Episode 1
क्या इस खुबसुरत वातावरण का गला , तकनीक और सॉफ्टवेयर के तार में फँस कर उलझ कर रह जायेगा
आखिर आने वाली नस्लो का क्या होगा क्या वो इस खबसुरत प्रकृति कि रक्षा करेंगे
या वह कोई दायित्व लेंगे
क्या उनके नजरो में इस खुबसुरत दुनिया कि कोई अहमियत होगी
क्या वह सुबह उठकर ठण्डी हवाओ में खड़े होकर बागानो में घुमे फिरेंगे
क्या बारिश के आने पर वह छतरी लेकर उस मौसम में घुमेंगे
क्या गर्मी के मौसम को वो झेल पायेंगे या सर्द रातो में वह कभी , आग जलाकर हाथ सेकेंगे
क्या उन्हे इस खुबसुरत दुनिया की मनोरम कलाकृतियो को देखकर कभी हैरानी होगी
मुझे तो ऐसा कुछ नही लगता , आने वाले वक्त में इंसानो का हाल क्या होगा यह तो आज की इस चलती फिरती मनुष्य व्यवस्था को देखकर ही पता लगाया जा सकता है
पता चलता है , हाँ पता चलता है
कि आने वाले कल में इस खुबसुरत प्रकृति की कद्र करने वाला कोई इंसान नही होगा
कोई नही होगा जहाँ में , जो उन उड़ते हुये परिंदो पर गौर करे क्योंकि उनके सिर हमेशा गुलामी मे झुके होंगे
और वो लोग इस गुलामी में खुश होंगे
कोई नही होगा जहाँ में , जो बदलते मौसमो को अहसास करे
क्योंकि वो लोग उस वक्त , रंग बदलती बनावटी दुनिया के मोह में लगे होंगे
कोई ऐसा नही होगा जो , दुसरो के लिये कुछ वक्त निकाले
क्योंकि उस बनावटी दुनिया में वो ही जी सकेगा जो खुद के लिये जीये
हाँ चरमरा जायेगी इंसानियत कि सारी कामयाबीयाँ
कोई इंसान ऐसा नही होगा जो दुसरो को निचा दिखाये बिना नही रह सका हो
लोग घमंड में रौब डालकर लोगो को निचा दिखाते हुये चलेंगे
क्योंकि उनके पास बहुत ही महँगी बहुत ही अमुल्यनीय चीजे होगी
उस बनावटी दुनिया में वो बहुत ही अकेला , दबा , कुचला हो जायेगा जो तकनीक की इस दौर मे पीछे रह गया
वो किसी जानवर जैसा सलुक में लिया जायेगा
उसके लिये अब तकनीक की दौर में कामयाबी ही उसकी जिंदगी का अहम काम होगा , वरना
कीड़ा मकोड़ा समझ कर उसे कुचल दिया जायेगा |
केरल जहाँ लोग बाढ़ से ग्रस्त हैं हजारो लाखो लोगो कि जिंदगी जैसे खत्म हो चुकी थी ,
लोगो ने अपना घर दर और अपने रिश्तेदारो को खोया
लोग हताश निराश और वेबस हो चुके थे जैसे उनमें जीने की उम्मीद ही नही थी
बाढ़ आपदा से पीड़ित लोग अब अपने छतों मे खड़े होकर आसमान की तरफ नजर रखे हुये थे कि कब कोई हैलिकॉप्टर आये और उनके लिये खाने का सामान लाये
एक ऐन्युअल फंक्शन कि पार्टी में
साहिल - कैसे हो दोस्त सब ठीक है
आरिब - हाँ सब ठीक है और बताओ तुम कैसे हो
साहिल - सब बढ़िया है मगर
आरिब - मगर
साहिल - दोस्त आरिब हम एक प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं
आरिब - कौनसा प्रोजेक्ट दोस्त
साहिल - फ्लाईबोर्ड प्रोजेक्ट , आनेवाले कल में भविष्य मे इंसान हवा मे उड़ सके ऐसा प्रोजेक्ट
आरिब - मगर इसका फायदा क्या है हवाईजहाज , हैलीकॉप्टर यह सब तो है , इंसान इसकी मदद से हवा मे उड़ ही तो रहा है
साहिल : नही दोस्त हम एक ऐसी मशीन बनाने जा रहे है जो लोगो को प्राकृतिक आपदा से बचायेगी , जब लोगो को जरूरत होगी तब हमारी यह मशीन उन्हे बचायेगी एक ऐसी मशीन जिसे पहना जा सके एक पोशाक की तरह
आरिब : तुम्हारे कहने का क्या मतलब है
साहिल : मेरे कहने का मतलब है हम दोनो इस प्रोजेक्ट पर एक साथ काम कर रहे हैं
आरिब : नही नही साहिल ऐसी मशीन बनने मे काफी वक्त लगेगा हो सकता है इतनी ऊँचे तकनीक के मशीनो के लिए इंजिनियर्स तैयार नही है |
साहिल : मगर हम यह प्रोजेक्ट बनायेंगे
आरिब: नही साहिल मेरा प्रोजेक्ट कुछ और है मैं तुम्हारा अभी साथ नही दे सकता
साहिल : ठीक है दोस्त जैसी तुम्हारी मर्जी
मगर जब तुम्हारी जरूरत पढ़ेगी क्या तुम मदद करोगे
आरिब - हाँ क्यों नही
जगह - संयुक्त ऱाज्य अमेरिका
न्युटेक टॉवर सर रोबर्ट रिचर्ड का ऑफिस
सर रोबर्ट रिचर्ड - तो इंजीनियर साहिल खान आपका प्रोजेक्ट जेट फ्लाई मशीन मुझे पसंद आया सच में लोगों को प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए हमें ऐसी तकनीकों की जरूरत है आपको जानकर खुशी होगी की हमारी कम्पनी न्युटेक इंडस्ट्री आपके इस प्रोजेक्ट को स्पॉन्सर कर रही है आपको आपका लेब दिखा दिया जायेगा
साहिल - थेंक्स सर
सर रोबर्ट रिचर्ड - इस प्रोजेक्ट में अगर अापको किसी नयी तकनीक के उपकरणों की जरूरत है तो हमे बताना
साहिल - बिल्कुल
सर रोबर्ट रिचर्ड और साहिल खान एक दुसरे से हाथ मिलाते हुए
साहिल - मदद के लिए शुक्रिया
सर रोबर्ट रिचर्ड - आपका भी शुक्रिया
न्युटेक इंडस्ट्री का मैनेजर साहिल खान को उसका लेब दिखाता हुआ
मैनेजर - यह रहा आपका लेब
साहिल - ठीक है
मैनेजर - क्या यह प्रोजेक्ट आने वाले कल के लिये सफल होगा
साहिल - क्यों नही बिल्कुल सफल होगा
कहानी जारी है ...................
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