बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
डिस्क्लेमर :-
यह कहानी सुल्तान महमूद गजनवी रहमतुल्लाह अलैह गाजी कि जिंदगी पर लिखी गयी है
इस लेख से जुड़ी जानकारीयाँ विकिपीडिया और इतिहास कि किताबों समेट युट्युब विडियोस जैसे
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बराहे करम अपने सवाबदीद पर अमल करें , शुक्रिया
चौथे एपिसोड में आपने पढ़ा कि सरदार सबकतगीन के दो बेटे , महमूद और इस्माइल की फौज आपस में गजनी पर हुकुमत के लिये एक दुसरे से टकराने के लिये तैय्यार है , और महमूद गजनवी, गजनी किले को जीत जाते हैं और इस्माइल को गुन्जान के किले में कैद करवा देते हैं और फिर महमूद की ताजपोशी की जाती है महमूद, गजनी के नए सुल्तान बन जाते हैं और सामानी सल्तनत की कामजोर हालत पर गौर करते हुये वहाँ पर अमन और इत्तेहाद कायम करने के लिए आपने खास सिपाहसालार को भेजते हैं
अब आगे
सामानी सल्तनत, अंदरूनी तौर पर मुत्तहीद नही रह पाती हैं जिस कारण महमूद गजनवी भी सामानी सल्तनत से अलग हो जाते हैं , सामानी सल्तनत को अंदर से टूटा पाकर , इलेक खाँ सामानी सल्तनत पर फिर एक बार हमला करता है और सामानी सल्तनत को पुरी तरह खत्म कर देता है
इलेक खाँ जानता था कि सामानी हुक्मरानो से अलग होकर भी कभी सामानी सल्तनत का वफादार रहा महमूद कभी ना कभी उससे बदला लेने कि कोशिश करेगा , मगर इलेक खाँ महमूद गजनवी से दुश्मनी नही चाहता था
इसलिये उसने एक खत लिखकर महमूद से दोस्ती का पैगाम भिजवाया
जगह :- गजनी किला
महमूद का शाही दरबार
इलेक खाँ का पत्रवाहक, अपने वजीर और खास सिपाहसालारों के साथ अपने तख्त पर बैठा महमूद
के सामने खत पढ़ता हुआ
इलेख खाँ का खत गजनी के सुल्तान अबुल कासिम महमूद के नाम
अबुल कासिम महमूद, हमने तुम्हारी जाँबाजी और दिलेरी जंग के मैदान में अपनी आंखों से देखी है और तुम बहुत ही अक्लमंद इंसान हो तुम जैसे जवान मर्द से दुश्मनी रखना मेरे लिए ठीक नहीं मैं तुम्हें अपना जाँ नशीन और करीबी बनाना चाहता हूँ इसलिये मैं तुम्हारा निकाह अपनी बेटी से करना चाहता हुँ ताकि मैं तुम्हें अपना दामाद और करीबी बना लूँ ताकी हमारे दरम्यान किसी तरह कि अब दुश्मनी ना रहे
बादशाह ए काशगर इलेक खाँ
पैगाम सुनकर
महमूद :- पैगाम में हमारे लिए बहुत ही फायदे मंद
बातें लिखी गयी है जहाँ तक बात निकाह के मसले की है इसपर हम कुछ वक्त गौरो फिक्र के बाद ही कुछ कह पायेंगे
मलिक अयाज :- हुजूर, ये निकाह सिर्फ आपके लिए ही नही , सल्तनत के लिए भी जरूरी है निकाह के बाद सुल्तान ए काशगर भी आपका हर वक्त मददगार होगा सरहद से जुड़े हुये एक ताकतवर सल्तनत का होना हमारे लिए अच्छा साबित होगा
महमूद:- हम भी यही सोच रहे हैं अयाज
बाकी सिपाहसालार :- जी हुजूर इस निकाह के पैगाम को कबुल कर लिजिये ये हमारे सल्तनत के लिये काफ़ी फायदेमंद होगा
महमूद (अपने वजीर से) :- अबुल हसन, तुम्हारी क्या राय है
अबुल हसन:- हुजूर मैं भी यही सोचता हुँ आपको यह निकाह कर लेना चाहिए
महमूद :- ठीक है ! हमारी तरफ से भी इलेक खाँ को एक खुशखबरी वाला खत भेजा जाये
हमने तय कर लिया है कि हम सल्तनत ए काश्गर कि शहजादी से निकाह के लिये तैय्यार हैं
यह सुनते ही शाही दरबार में
सुब्हान अल्लाह और माशा अल्लाह का जिक्र गूँजने लगता है
महमूद गजनवी का निकाह काश्गर की शहजादी कौसर जहाँ से हो जाता है
शादी की एक बहोत बड़ी दावत दी जाती है जिसमें सारी गजनी को फुलों से और रोशनी से सजा दी जाती है
दावत के बाद
महमूद रात के वक्त खाना खाने के बाद अपने शाही बाग में इलेक खाँ के साथ घूमते हुये
इलेक खाँ :- महमूद , आपके साथ वक्त बिताते हुये मुझे बहोत बेहतर लग रहा है , आप जैसा बहादुर नौजवान अब मेरा करीबी और दामाद है मैं अपने आपको खुशकिस्मत मानता हूँ
महमूद :- शुक्रिया , मगर इतनी तारीफ कर के तो आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं
इलेक खाँ :- नही आप कि खुसुशियात देखकर ही हर कोई आपकी तारीफ करेगा इसमें शर्मिंदगी कैसी ?
महमूद :- मुझे भी आपकी तारीफ करनी पड़ेगी कि आप ने आखिर सामानी सल्तनत को जीत ही लिया
इलेक खाँ :- हाँ सालो मुसक्कत और आपकी सामानी सल्तनत से अलहदगी की वजह से मुझे यह मुकाम हासिल हुआ
महमूद:- मैने कुछ बातों पर गौर किया है
इलेक खाँ :- कहिये कौनसी बाते हैं वो ?
महमूद:- सामानी हुकमत के साथ भी वही हुआ जो तारीख में मौजूद सभी ताकतवर सल्तनतों के साथ होता आया कि इतिहास के पन्ने खत्म होते ही उनका इतिहास भी खत्म हो गया , मगर एक बात याद रखना में तारीख में सिर्फ एक हुक्मरान की हैसियत से नहीं बल्कि अदलो इंसाफ कायम रखने वाले हुक्मरान के तौर पर पहचाना जाना चाहता हुँ , सामानी सुल्तान के साथ जो कुछ भी गलत हुआ मैं जल्द ही इसके कसूरवारों का पता लगाकर कड़ी सजा दूंगा
कहानी जारी है ..............
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