बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
डिस्क्लेमर :-
यह कहानी पुरी तरह से मुहम्मद बिन क़ासिम रहमतुल्लाह अलैह के निजी जिंदगी को बयान नही करती है
इस लेख से जुड़ी जानकारीयाँ विकिपीडिया से लिये गये हैं और इस कहानी को बयान करने का थीम लेखक का अपना विचार है
इस कहानी का सिर्फोसीर्फ मकसद मुसलमानों के दरमियान उनके सुनहरे तारिख से रूबरू कराना है
यह कहानी इसके अलावा और किसी मकसद के लिए नहीं लिखा गया है
बराहे करम अपने सवाबदीद पर अमल करें
पहले एपिसोड में आपने पढ़ा कि राजा दाहीर को उसके दो ज्योतिषो ने उसके तख्ता पलट की चेतावनी दी जिसके बाद
अरब के ताईफ शहर में मुहम्मद बिन कासिम पैदा होते है उनके पैदा होने कि खुशी में उनके पिता एक दावत रखते हैं जिसमे हज्जाज बिन युसूफ उनके लिए हदिया भेजते है
कासिम बिन युसूफ बीमारी के चलते इंतेकाल कर जाते हैं और उनका दफ़नाते हुए मुहम्मद बिन
कासिम एक कोने से देख रहे होते हैं और वहीं हज्जाज बिन युसुफ, मुहम्मद बिन कासिम के पास पहुँचते हैं
आगे .....
कासिम बिन यूसुफ का घर,
आंगन में हज्जाज बिन युसुफ अपने भतीजे मुहम्मद बिन क़ासिम का हाथ पकड़े हुए होते हैं
घर के अंदर बंद कमरे से आवाज आती है :- मेरा
शौहर इंतेकाल कर चुका है और आप मेरे इस जिगर के टुकड़े को भी ले जाना चाहते हैं
हज्जाज बिन युसुफ :- बहन में मजबूर हूँ मैं अपने भाई के उस वादे को पूरा करना चाहता हूँ जो उसने इस बच्चे से किया है वर्ना मुझे ये मंजूर नहीं की में इस छोटे बच्चे को उसकी मां से जुदा करूँ
मुझ पर भरोसा रखो में इस बच्चे को अपने बच्चों से कम नहीं मानूंगा और इसे एक बहादुर मुजाहिद बनने में हमेशा इसके साथ रहुँगा
कासिम बिन युसुफ की बीवी :- ठीक है आप मुहम्मद बिन कासिम को ले जा सकते हैं मगर कभी कभी इसे मेरे पास ले आया करियेगा ताकी में इसके चेहरे को देख कर अपने दिल को थोड़ा सुकून दे सकूँ
मुहम्मद बिन कासिम अपने ताया अब्बा के साथ इराक की तरफ़ सफ़र में निकलते हैं हिजाज से इराक का लंबा रेगिस्तानी सफर था क़रीब हफ़्ते भर का सफर उन अबाद बंजर जमीनों से होते हुए
इराक के सबसे बड़े और खूबसूरत शहर में मुहम्मद बिन कासिम पहुँचते हैं
मुहम्मद बिन कासिम :- तायाअब्बा क्या यही बगदाद शहर है
हज्जाज बिन युसुफ
:- हां मेरे बेटे यही है बगदाद
हज्जाज बिन युसुफ , मुहम्मद बिन कासिम को लेकर अपने घर में जाते हैं अरबी संरचना का छोटा सा महल जो अरबीक डिजाइन से बनाया गया था
दरवाजे पर जैसे ही हज्जाज पहुँचते हैं दौड़ कर उनकी 5 साला छोटी बेटी जुबैदा आकर उनके गले लग जाती है हज्जाज जुबैदा को उठाकर गोद में ले लेते हैं और कासिम का हाथ पकड़ कर कहते हैं :- आओ बैठा अंदर चलो
हज्जाज की बीवी :- अस्सलामुअलैकुम ब रहमतुल्लाही ब बरकताहु
हज्जाज बिन युसुफ :- वा अलैकुम अस्सलाम ब रहमतुल्लाही ब बरकताहु
हज्जाज की बीवी (मुहम्मद बिन कासिम को देखती है) :- क्या ये आपका भतीजा मुहम्मद बिन क़ासिम है
हज्जाज (सर हिलाते हुए) :- हाँ ये मुहम्मद बिन कासिम बिन युसुफ है
हज्जाज की बीवी जाकर मुहम्मद बिन कासिम के चेहरे को चुम लेती है
हज्जाज कि बीवी :- तुम्हारा इस्तक़बाल है बेटा घर में है
हज्जाज (अपनी बीवी से) :- जाओ इसे ले जाओ और नहलाओ अच्छे कपड़े पहनाना याद रहे ये हमारे बच्चों से कम नहीं है
हज्जाज की बीवी :- जी ऐसा ही करुंगी
शाम के वक्त
मुहम्मद बिन कासिम अपने तायाजाद भाई बहनो के साथ खेल रहे है।
हज्जाज बिन युसुफ और उनकी बीवी बच्चों को खेलते हुए देखती हैं
हज्जाज की बीवी :- क्या इतनी आसानी से कासिम कि बीवी ने आपको इस बच्चे को अपने साथ लाने दिया
