बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
डिस्क्लेमर :-
यह कहानी मुहम्मद बिन क़ासिम रहमतुल्लाह अलैह
गाजी कि जिंदगी पर लिखी गयी है
इस लेख से जुड़ी जानकारीयाँ विकिपीडिया से लिये गये हैं और इस कहानी को बयान करने का थीम लेखक का अपना विचार है
इस कहानी का सिर्फोसीर्फ मकसद मुसलमानों के दरमियान उनके सुनहरे तारिख से रूबरू कराना है
यह कहानी इसके अलावा और किसी मकसद के लिए नहीं लिखा गया है
बराहे करम अपने सवाबदीद पर अमल करें
चौथे एपिसोड में आपने पढ़ा कि खलिफा अल वलिद प्रथम के हुक्म के मुताबिक मुहम्मद बिन क़ासिम सिंध के जानिब उसे फतेह करने के लिये निकल पड़े थे और इस फौजी दस्ते को हज्जाज बिन युसुफ कूफ़ा के शहर से ही नियंत्रित कर रहे थे
अब आगे .............................
सन् ७१० ईसवी
फारस के शिराज़ शहर से ६,००० सीरियाई फौजियों ,६०० ऊंटों की सेना तथा ३००० सामान ढोने वाले बाख्त्री ऊंटों समेत करीब एक हजार घुड़सवार फौजी दस्तों को लेकर मुहम्मद बिन क़ासिम मशरिक की जानिब आगे बढ़ रहे थे
मुहम्मद बिन कासिम (अपने ऊँट पर बैठे हुये अपने एक सिपाह सालार जो घोड़े पर थे) :- हम मकरान होते हुए सिंध की सरहद में पहुंचेंगे एक खबरी को मकरान के राज्यपाल तक यह बात पहुँचा दो ताकी मकरान में हमारा इस्तक़बाल हो सके
सिपाहसालार :- जी हुजूर ऐसा ही
मुहम्मद बिन कासिम का काफ़िला कई हफ्तों के सफर के बाद मकरान की बंजर जमीन और रेतीले टीलो तक पहुँच चूका था
जगह - मकरान के राज्यपाल का शाही दरबार
जहाँ मुहम्मद बिन क़ासिम अपने प्रमुख सिपाहसालार के साथ आते हैं
मकरान के राज्यपाल :- अस्सलामु अलैकुम
मुहम्मद बिन कासिम:- वा अलैकुम अस्सलाम
मकरान के राज्यपाल :- मकरान में आपका ख़ुशामदीद है मुहम्मद बिन कासिम
मुहम्मद बिन कासिम :- मुझे भी बड़ी खुशी हुयी है सिंध के बड़े नजदीक हुँ में
मकरान के राज्यपाल :- जानता हूँ आप सिंध फतेह करने निकले हैं
मुहम्मद बिन कासिम :- बिल्कुल
मकरान के राज्यपाल :- यहाँ ठहरे और कुछ वक्त आराम करे
मकरान के राज्यपाल :- सुनो खानशामाहो को जल्द दस्तरख्वान लगाने के लिए कह दो आज दोपहर का खाना हम अपने अजीज मुहम्मद बिन कासिम के साथ करेंगे
मकरान के राज्यपाल के साथ खाना खाते हुये मुहम्मद बिन क़ासिम
मकरान के राज्यपाल :- जहाँ तक मुझे खबर है राजा दाहिर ने कुछ सालो से अपनी सरहद पर फौजी दस्तों मे इजाफा किया है बड़े तादाद में उसने अपने सरहद में मजबूती की है
मुहम्मद बिन क़ासिम:- हम किसी के तादाद से नही डरते हमारा ईमान ही हमारा हौसला है
मकरान के राज्यपाल :- बिल्कुल सहमत हूँ आपकी बहादुरी के किस्से सुने है मगर इतने कम फौज के होने के कारण मैं नही चाहता कि आप पर कोई मुसीबत आये आपको किसी तरह कि कोई मुश्किल ना आये इसलिये मै आपको फौजी मदद दूंगा जो आपको सिंध फतेह में मदद करेगा
मुहम्मद बिन कासिम ( मकरान के राज्यपाल कि तरफ देखते हुये) :- आपका बहुत बहुत शुक्रिया अल्लाह आपको सलामत रखे
मकरान का राज्यपाल :- मकरान कि जमीन पर उम्मैयद खिलाफत कि हुकुमत नयी नयी है
मैं तो बस यही चाहता हूं कि सिंध की जमीन में दीन ए इस्लाम का परचम बुलंद हो ताकी मकरान की सरहदो में किसी कुफ्र की हुकुमत का साया ना हो
मुहम्मद बिन कासिम:- बेशक अल्लाह इसमें हमारी मदद करेगा
मकरान के राज्यपाल :- इंशा अल्लाह
मुहम्मद बिन क़ासिम, मकरान के राज्यपाल से विदा लेते है
मकरान के राज्यपाल ( मुहम्मद बिन क़ासिम का हाथ पकड़ कर) :- मेरी उम्मीद आपसे बहुत ज्यादा है
मुहम्मद बिन क़ासिम:- आप मुझे इस उम्मीद में हमेशा खड़ा उतरा पायेंगे
अपने ऊँट पर चढ़कर मुहम्मद बिन क़ासिम अब अपने पीछे दस से पन्द्रह हजार का फौजी लश्कर लेकर सिंध के जानिब बढ़ रहे थे
तभी उन्हें फ़न्नाज़बूर और लास बेला में एक विद्रोही टुकड़ियों से भीड़ना पड़ा
विद्रोही सिंध पर किये जाने वाले हमले के पुरी तरह खिलाफ थे और मुहम्मद बिन क़ासिम के फौज से लड़ने कि जरूरत कर रहे थे
मगर मुहम्मद बिन क़ासिम ने अपनी हैरतअंदाजी से इस विद्रोह को पुरी तरह दबा दिया और विद्रोहियों पर काबू पाया लिया
रेगिस्तान का सफर अंत हुआ फिर वे बड़ी बड़ी कश्तियों के सहारे सिंध के आधुनिक कराची शहर के पास स्थित देबल की बंदरगाह पर पहुंचे, जो उस ज़माने में सिंध की सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह थी।
देबल से मुहम्मद बिन क़ासिम कि फ़ौजें मशरिक की जानिब ओर निकलती गई और रास्ते में नेरून और सहवान जैसे शहरों को कुचलती गई। यहाँ उन्होंने बहुत सारे बंदी बनाए और उन्हें गुलाम बनाकर भारी संख्या में हज्जाज बिन युसुफ और ख़लीफ़ा अल वलिद प्रथम को भेजा। बहुत सा ख़ज़ाना माल ए गनीमत के तौर पर भेजा गया और कुछ फौजियों में बाँटा गया।
कहानी जारी है ....................
Blog Comments (0)