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author Nijamul Oct 31, 2025 5 min

Jetkhan Origin

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साहिल का बचपन हमेशा उड़ान और मशीनों के खयालों से भरा रहा था। कोलकाता की संकरी गलियों में वह अक्सर छत पर चढ़कर आसमान में उड़ते पक्षियों को निहारता और सोचता था कि क्या इंसान भी उनके समान स्वतंत्र उड़ान भर सकेगा। इंजीनियरिंग में उसने पंख, थ्रस्ट और नियंत्रण के सिद्धांत पढ़े, पर उसके लिए यह सिर्फ़ तकनीक नहीं थी — यह एक मानवता के लिए सेवा का माध्यम था। उसकी मंगेतर नूरा की मुस्कान और हौसला उसे हर दिन प्रेरित करते रहे। एक दिन दुबई में एक ऊँची इमारत अचानक गिर पड़ी। खबर ने साहिल को हिलाकर रख दिया। जब फ़रहान ने फोन पर आवाज़ में टूटकर बताया कि नूरा की मौत हो गई है, तो साहिल का दर्द व्यक्तिगत सीमा पार कर गया; वह सवाल बन गया — अगर मैं वहाँ होता तो क्या मैं कुछ बदल पाता? यह सवाल उसके भीतर एक फरमान बनकर उभरा। उसने तय किया कि अपने ग़म को काम में बदलेगा और ऐसी तकनीक बनाएगा जो आपदा के क्षणों में जीवन बचा सके। साहिल ने छोटे से गैरेज में काम शुरू किया। उसके सामने समस्या कठिन थी — एक ऐसा सूट जो सुरक्षित, नियंत्रणीय और विश्वसनीय हो। उसने नए प्रकार के रॉकेट मॉड्यूल, थर्मल और गैस सेंसर, और एरोडायनामिक शील्डों का संयोजन किया। हर असफलता के बाद वह सीखता और फिर से प्रयास करता। कुछ समय बाद उसका पहला कार्यशील प्रोटोटाइप तैयार हुआ — जेट-सूट जो एक इंसान को हवा में उठाकर नियंत्रित कर सकता था, और जोखिम भरे माहौल में प्रवेश कर बचाव कार्य कर सकता था।विश्वविद्यालय मित्र आरिब शुरू में सहायक था, पर धीरे-धीरे उसकी राय बदल गई। आरिब ने साहिल की महत्वाकांक्षा पर शक जताया और बाद में ईर्ष्या ने उसे कट्टर बना दिया। उसने साहिल की डिज़ाइनों की फाइलें चुरा लीं और अपने हितों के अनुरूप उनमें हेरफेर कर हथियार जोड़ दिए। वहीं साहिल ने सूट को अपनी मानवता के सिद्धांत पर विकसित रखा — बचाने और सुरक्षित रखने के लिए। पहली सार्वजनिक परीक्षा ने साहिल को असली नायाब बना दिया। जब उसने एक जलती हुई इमारत से लोगों को निकाला, तो उसकी पहचान रहस्यमयी रही — हाई-टेक मास्क और सशक्त उड़ान ने लोगों को एक नए नायक से मिलवाया। सोशल मीडिया पर ‘‘जेटमैन’’ की कहानियाँ फैलने लगीं। पर प्रशंसा के साथ खतरा भी आया। आरिब, अब एविल ग्लाइडर, ने शक्ति के एक अलग सिद्धांत को अपनाया और शहर में तबाही मचाने लगा ताकि वह साबित कर सके कि नियंत्रण और भय ही सच्ची ताकत हैं। दोनों के बीच टक्कर तब हुई जब हवाई अड्डे पर एक विमान दुर्घटना के कगार पर पहुँचा। एविल ग्लाइडर ने जानबूझकर स्थिति बिगाड़ दी, पर साहिल ने लोगों की जान बचाने का रास्ता चुना। युद्ध की तपिश में जब मुखौटा हटाया गया, तो सामने आरिब था — दोस्त, जिसने नफरत चुनी थी। उस क्षण साहिल को समझ आया कि उनकी लड़ाई केवल तकनीक की नहीं, उनके मूल्यों की भी थी। साहिल ने एविल ग्लाइडर को हराकर विमान को सुरक्षित लैंड करवाया, पर लड़ाई के घायल कगार पर भी जनता ने उसका चेहरा नहीं देखा। पुलिस के साथ विचार-विमर्श के बाद साहिल ने अपनी पहचान गुप्त रखने का निर्णय लिया। ऐसा इसलिए कि अगर लोग जेटमैन पर निर्भर हो जाएँ तो वे स्वयं जिम्मेदारियाँ नहीं निभाएँगे। साहिल ने सोचा कि एक नायक का असली काम दूसरों को सक्षम बनाना भी है, न कि केवल उनके लिए समस्याएँ हल करके उन्हें निर्भर बनाना।साहिल की उत्पत्ति — उसकी origin — व्यक्तिगत दुख से शुरु होकर व्यापक सामाजिक उद्देश्य में बदल गई। उसने दिखाया कि आविष्कार की दिशा उसके निर्माता के इरादों से तय होती है। एक ही तकनीक से जीवन भी बचाया जा सकता है और विनाश भी किया जा सकता है; फर्क पड़ता है कि वह किस दिल से आगे बढ़े। साहिल ने दर्द को विनाश का माध्यम न बनने दिया और उसे एक संजीवनी की तरह बदल दिया। उसने पुलिस और बचाव टीमों के साथ गुप्त रूप से तालमेल बना लिया ताकि सूट का उपयोग नियंत्रित और प्रभावी तरीके से हो सके। वह सार्वजनिक शौहरत से दूर रहते हुए भी हर संकट में हवा से उतरता — भूकंप, आग या किसी भी मानवीय आपदा में। उसकी उड़ान अब नूरा की याद का बोझ नहीं रही; वह उन अनगिनत लोगों की उम्मीद बन गई जिनके जीवन में एक पल का अंतर जीवित और मृत के बीच तय कर देता था। लेकिन जेटमैन के उदय ने बड़े स्तर पर सवाल खड़े कर दिए। वैश्विक ताकतें और राजनीतिक भू-भाग उन तकनीकी नवाचारों को अपनी तरफ खींचने लगीं। कुछ देश उसकी मदद चाहते थे, कुछ उससे भयभीत होकर उसे नियंत्रित करने का प्रयास करने लगे। साहिल के सामने अब नई चुनौतियाँ थीं — सिर्फ़ व्यक्तिगत लड़ाइयाँ नहीं, बल्कि नैतिक सीमाएँ और वैश्विक दायित्व। उसने तय किया कि वह अपनी उड़ानों का इस्तेमाल मानवता की सेवा के लिए ही करेगा, पर यह भी समझा कि दुनिया अब बदल चुकी थी और तकनीक की कीमत अब व्यक्तिगत नहीं रही — वह सामूहिक थी। आख़िरकार, जेटमैन की उड़ान ने सिर्फ़ लोगों को बचाया ही नहीं बल्कि बड़े राजनीतिक सवाल भी खड़े कर दिए। कई देश एकजुट होकर ‘‘संघीय देश’’ बनने पर विचार करने लगे, और कुछ पुराने साम्राज्यों ने अपनी ताकत बनाये रखने की योजना शुरू कर दी। साहिल समझ गया कि अब उसकी लड़ाई व्यक्तिगत सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर होगी। वह तैयार था — अपने सूट और सिद्धांतों के साथ, हर बार जब भी मुश्किलें आयेंगी वह हवा से उतरने को।

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