हज्जाज:- नहीं ये इतना आसान नहीं था
हज्जाज की बीवी :- फिर किस तरह से आप इस कम उम्र के बच्चे को हिजाज से बगदाद ले आए
हज्जाज:- एक वादा जो मेरे भाई ने इस बच्चे से किया था की वो इसे एक मुजाहिद देखना चाहता है
हज्जाज की बीवी :- तो वो अपने इकलौते बेटे को जंग में भेजेंगे
हज्जाज:- हां यही उनकी दिल कि इच्छा थी और मैं इस काम में अपने भाई की मदद करुंगा मैं इस बच्चे को एक शानदार जंगजू बनाऊँगा , एक मर्द ए मुजाहिद जिसको जंग के मैदान में कोई हराने वाला ना होगा अब ये काम मेरे जिम्मे है
और मैं इससे पीछे भी क्यों हटुँ जब मेरे अल्लाह ने मुझे यह नेमत दी है कि मैं इराक का राज्यपाल हुँ
सिंध :- राजा दाहिर का राज दरबार
मंत्री:- महाराज, राज कोष में से धन कम होता जा रहा है इन छ से सात सालों से सिंध साम्राज्य की सरहदो पर मजबूत फौज लगा दी गयी है और हमने आपके कहने के मुताबिक किले की भी मजबुत पेहराबंदी की है और इन सब मे धन को अधिक लोप हुआ है
दाहीर (हँसता हुआ) :- तो इसमे दुखी होने वाली क्या बात है मंत्री , प्रजा हमारे किस काम आएगा लगा दिजिये इन पर अधिक से अधिक कर
मंत्री :- महाराज पहले ही हम अपने प्रजा से कई गुना कर लेते आ रहे हैं कहीं ऐसा ना हो की प्रजा आपकी बागी हो जाए
राजा दाहिर गुस्से से :- तो क्या करे हम , तुम ही बताओ
क्या अपने हाथो से ही अपनी जान ले लूँ ताकि ये किस्सा ही खत्म हो जाए एक बात याद रखना अपने सिँहासन को बचाने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हुँ
मन्त्री :- महाराज क्षमा करे मगर
राजा दाहिर:- ये अगर मगर छोड़ो जैसा में कह रहा हूं वैसा करो
मंत्री सिर झुकाते हुए :- जी महाराज जैसा आप कहे
सिंध का शहरी बाजार
राजा के मंत्री और सैनिक ढोल बजाते हुए शहर में लोगो को इकठ्ठा करते हैं लोगो की भीड़ उन्हें घेर कर खड़ी हो जाती है बाजार में खामोशी छा गई थी एक सैनिक एक चबूतरे पर चढ़कर संदेश पढ़ता है
"मेरा ये संदेश मेरी प्रजा के लिये में दाहीर सेन सिंध साम्राज्य का महाराजा अपने प्रजा को आदेश देता हूँ की वो अपने महाराजा की सेवा में ज्यादा से ज्यादा धन कर के रूप में राज कोष में जमा करवाए
और कर जमा करने के सुचि निम्न वर्ग के लोगों के लिये कुछ इस प्रकार है
महाराज की सलामती के लिए तुमपर यह कर लगाया गया है और जो भी कोई इस संदेश के खिलाफ काम करता है वो दोषी पाया जाएगा और राजा से बगावत करने के लिए उसे मृत्युदण्ड दिया जायेगा "
ये सुनते ही प्रजा अक्रोशित हो जाता है बाजार में हल चल मच जाता है
प्रजा चिल्लाती है :- ये अन्याय है ये अन्याय है..........
सैनिक लोगो को धकेलते हुए आगे बढ़ती है बाजार में कुछ लोगो की भीड़ अक्रोशित होकर सैनिको पर पथराव कर रही होती है
सैनिक सजा के तौर पर अपना बचाव करते हुये उन पर हमला कर देते है
इस वजह से लोगो में अफरा तफरी मच जाती है
इधर बगदाद मे
हज्जाज बिन युसुफ , मुहम्मद बिन कासिम को तलवार बाजी सिखा रहे हैं
हज्जाज बिन युसुफ :- ठीक से तुम्हारा सारा ध्यान मेरे तलवार पर होना चाहिए हर एक वक्त अपनी नजर मेरे तलवार और मेरे हाथों पर रखो एक पल के लिये भी अपनी नजरे इनसे मत हटाना
मुहम्मद बिन कासिम :- जी ऐसा ही करूँगा
हज्जाज बिन युसुफ : - अपने हाथो से अपनी तलवार को जोर से पकड़ो की तुम्हारा हाथ तुम्हारे शरीर से अलग हो जाए मगर तुम्हारा हाथ तलवार से अलग न हो पाये
मुहम्मद बिन कासिम :- जी याद रखुँगा
आज के लिए इतना ही कल हम तुम्हे तलवार बाजी के साथ साथ तीर बाजी का भी हुनर सिखायेंगे
मुहम्मद बिन कासिम :- जी ताया अब्बा ऐसा ही
कहानी जारी है..........…
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