बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
डिस्क्लेमर :-
यह कहानी सुल्तान महमूद गजनवी रहमतुल्लाह अलैह गाजी कि जिंदगी पर लिखी गयी है
इस लेख से जुड़ी जानकारीयाँ विकिपीडिया और इतिहास कि किताबों समेट सोशल मीडिया से लिये गये हैं , इस कहानी को बयान करने का थीम लेखक का अपना विचार है , इस कहानी का सिर्फोसीर्फ मकसद मुसलमानों को उनके सुनहरे तारिख से रूबरू कराना है , यह कहानी इसके अलावा और किसी मकसद के लिए नहीं लिखा गया है
बराहे करम अपने सवाबदीद पर अमल करें , शुक्रिया
दुसरे एपिसोड में आपने पढ़ा कि सरदार सबकतगीन ने लग्मान पर हमला किया और जयपाल ने समझौते के लिये दस लाख दिरहम और पच्चास हाथी तावान कि रकम देने का वादा किया
मगर यह जयपाल कि चाल थी , जयपाल ने लाहौर में सबकतगीन के खास सिपाहसालारों को कैद कर लिया और दिल्ली अजमेर कन्नौज और कलन्जर के हिंदु राजाओ को मिलाकर एक बड़ी फौज लेकर लग्मान मे गजनवी की फौज से टकराने निकला
जिसका जबाव गजनवी फौज ने भी अपनी हाजिर जबावी, दिलेरी और एक अल्लाह पर ईमान के भरोसे दिया , और जंग में जयपाल कि बड़ी हार हुयी
अब आगे
जगह :- बल्ख का किला गजनवी सल्तनत
सबकतगीन बीमार होकर अपने बिस्तर में पड़े थे
वजीर और सबकतगीन का छोटा बेटा इस्माइल हकीम के साथ दौड़ कर आते हुये
आँखों से आँसू लिये झिलमिलाते आँखों से कमजोर आवाज में
:- महमूद बेटा महमूद
इस्माइल: - अब्बा हुजूर मे इस्माइल हुँ
सबकतगीन:- अच्छा इस्माइल तुम हो ?
महमूद कहाँ है उसे मेरे पास लेकर आओ महमूद
इस्माइल:- अब्बाजान, महमूद भाई जान तो गजनी सल्तनत से दुर सामानी साम्राज्य के निशापुर शहर में
एक विद्रोह को कुचलने के लिये गये है उन्हें आप ही के हुक्म से भेजा गया है
सबकतगीन ( मुरझाये चेहरे से ) :- अच्छा
सबकतगीन ( इस्माइल से ) :-
इस्माइल मेरे बेटे मेरे करीब आओ और अपना हाथ मेरे हाथ में दो
सबकतगीन बिस्तर में अपनी आखिरी साँसे ले रहे थे
और अपने बाद इस्माइल को सल्तनत का वारिस घोषित कर देते हैं
जगह :- निशापुर का एक उजड़ा जंगी मैदान , सामानी साम्राज्य
रात का वक्त महमूद अपने खेमे के बाहर चाँदनी रात मे तेज हवाओं को अपने में मिलता पा रहे थे
जैसे यह हवायें महमूद से कुछ कहना चाहती हो
और यहाँ बल्ख के किले में सबकतगीन इस फानी दुनिया को छोड़कर अपने हकीकी रब से जा मिले
गजनी सल्तनत में इस्माइल कि ताजपोशी कर दी जाती है
इस्माइल तख्त पर बैठते ही अपने पिता के अख्लाक और मकसद को भूलकर ऐशो आराम में डुब जाता है और सल्तनत के खज़ाने इसी ऐशो आराम पर लुटाने लगता है इस्माइल इसी तरह सल्तनत की सरहदो से भी फौजियों को कम करता रहता है
जगह :- निशापुर
अयाज :- हुजूर हुजूर
महमूद:- कहो अयाज क्या खबर लाये हो
अयाज:- हुजुर आपका भाई इस्माइल सल्तनत के सारे खजाने ऐशो-आराम में लुटा रहे हैं
यहाँ तक कि उन्होंने सरहद से फौजें कम कर दी है
आवाम इस्माइल से नाराज हो रही है
महमूद ( गुस्से में) :- मै जानता था कि वो तख्त के लायक ही नही है सरहदों से फौज कम करके उसने गजनवी सल्तनत के दुश्मन को गजनी पर हमला करने का मौका दे दिया है
अयाज :- आपका क्या हुक्म है हुजूर
महमूद:- हमारी फौज को इकट्ठा करो हम इस्माइल से जंग लड़कर उससे तख्त छीन लेंगे
अयाज:- जैसा आपका हुक्म हो
गजनी का किला
इस्माइल का वजीर दौड़ कर आते हुये
सुल्तान सुल्तान
इस्माइल:- क्या हुआ वजीर इतना परेशान क्यों हो
वजीर:- सुल्तान आपके बड़े भाई
आपके बड़े भाई
अपनी फौज लेकर गजनी के जानिब करीब आ रहे है
वो आपको तख्त से हटाना चाहते है
इस्माइल ( हड़बड़ाहट में ) :- भाई जान यह आप नही कर सकते , वसीयत में तख्त मुझे मिला है
इस्माइल ( वजीर से ) किले कि कड़ी घेराबंदी कर दो
हमारी फौज को गजनी के चारो तरफ लगा दो
कहीं से भी भाई जान की फौज किले के अंदर दाखिल ना हो पाये
समझ गये
वजीर :- जी हुजूर जी
इस्माइल अपने बचाव के लिए कीले की सारी फौज को उतार देता है
कहानी जारी है ...................
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