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author Nijamul Feb 27, 2026 5 min

Mahmud Of Ghazni ( Ra. ) - Episode 2

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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

डिस्क्लेमर :-
यह कहानी सुल्तान महमूद गजनवी रहमतुल्लाह अलैह गाजी कि जिंदगी पर लिखी गयी है 
इस लेख से जुड़ी जानकारीयाँ विकिपीडिया और इतिहास कि किताबों समेट सोशल मीडिया से लिये गये हैं , इस कहानी को बयान करने का थीम लेखक का अपना विचार है , इस कहानी का सिर्फोसीर्फ मकसद मुसलमानों को उनके सुनहरे तारिख से रूबरू कराना है , यह कहानी इसके अलावा और किसी मकसद के लिए नहीं लिखा गया है 
बराहे करम अपने सवाबदीद पर अमल करें , शुक्रिया

पहले एपिसोड में आपने पढ़ा कि गजनवी साम्राज्य के पहले सामानी साम्राज्य कि क्या व्यवस्था थी जिसके छत्रछाया में इस सल्तनत का विकास हुआ 
और सुल्तान महमूद गजनवी ने अपने जंग के पहले अनुभव को इलेख खाँ के साथ जंग करके हासिल किया जिसमें इलेख खाँ बुरी तरह हारा

 

अब आगे

 

सबकतगिन ने हिंदू शाही साम्राज्य में एक और हमला किया था , लगमान के मैदान में गजनी सल्तनत की फौज और हिंदु शाही फौज आपस में एक दुसरे से टकराई हुयी थी

अपनी छावनी में सबकतगीन अपने एक सिपाहसालार से कहते हैं :- 
हम पहले भी लगमान और मुल्तान पर हमला कर चुके है और हजारों लोगो को गुलाम बनाकर गजनी भेज चुके है
हमारे लिये इस जंग में ज्यादा देरी होना नुकसान का सबब है , जंग जितनी जल्दी जीत ली जाये बेहतर है

एक सिपाहसालार :- जी हम जितनी जल्दी हो सके इसलिए जद्दोजहद कर रहे है हुजूर

सबकतगीन:- मुझे नही लगता कि लग्मान की कड़ी सर्दी जयपाल के पंजाबी फौजी झेल पायेंगे 
हमला तेज करो

महमूद कि कयादत में गजनवी फौज , जयपाल कि फौज पर कहर बन रही थी

 

जयपाल अपनी छावनी में अपने मंत्री जन के साथ

जयपाल :- हमारी फौज ज्यादा देर तक ठीक नही पायेगी 
हम फिर एक बार हार जायेंगे , यह हमसे बर्दाश्त के बाहर है

उसके सब मंत्री जन हाथ बाँधे सर झुकाए खड़े थे

जयपाल का एक मंत्री :- महाराज फिर क्या ?
अब आगे क्या करना है

जयपाल:- हमने एक गुप्त योजना बनायी है और इसी चाल में हम सबकतगीन को बुरी तरह फँसायेंगे

सब मंत्री जन एक दुसरे कि तरफ देखते हुये

 

सबकतगीन कि छावनी में जयपाल का संदेशवाहक पहुँचता है , जहाँ महमूद भी मौजूद थे

जयपाल का संदेशवाहक :- महाराज जयपाल अब आप लोगों से और युद्ध नही चाहते 
जितना नुकसान हुआ इसके एवज में महाराज जयपाल कि तरफ से 10 लाख दिरहम और 50 हाथी की रकम तावान के तहत पेश कि जाती है
ग्रहण करें

सबकतगीन :- ठीक है, अपने राजा जयपाल से कह दो कि सल्तनत ए गजनी के सुल्तान सबकतगीन इससे राजी है और इस तावान के रकम को वसूलने के लिये अपने कुछ खास सिपाहसालारों को भेजा जा रहा है

जयपाल का संदेशवाहक :- जी

 

महमूद इस बातचीत में बीच में आते हुये

महमूद ( सबकतगीन से ) :- अब्बाजान क्या यह ठीक है ?
हम जंग जितने के करीब है और अब तावान का रकम लेकर जीती हुयी जमीन को छोड़ देना सही नही हैं

सबकतगीन :- मेरे बेटे हमें हमेशा सुजबुझ से काम लेना चाहिये अगर जयपाल अपनी हार मानकर हमसे समझौता कर रहा है तो इसमें हमें भी नर्मी बरतनी चाहिए

 

जगह :- लाहौर किला
जयपाल का राजदरबार

तख्त पर बैठा जयपाल और उसके सामने सबकतगीन के खास सिपाहसालार खड़े थे जो तावान का रकम वसुलने आये थे

एक सिपहसलार :- महाराज, तावान का रकम जितनी जल्दी हो सके अदा कर दिया जाये आप जानते हैं हमें देरी पसंद नही

