशान नही मिला

फरहीद :- हैदर अगर ऐसे ही हम रेगिस्तान में भटकते रहे यकीनन फौजी भी हमारा साथ छोड़ देंगे

हैदर :- मैं कुछ नही कर सकता चाचा , सब अल्लाह के हाथों में है

 

तभी अचानक से उन्हें सकलो सुरत से हब्शी दिखने वाला एक ऊँट चरवाहा दिखता है

चाचा :- कौन हो तुम और इस बीच आबाद रेगिस्तान में क्या कर रहे हो तुम

वो चरवाहा :- मंजिल तक पहुँचना चाहते हो तो मंजिल में पहुँचाने का काम करता हुँ

हैदर :- मगर हो कौन तुम ?

चरवाहा :- मैं रेगिस्तानी चरवाहा हुँ ऊँट चराता हुँ 
लोगो को मंजिल तक पहुँचाता हुँ

हैदर :- हमें बगदाद के खलीफा के शहजादे तक पहुँचना है कुछ जानते हो

चरवाहा:- महीनो पहले डकैतों ने शहजादे के काफिले पर हमला करके उन्हें अपहरण कर लिया था
वो स्याह घाटी के किसी गुफा में कैद किये गये हैं

चाचा :- मगर तुम इतना कुछ कैसे जानते हो

चरवाहा:- मुझे इस रेगिस्तान के हर मामलात कि खबर रहती हैं , मैं इस रेगिस्तान का बेटा हुँ

हैदर :- चलो ठीक है मगर उन तक पहुँचने का रास्ता कैसे मिलेगा

चरवाहा:- दो रात और दो दिन के सफर के बाद वहाँ तक पहुँच जाओगे

वाजिद:- पहले ही भाई महीने का सफर कर चुके है
पता नही इस रेगिस्तान सफर में हमे दो दिन या दो हफ्ते लग जाये

चरवाहा:- मेरा काम तुम्हें रास्ता बताना था मैने बता दिया

हैदर :- आप हमारे साथ चल सकते हो

चरवाहा:- मैं कह चुका हूँ मैं बस लोगो को मंजिल तक पहुँचाता हुँ मेरा काम यह नही कि मैं तुम्हारे साथ सफर करूँ

फरहीद :- मैं अपनी जवान बेटी को घर पर अपने रिश्तेदारों के सहारे छोड़ कर दो महीनों से रेगिस्तानी सफर में हुँ
क्यों कि हमारे खलिफा हमें बहोत अजीज हैं 
तुम हमारी मदद करोगे तो इसका सबाब सिर्फ अल्लाह ही तुम्हे देगा

चरवाहा :- ठीक है मगर मैं तुम्हे बस आखिरी रेखा तक ही पहुँचाऊँगा 
मगर उसके बाद का मामला मेरा नही होगा 
तुम्हारा मामला तुम पर है

हैदर :- ठीक है

चरवाहा:- फिर मेरे पीछे चलो

 

करीब दो दिनों और दो रातों की सफर के बाद हैदर समेत सब लोग उस रेखा तक पहुँच चुके थे जहाँ एक घाटी नजर आ रही थी

चरवाहा :- मेरा सफर यही तक था
हैदर :- ठीक है , तुम्हारा शुक्रिया 
चरवाहा :- अपना ऊँट मोड़ लेता है
हैदर , चिल्लाकर जाते हुये चरवाहे से :- सुनो अगर तुम्हारी कभी जरूरत पड़ी तो कहाँ मिलोगे 
चरवाहा चिल्लाते हुये :- बगदाद शहर के दरवाजे से मशरिक कि तरह चलते रहना जब तक दो दरवाज़े ना आ जाये
हैदर मैं समझा नही आखिर कौन हो तुम 
चरवाहा नही दिखता मगर उसकी आवाज आती है मैं रेगिस्तान का बेटा हुँ

फरहीद :- बड़ा ही रहस्यमयी किरदार था पता नही कौन था

 

घाटी के अंदर
डाकुओं के सरदार के पास आकर एक डकैत कहता है
:- हुजूर वो हैदर आ गया , उसके साथ बहोत सारे फौजी है तादाद में हमसें ज्यादा है

डाकुओं का सरदार चिल्लाता हुआ :- जाओ और नर्मी के साथ हैदर को मेरे पास लाओ

हैदर अपनी फौज लिये घाटी के निचे बंजर मैदान में खड़ा था

घाटी से एक डकैत सामने आता हुआ :- तुममें से हैदर कौन है उसे हमारे सरदार ने बुलाया है

हैदर :- हममें से कोई नही जायेगा , जोरावर की तरफ देखकर जोरावर तुम जाओगे

जोरावर इधर उधर देखकर :- ठीक है जाता हुँ

 

