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author Nijamul Jan 31, 2026 5 min

Muhammad Bin Qasim Episode 4

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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

डिस्क्लेमर :-
यह कहानी मुहम्मद बिन क़ासिम रहमतुल्लाह अलैह 
गाजी कि जिंदगी पर लिखी गयी है 
इस लेख से जुड़ी जानकारीयाँ विकिपीडिया से लिये गये हैं और इस कहानी को बयान करने का थीम लेखक का अपना विचार है 
इस कहानी का सिर्फोसीर्फ मकसद मुसलमानों के दरमियान उनके सुनहरे तारिख से रूबरू कराना है 
यह कहानी इसके अलावा और किसी मकसद के लिए नहीं लिखा गया है 
बराहे करम अपने सवाबदीद पर अमल करें

 

तीसरे एपिसोड में आपने पढ़ा कि हज्जाज बिन युसुफ अपनी बेटी जुबैदाह का निकाह, मुहम्मद बिन क़ासिम से कर देते हैं वहीं मुहम्मद बिन कासिम ने एक ऐहतेजाज में शिराज को जीत लिया था और इसके बाद खिलाफत में उनके बहादुरी के किस्से मशहुर होने लगे थे
इतने कम उम्र में ये बहुत बड़ा करनामा था जिससे खुश होकर खलीफा अल-वलीद प्रथम की तरफ से 
मुहम्मद बिन कासिम को वहाँ का गवर्नर मुंतकिब कर दिया गया था

 

आगे ....................

 

खलीफा अल वलीद प्रथम मुहम्मद बिन कासिम के बहादुरी से बहोत खुश थे और इस कारण उन्होने हज्जाज बिन युसुफ और मुहम्मद बिन कासिम को अपने राजदरबार में पेश होने के लिए पैगाम भिजवाया

 

खलिफा अल वलिद प्रथम का राजदरबार

 

अल वलिद अपनी शानो शौकत के साथ अपने तख्त पर बैठे थे हुजुम में हाथ बांधे सारे वजीर खड़े थे और उनमे सबसे आगे हज्जाज बिन युसुफ और मुहम्मद बिन कासिम
अल वलिद प्रथम :- हज्जाज बिन युसुफ हम तुम्हारे और तुम्हारे भतीजे के करनामे से बड़े खुश हैं 
हज्जाज बिन युसुफ :- मैं आपका एहसान मंद हूँ आली जनाब हमारे लिये क्या हुक्म है 
अल वलिद प्रथम  :- हमने तारिक बिन जियाद को अंदुलस फतेह के लिए भेजा है और कुतैबाह इब्ने मुस्लिम को तुर्किस्तान के फतेह के लिए भेजा है मगर हम काफी दिनो से मशरिक के जानिब सिंध को फतेह करने का ख्बाव देख रहे हैं मगर हमें सिंध के लायक अब तक कोई मिल नहीं रहा था हज्जाज बिन युसुफ हम यह चाहते हैं की तुम्हारा भतीजा मुहम्मद बिन कासिम शिराज का राज्यपाल सिंध में फतेह के लिए हमलावर हो

 

हज्जाज बिन युसुफ मुहम्मद बिन कासिम की तरफ देखते हैं

 

मुहम्मद बिन कासिम:- मैं आप एहसान मंद हूं आली जनाब मुझे फक्र होगा की में सिंध की सरजमीन में अल्लाह की राह में क़ुर्बान हो जाऊ मुझे सिंध का यह महाज मंजूर है

अल वलिद प्रथम :- मुझे तुम्हें देख कर तुम्हारे पिता की याद आती है हज्जाज बिन युसुफ तुम्हें मुबारक हो के तारिख में तुम अपने हैं भतीजे के बहादुरी के लिए जाने जाओगे

हज्जाज बिन युसुफ :- जी , मैने इसकी परवरिश बिल्कुल इसके पिता के वादे के मुताबिक की है और यह इस पर खड़ा भी उतरा

मगर जनाब में बुढ़ा हो रहा हूं मैं इस महाज के लिए सिंध का सफर तय नही कर पाऊँगा

अल वलिद प्रथम :- तो ऐसा करो तुम बगदाद में ही रह जाओ और अपने किसी काबिल को कासिम के साथ भेजो यकीनन अल्लाह फतेह देगा

हज्जाज बिन युसुफ :- जी आली जनाब जैसा आप चाहे

अल वलिद प्रथम :- जाओ इस जंग की तैय्यारी में मशगूल हो जाओ और मुहम्मद बिन कासिम याद रखना सिंध तुम्हारा होगा

मुहम्मद बिन कासिम :- इंशा अल्लाह

अल वलिद प्रथम :- आज की ये सभा यहीं बरखास्त की जाती है

 

हज्जाज बिन युसुफ और मुहम्मद बिन कासिम अपने सिपाहसालारों के साथ बैठकर इस महाज कि तैय्यारी के लिये इस गंभीर मुद्दे पर बात कर रहे थे

 

तभी कुर्दोगलु जैसा एक सिपाहसालार :- सिंध की तरफ फौज की रवानगी हमें किसी तरह के खतरे में ना डाल दे हुजुर क्योंकि इससे पहले भी सिंध की तरफ बढ़ने वाले खिलाफत के फौजीदस्ते हिंद को जीतने में नाकाम रहे 
सिंध में हमले के लिए हमें एक बड़ी फौज की जरूरत है जहां खिलाफत के लश्कर पहले ही अंदुलस और तुर्किस्तान की तरफ भेजे दिये गये हैं क्या ऐसे में एक छोटी फौजी दस्ते को सिंध की तरफ ले जाना अच्छा रहेगा ?

