बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
डिस्क्लेमर :-
यह कहानी सुल्तान महमूद गजनवी रहमतुल्लाह अलैह गाजी कि जिंदगी पर लिखी गयी है
इस लेख से जुड़ी जानकारीयाँ विकिपीडिया और इतिहास कि किताबों समेट युट्युब विडियोस जैसे
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लिये गये हैं , इस कहानी को बयान करने का थीम लेखक का अपना विचार है , इस कहानी का सिर्फोसीर्फ मकसद मुसलमानों को उनके सुनहरे तारिख से रूबरू कराना है , यह कहानी इसके अलावा और किसी मकसद के लिए नहीं लिखा गया है
बराहे करम अपने सवाबदीद पर अमल करें , शुक्रिया
तीसरे एपिसोड में आपने पढ़ा कि सबकतगीन बल्ख के किले में इंतकाल कर जाते है और उससे पहले
वसीयत में अपने छोटे बेटे इस्माइल को सुल्तान बना देते हैं, तख्त के नशे मे चुर इस्माइल ऐशो आराम मे डूब गये , अपने छोटे भाई को मकसद से बहका पाकर महमूद ने उससे तख्त छीनने का फैसला किया
और अपनी फौज लेकर गजनी की तरफ बढ़ गये
यह खबर पाकर इस्माइल अपने वजीर को किले और गजनी के सरहद कि मजबुत पेहराबंदी करने का हुक्म देता है
अब आगे
जगह :- गजनी
गजनी किले के सरहद पर हजारों कि फौज लेकर महमूद खड़े थे
किले के एक बारहंदे से इस्माइल छुपकर इस फौज को देख रहे थे
किले कि मजबुत पेहराबंदी कर दी गयी थी
महमूद :- हम यहीं डटे रहेंगे
एक सिपहसलार :- जी हुजूर
महमूद :- किले में एक बार राशन खत्म हो गया तो इस्माइल खजाने नहीं खाएगा हमें किले की घेराबंदी टूटने का इंतजार करना चाहिये फिर किला अपने आप हमारे कब्जे में आ जाएगा
अयाज :- हुजूर गजनी फौज आपस में लड़कर तबाह हो जाएगी
महमूद :- मैं जानता हूँ और अगर इस्माइल पीछे नहीं हटा तो इसका जिम्मेदार सिर्फ इस्माइल खुद होगा
किले के मजबूत पेहराबंदी के साथ साथ सरहदो पर बड़े बड़े हाथियों की फौज गजनी के हिफाजत के लिए लगा दिए गए थे
महमूद गजनवी :- हमारे एक पत्रवाहक को भेजा जाए अगर मेरा भाई हमारी शर्त मान लेता है तो ये जंग नहीं होगी
किले के अंदर
इस्माइल पत्र को पढ़कर
:- हमारे भाईजान चाहते हैं की हम खुरासान के राज्यपाल बन जाए और तख्त को छोड़ दे
उन्होंने हमें चारों तरफ से घेरा हुआ है
इस्माइल हंसते हुए :- जब तक मेरी फौज मेरे साथ है मैं तख्त नहीं छोड़ुँगा
वजीर :- फिर क्या हुजूर
इस्माइल:- वजीर, सुनो हमारी तरफ से भी एक पत्र वाहक वहाँ भेजा जाए और उन्हें कड़े अल्फाज में यह बात चेताया जाये
वजूर :- जी ऐसा ही
महमूद गजनवी अपनी फौज को लेकर खड़े थे महमूद गजनवी के सामने इस्माइल का संदेशवाहक खत पढ़ता हुआ
"गजनी के सुल्तान इस्माइल कि तरफ से उनके बड़े भाई महमूद को पैगाम की वो अपनी फौज लेकर वापस चले जाये और सल्तनत में अमन को कायम करने की नियत रखे वर्ना हमारी फौज आप
महमूद(भारी आवाज में खत पढ़ने वाले को रोकते हुए) :- बस .........
अब जंग शुरू हो चुका था
किले के तीरबाज , गजनवी की फौज पर तीरों की बरसात कर रही होती है
वही दोनों तरफ तलवारबाज , अपने तलवार का फन दिखा रहे होते है
मामला अलग होता अगर गजनवी फौज का मुक़ाबला किसी और फौज से हो रहा होता मगर फौज एक दुसरे से लड़ रही थी
और इस्माइल के हाथी फौज उसके किसी काम न आए इस्माइल की फौज बड़ी जरूर थी मगर महमूद जैसे दिलेर और जबाज़ सिपाहसालार के सामने इस्माइल की फौज की तरतीब काम नहीं आई अपनी कम फौजी तदाद को लेकर भी महमूद किले के अंदर दाखिल हो गए
लगभग कड़ी मुसक्कत के बाद किले के अंदर भी इस्माइल कि फौज पर काबू पा ही लिया गया
हाथ पैरो में बेड़ियां बाँधे घुटनों के बल बेठा आँखों में आंसुयें लिये इस्माईल :- हमें मुआफ कर दीजिये भाईजान
महमूद(तख्त पर बैठे हुये थे ) :- तुमने सुल्तान बनने के बाद सल्तनत के खजाने ऐशो आराम में लुटाने चालू कर दिये , अब्बाजान के अख़्लाक को एक ताक में रखकर उनके मक़सद को भूलकर तुम दुनिया के लज्जतो में खो गये और तो ओर तुमने हाथियार न डाल कर गजनी फौज को आपस में लड़वाया और हमारे बहादुर फौजी मारे गए और तुम कह रहे हो हम तुम्हें माफ कर दे
महमूद अपने (सिपाहियों से) :- सिपाहियों हमारे छोटे भाई को यहां से दूर गुजगान के किले ले जाओ और इसे वहां हमेशा के लिये नजरबंद कर दिया जाए
इस्माइल की बाकि फौज हथियार डाल देते हैं जिन्हें महमूद गजनवी के फौज में शामिल कर लिया जाता है
महमूद गजनवी की तख्त पोशी की जाती है और उन्हें गजनी सल्तनत का सुल्तान मुनतकीब कर लिया जाता है
जगह :- गजनी का शाही दरबार
एक शाही बैठक
महमूद (अपने तख्त पर बैठे हुये) :- हमने सामानी सल्तनत के निजाम पर गौर किया है, सल्तनत बहुत कमजोर होती जा रही है
एक सिपाहसालार :- जी हुजूर, एक करके सब रियासते सामानी सल्तनत के मुखालफ्त होती जा रही है
महमूद:- हम सामानी सल्तनत में अमन के लिए अपने एक खास सिपाहसालार को भेजना चाहते हैं ताकि वो रियासत के दरम्यान इत्तेहाद कायम कर सके
अयाज :- हुजूर, जिस सल्तनत को अपनी हिफाजत के लिए आपकी जरूरत पड़े फिर उस सल्तनत का हुक्मरान भी फिर आप ही को होना चाहिए
सारे सिपाहसालार :- सही कहा , बिल्कुल सही कहा ............
महमूद :- तुमने सही कहा , मगर बस एक आखिरी बार कोशिश करना चाहता हुँ
अयाज :- जी आप जैसा कहे हुजुर
कहानी जारी है .....................
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