भारत सरकार ने सभी प्रकार के ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफार्म जो की किसी भी प्रकार के रियल मनी गेमिंग से जुड़े थे पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
भारत की संसद ने 21 अगस्त 2025 को एक बिल पास किया है — Promotion and Regulation of Online Gaming Bill, 2025, जिसमें ऑनलाइन रियल-मनी गेम्स (real-money games) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।इस बिल की मर्यादा (approval) हो चुकी है; राष्ट्रपति की मंज़ूरी केवल औपचारिकता ही रही। कानून बनने से संबंधित Fantasy gaming प्लेटफॉर्म्स — जैसे Dream11 — का रियल-मनी सेक्शन बंद होना तय माना जा रहा है।Dream11 ने अपने ‘पेड कंटेस्ट्स’ (paid contests) — जो उसकी कमाई का 90% हिस्सा थे — रोक (pause) दिए हैं। यानी, यूज़र्स अब पैसे लगाकर गेम नहीं खेल पाएंगे और उसके आमदनी का मुख्य स्रोत बंद हो गया है।
यूज़र्स अपने पैसे कैसे निकाल सकते हैं?
Dream11 ने यह स्पष्ट किया है कि अब यूज़र्स बंद हुए गेमिंग सेक्शन से जुड़े अपने पैसों को निकाल सकते हैं। इसका मतलब:
यदि आपने अपने अकाउंट में बैलेंस रखा हुआ था (चाहे आपने जीता हो या डाला हो), तो अब उस बैलेंस को रिडीम या विदड्रॉ करना संभव होगा।
Dream11 ने इस पर लिया गया फैसला (pause on paid contests) वास्तविक पैसे के गेमिंग सेक्शन को बंद करने के लिए ही किया है, न कि यूज़र बैलेंस को रोके रखने के लिए।
इसका मकसद यूज़र्स को उनका पैसा वापस देने का भरोसा देना है।
बिल का उद्देश्य: सरकार ने रियल-मनी गेमिंग को वित्तीय और मनोवैज्ञानिक नुकसान के आधार पर 'हानिकारक' माना है
। इसी वजह से इसका पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
Dream11 पर प्रभाव: Fantasy gaming सेक्शन (जहाँ असल पैसे लगते थे) अब बंद कर दिया गया है। कंपनी भविष्य में फ्री या स्किल-बेस्ड विकल्पों की ओर रुख कर सकती है, जैसे FanCode आदि पर ध्यान बढ़ाना
कानूनी स्थिति: पहले Supreme Court और कई High Courts ने Dream11 जैसे fantasy sports को "game of skill" मानकर कानूनी रूप से वैध घोषित किया था
। लेकिन नया कानून (‘real money’ वाले गेम्स पर) इसे एका अलग दिशा में लेकर गया है — रोक लगाना, चाहे पूर्व में स्किल-बेस्ड माना गया हो।
Dream11 ने हाल ही में real-money paid contests बंद कर दिए हैं, क्योंकि सरकार ने संसद में ऐसे गेम्स पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यूज़र्स अपने अकाउंट में पड़े पैसों को निकाल (withdraw) सकते हैं, जैसा कि कंपनी ने अनुमति दी है। यह कदम सरकार के नई ऑनलाइन गेमिंग बिल और वित्तीय-नियामकीय बदलावों का सीधा परिणाम है।
भारत सरकार ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और रियल-मनी गेमिंग (real-money gaming) वाले ऐप्स/वेबसाइट्स पर प्रतिबंध लगाने का फैसला कुछ ठोस कारणों से किया है। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।
1. लत (Addiction) और सामाजिक असर
- ऐसे ऐप्स से खासकर युवा और विद्यार्थी वर्ग तेजी से जुड़ते जा रहे थे।
- छोटे-छोटे दांव लगाकर शुरुआत करने वाले लोग धीरे-धीरे लत के शिकार हो जाते थे और ज़्यादा पैसे हारते थे।
- इससे पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर कर्ज़, झगड़े और मानसिक तनाव बढ़ रहे थे।
2. वित्तीय नुकसान और ठगी का खतरा
- कई बार लोग अपनी मेहनत की कमाई इन खेलों में हारकर कर्ज़दार हो जाते थे।
- कई नकली ऐप्स और वेबसाइटें पैसे लेकर भाग जाती थीं।
- सरकार का कहना है कि यह सेक्टर लोगों के लिए आर्थिक हानि का बड़ा कारण बन रहा था।
3. युवाओं का भविष्य खतरे में
- छात्रों और बेरोजगार युवाओं में यह आदत सबसे ज़्यादा बढ़ रही थी।
- आसान कमाई के लालच में लोग पढ़ाई और नौकरी से ध्यान हटा रहे थे।
- सरकार मानती है कि यह देश के भविष्य और कार्यबल पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
4. कानूनी और टैक्स से जुड़ी दिक्कतें
- इन प्लेटफ़ॉर्म्स पर हो रहे पैसों का लेन-देन अक्सर ग्रे एरिया में होता था।
- टैक्स चोरी, मनी-लॉन्ड्रिंग और विदेशी निवेश से जुड़े खतरे भी सामने आ रहे थे।
- सरकार को डर था कि इस सेक्टर को नियंत्रण में न रखने पर अवैध धन प्रवाह बढ़ सकता है।भारत सरकार ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और रियल-मनी गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म्स पर रोक लगाने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि यह लोगों की लत, आर्थिक नुकसान और परिवारों पर बुरा असर डाल रहे थे,अवैध लेन-देन और टैक्स चोरी हो रही थी,और यह धीरे-धीरे जुए जैसी समस्या का रूप ले रहे थे।
5. जुए और कौशल आधारित खेल (skill-based games) की बहस
- पहले सुप्रीम कोर्ट और कई हाईकोर्ट ने Dream11 जैसे फैंटेसी गेम्स को “Skill-based” मानकर वैध माना था।
- लेकिन सरकार का तर्क है कि जब इसमें पैसे दांव पर लगते हैं, तो यह असल में सट्टेबाजी (betting/gambling) जैसा हो जाता है।
- इसलिए अब नया कानून बनाकर इसे पूरी तरह बैन करने का फैसला लिया गया।
6. जनहित और राजनीतिक दबाव
- समाज में लगातार शिकायतें बढ़ रही थीं कि ये ऐप्स गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को बर्बाद कर रहे हैं।
- कई राज्य सरकारें (जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल) पहले ही ऐसे गेम्स को बैन कर चुकी थीं।
- केंद्र सरकार पर भी राजनीतिक और सामाजिक दबाव था कि वह राष्ट्रीय स्तर पर कड़ा कदम उठाए।
भारत सरकार ने ऑनलाइन सट्टेबाजी और रियल-मनी गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म्स पर रोक लगाने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि यह लोगों की लत, आर्थिक नुकसान और परिवारों पर बुरा असर डाल रहे थे,अवैध लेन-देन और टैक्स चोरी हो रही थी,और यह धीरे-धीरे जुए जैसी समस्या का रूप ले रहे थे।
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