जोरावर जाने के बाद

फरहीद :- हैदर आखिर तुमने उसे क्यो भेजा

हैदर:- मुझे उसपर कोई भरोसा नहीं आखिर कुछ देर के लिये ही सही मैं इसे हमसे दूर करना चाहता था

फरहीद:- मैं समझ नहीं पा रहा

हैदर :- जोरावर इतनी आसानी से हमारा मददगार क्यों हो गया ? , उसका गलत मंसुबा है वो शहजादे को बचाकर खलीफा पर एहसान करना चाहता है ताकि खलीफा को हमेशा यह बात जता जताकर इनाम लेता रहे

वाजिद :- ऐसा इन्सान सिर्फ कत्ल ही किया जाता है

हैदर :- मैं भी यही चाहता हूँ वरना इससे बड़ा गद्दार बगदाद में कोई नही होगा

फरहीद :- सही कह रहे हो

 

जोरावर डर डर कर उस गुफा के अंदर दाखिल होता है

वहाँ पर एक तराशे हुये पत्थर पर डाकुओं का सरदार उसी तरह बैठा होता है जिस तरह कोई सुल्तान बैठा हो

जोरावर झुककर उसे सलामी करता हुआ

डाकुओं का सरदार मुस्कुरा कर 
आखिर तुम ही हैदर हो हाँ जिसने मेरे सारे सिपाहियों का कत्ल कर दिया

जोरावर डर डर कर :- जी जी मैं नही हुँ , मैं तो जोरावर हुँ मामूली कुश्ती लड़कर लोगो का दिल बहलाता हुँ

डाकुओं का सरदार:- चिल्लाता हुआ फिर हैदर कहाँ है

जोरावर :- जी वो निचे है

डाकुओं का सरदार:- जाओ उसे भेजो

जोरावर :- जी मगर मेरी आपसे एक ख्वाहिश है , कि उसे बिना तलवार के उपर आने दे तलवार बाजी में वो बहोत माहिर है एक बार उसके हाथ में तलवार आ गयी तो वो सब तबाह कर देगा

डाकुओं का सरदार:- अच्छा तुम मुझे यह क्यों बता रहे हो

जोरावर:- जी मेरी उससे बनती नही है मैं तो बस शहजादे को लेने आया था ताकि खलीफा के सामने में बहादुर लगूँ

डाकुओं का सरदार:- तुम भी मेरी तरह ही एक चालबाज इंसान हो तुम मुझे अच्छे लगे

जोरावर झुककर हाथजोड़कर बैठ जाता है

जोरावर:- मैं आपका ही गुलाम हुँ हुजूर आप जो कहेंगे वो ही करूँगा
बस आप हैदर को मार डालना हुजूर

डाकुओं का सरदार:- आखिर तरकीब क्या है तुम्हारी और उनके साथ ही क्यों आये हो

जोरावर:- हुजूर आप एक काम करें फिलहाल शहजादे को मेरे हवाले कर दें और हैदर समेत सब का कत्ल कर दें
उसके बाद में शहजादे को खलीफा के हवाले करके उनका भरोसा जीत लूँगा और इनाम के तौर पर दरबार में ओहदा हासिल कर लूँगा 
फिर मैं वहाँ कि सारी बातें यहाँ भेजा करूँगा जिससे आपको सुल्तान बनने में आसानी हो

डाकुओं का सरदार:- शाबास , अगर में सुल्तान बना तो तुम्हें वजीर बनाऊँगा

जोरावर:- हुजूर आप का सर्फ हासिल हो सके बस

डाकुओं का सरदार:- जाओ और हैदर को भेजो

जोरावर सिर झुका कर :- जैसा आपका हुक्म

 

जोरावर, डाकुओं से मिलकर आ गया था

 

वाजिद गुस्से में :- आखिर इतनी देर क्यों लगा दी वहाँ 
जोरावर खामोशी के साथ नम चेहरे लिये
हैदर :- क्या कहा डाकूओ ने 
जोरावर:- वो शहजादे को छोड़ देंगे , मगर बदले में वो तुम्हें चाहते हैं 
फरहीद :- क्या बकवास कर रहे हो
जोरावर:- वो हैदर को मार देना चाहते हैं, तभी शहजादे वापिस आ पायेंगे
फरहीद:- चुप हो जाओ शैतान 
हैदर :- ठीक है मैं जाऊँगा
फरहीद:- नहीं मैं तुम्हें जाने नही दूँगा 
हैदर:- चाचा , मेरी जान शहजादे के जान के मुकाबले मामूली सी है शहजादे को सही सलामत ले जाये 
मेरी फिक्र ना करे

 

हैदर घोड़े से उतर कर घाटी पर चढ़ते जाता हुआ

 

कहानी जारी है  ..................

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