 

मुहम्मद बिन कासिम :- पहली बात कि मेरा ईमान एक अल्लाह पर है जिसने आसमान और जमीन को बनाया और इनको मिटाने भी वाला है
खलीफा अल वलिद प्रथम का हुक्म मेरे लिये पत्थर की लकीर कि तरह है अगर उन्होंने यह जिम्मेदारी मुझे दी है तो मुझे सिंध की जमीन पर ही मौत आये मैं या तो शहीद कहलाऊँ या फिर फातेह सिंध

हज्जाज बिन युसुफ ( उठकर ) : - देखा तुम लोग ने ये मेरा भतीजा मुहम्मद बिन कासिम कितना बहादुर है की वो खिलाफत के लिये बड़े बड़े काफिरो के फौज से भी टकराने के लिए तैय्यार है तो शामिल हो जाओ इस अजीम लश्कर में अज़ीम फातेह मुहम्मद बिन कासिम के साथ

 

सुबह का वक्त ठंडी हवा चल रही थी सूरज अभी अपनी मीठी नींद में था उसके हल्के हल्के निकले किरणें आँखों को नर्मी और सुकुन दे रहा था 
मुहम्मद बिन कासिम अपने सिपाहसालारों के साथ सिंध के महाज के लिए तैय्यार हो चुके थे 
कासिम अपने घोड़े को तैय्यार कर रहे थे तभी वहाँ जुबैदाह आती है 
जुबैदाह :- यकीन नहीं होता हम इतनी जल्दी बिछड़ रहे हैं 
मुहम्मद बिन कासिम:- आली जनाब खलिफा अल वलिद प्रथम का हुक्म मेरे लिए बहुत जरूरी है दुसरी तरफ मेरे लिए तुमसे बिछड़ना बहुत मुश्किल है 
जुबैदाहः तैय्यारी करली आपने 
मुहम्मद बिन क़ासिम :- सिपाही हमेशा तैय्यार रहता है
जुबैदाह :- अपना ख्याल रखिएगा मेरी दुआ साथ है आपके , हर मुश्किल आसान हो आप की , खैरियत के साथ जाये और खैरियत से वापस आए , कमियाबी मुक़द्दर हो आपकी 
मुहम्मद बिन कासिम:- अपना ख्याल रखना जुबैदाह
( कहानी का तह दृश्य अर्तगरूल गाजी के पहले सीजन से लिया गया है )

 

रेगिस्तान का सफर और दोपहर कि चिड़चिड़ाती धुप के साथ साथ गर्म हवाएँ

हजारो कि तादाद मे ऊँट और घुड़सवार कि फौज लेकर मुहम्मद बिन क़ासिम सिंध कि तरफ बढ़ रहे थे

 

वो संग गिरा जो हायल है , रस्ते से हटाकर दम लेंगे
हम राहे वफा के रहरू है , मंजिल पे हीे जाकर दम लेंगे

यह बात अयाँ है दुनिया पर , हम फुल भी है तलवार भी है
या बज्म जहाँ महकायेंगे , या खुन में नहा कर दम लेंगे

अरबाबे हुकमत से कहदो , यह अज्म किया है हम सब ने , 
जो हक के मुकाबिल आयेगा , हम उसको मिटा कर दम लेंगे

हम एक खुदा के कायल है , पिंदार के हर बुत तोड़ देंगे 
हम हक के निशान है दुनिया में , बातिल को मिटा कर दम लेंगे

जो सीना ए दुश्मन चाक करे , बातिल को मिटा कर खाक करें 
ये रोज का किस्सा पाक करे , वो जुर्ब लगा कर दम लेंगे

ये फितनो सर के परवरदा , तखरीब के सामाँ लाक करे
हम बज्म सजाने वाले है , हम बज्म सजा के दम लेंगे

ये काफिरो कि फौज भला , क्या खाक डरायेंगे हमको
हम राहे वफा के रहरू है , मंजिल पे ही जाकर दम लेंगे

इस जमीन के जर्रे जर्रे को , हम अपने खुन से सिचेंगे
अल्लाह कि कसम इस धरती को , गुलजार बना कर दम लेंगे

जिस खुन ए शहीदों से अब तक , गुल रंग हुयी है ये जमीं 
उस खुन के कतरे कतरे से , तुफान उठा कर दम लेंगे

 

कहानी जारी है ....................

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