जयपाल हल्की मुस्कुराहट के साथ:- सैनिकों पकड़ कर कैद कर दो इन सब को

 

सिपाहसालार एक दुसरे कि तरफ देखते है

सबकतगीन कि तरफ से भेजा गये खास अफसर 
लाहौर के किले में कैद कर लिये जाते हैं

इतने समय में जयपाल ने हिंदुस्तान के कई हिंदू राजाओं को एक कर लिया था दिल्ली ,अजमेर, कन्नौज व कलन्जर के हिंदु राजाओ कि मदद से एक बहोत बड़ी सेना को मुत्तहीद कर लग्मान में गजनवी के फौज पर एक बड़े हमले के लिये तैयार हो चुका था

सबकतगीन अपने सिपाहसालारों के इंतेजार मे अपनी फौज के साथ लग्मान में ही पड़ाव डाले बैठे हुये थे

काले घने बदलों के साथ एक बड़ी भारी फौज लगमान के एक तरफ और गजनवी फौज के सामने धीरे धीरे सामने बढ़ती जा रही थी

 

एक घुड़सावर तेजी से उनकी तरफ आता हुआ

गजनवी फौज जो वापस गजनी जाने की तैयारी में थी वो बिल्कुल अचम्भे में पड़ गई थी

घुड़सावर चिल्लाता हुआ :- हमारे साथ धोखा हुआ है......... हमारे साथ धोखा हुआ है

सबकतगीन एक ऊँची जगह से ज्यापाल की फौज को देख रहे थे उनकी नजर जहाँ जहाँ भी तक देखती वहीं वहीं जयपाल की फौज नजर आती थी सबकतगिन (हाथ दुआ में उठाकर) :- या अल्लाह मेरी मदद कर

 

महमूद गजनवी अपने चेहरे को पानी से धो रहे थे

तभी एक सिपाहसलार दौड़ता हुआ :- हुजूर हुजूर

महमूद(अपने फौजियों से) :- हमले के लिए तैयार हो जाओ , हम पीछे नहीं हटेंगे

 

जंग के मैदान में जयपाल की फौज की तादाद गजनवी फौज के हौसले पस्त कर रहे थे

महमूद अपनी फौजियो को जोश दिलाते हुए :- ए अल्लाह के बहादुर मुजाहिदो , ए अल्लाह के गाजियों क्या तुमने जंगे बद्र का वाक्या नही सुना की उस जंग में सिर्फ 313 मुसलमानों थे और उनके मुक़ाबले में 1000 काफिर थे जो उनसे तीन गुना ज्यादा थे फिर भी मुसलमान जीते क्योंकी वो अल्लाह पर ईमान रखने वाले थे अल्लाह उनका मददगार था , अल्लाह पर यकीन रखो बिल्कुल फतेह हम मुसलमानो की होगी फतेह हम मुसलमानों की होगी

महमूद , जयपाल के फौज से टकराने के लिए अपना घोड़ा दौड़ा चुके थे :- हमला ............

जयपाल के फौज का मंत्री (हाथी में बैठे हुये)
:- आक्रमण 
तीरो की बरसात कर दो

गजनवी फौज तीरो के हुए हमले से बचने के लिये खुद को अपनी ढालो से बचाव कर लेते हैं

सबकतगीन :- उनकी फौज बहुत बड़ी है हमें उसकी कोई कामजोरी तलाश करनी होगी जाओ हमारे फौज से कहो की पाँच सौ पाँच सौ के गिरोह में खुद को बाँट ले और जयपाल के लश्कर में कोई कमजोर कड़ी तलाश करे जैसे ही कोई कमजोरी दिखे उस पर मुसलसल तेज हमले शुरू कर दे

वजीर :- जी हुजूर

जयपाल की फौज चाहे बहुत बड़ी थी लाखो की तादाद में मौजुद थी मगर गजनवी की फौज ने अपने हाजिर जवाबी , दिलेरी और एक अल्लाह पर ईमान के भरोसे जयपाल की लाखो के फौज पर कहर बन कर टूट रही थी जयपाल की फौज पीछे होने पर मजबूर हो रही थी

जयपाल इतनी बड़ी हार देख कर हताश हो गया और गुस्से में चिल्ला उठा :- आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

लगमान के मैदान में गजनवी फौज में एक जोश और एक जज्बा भर गया और नारा ए तकबीर की सदा हवा में गुंज उठा जिससे सुनकर दुश्मन फौजियो के हौसले पस्त होने लगे

जयपाल का गुरूर और घमंड उसके निराशा और हताशा में बदल गया

महमूद कि कयादत में गजनवी फौज ने ना सिर्फ लग्मान को फतेह किया बल्कि इससे बढ़ कर
काबुल और जलालाबाद को भी जीतकर सल्तनत ए गजनी का हिस्सा बना दिया

 

कहानी जारी है .......................

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