अलिफ़ नगर जहाँ लोग बाढ़ से ग्रस्त हैं हजारो लाखो लोगो कि जिंदगी जैसे खत्म हो चुकी थी ,
लोगो ने अपना घर दर और अपने रिश्तेदारो को खोया
लोग हताश निराश और वेबस हो चुके थे जैसे उनमें जीने की उम्मीद ही नही थी
बाढ़ आपदा से पीड़ित लोग अब अपने छतों मे खड़े होकर आसमान की तरफ नजर रखे हुये थे कि कब कोई हैलिकॉप्टर आये और उनके लिये खाने का सामान लाये
सरकारी हॉस्पितल मे एक बच्चा
छोड़ो मुझे छोड़ो मुझे अम्मी के पास जाना है
अब्बू , अब्बू
वहाँ कि एक नर्स ( वाहिदा ) - बेटा , बेटा मेरी बात सुनो इधर देखो तुम्हारे अम्मी , अब्बू अभी आ जायेंगे
वो कही नही गये
नही मुझे अम्मी अब्बू के पास जाना है अम्मी अब्बू अम्मी अब्बू ( वह बच्चा जोर से रोते हुये )
वह नर्स एक कोने मे जाकर बहुत रो रही थी
तभी और एक दुसरी नर्स समीमा आप यहाँ है और आप इतनी रो क्यो रही है
नर्स वाहिदा - सिस्टर समीमा मुझे उस बच्चे का रोना और तड़पना अब और नही देखा जा रहा
वह नर्स समीमा उस नर्स वाहिदा को सांत्वना देते हुये
और उसके भी आँखो से आँसु निकल जाते है
और वह रोते हुये अल्फाज मे कहती है
नर्स समीमा - वाहिदा इस शहर में ऐसे सैकड़ो बच्चे है जो अपने माँ बाप को खो चुके है
और ऐसे सैकड़ो माँ बाप है जो अपने बच्चो को खो चुके हैं
बीस साल बाद
जगह - अलीफ़ नगर यूनिवर्सिटी
लास्ट डे ऑफ़ लास्ट ईयर स्टूडेंट्स
इब्राहिम - कैसे हो दोस्त और इंटरव्यू मे सब ठीक था
आरिब - हाँ सब ठीक था और बताओ तुमहर इंटरव्यू कैसा गया
साहिल - सब बढ़िया है मगर
आरिब - मगर
साहिल - दोस्त आरिब हम एक प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं
आरिब - कौनसा प्रोजेक्ट दोस्त
साहिल - फ्लाईबोर्ड प्रोजेक्ट , आनेवाले कल में भविष्य मे इंसान हवा मे उड़ सके ऐसा प्रोजेक्ट
आरिब - मगर इसका फायदा क्या है हवाईजहाज , हैलीकॉप्टर यह सब तो है , इंसान इसकी मदद से हवा मे उड़ ही तो रहा है
साहिल : नही दोस्त हम एक ऐसी मशीन बनाने जा रहे है जो लोगो को प्राकृतिक आपदा से बचायेगी , जब लोगो को जरूरत होगी तब हमारी यह मशीन उन्हे बचायेगी एक ऐसी मशीन जिसे पहना जा सके एक पोशाक की तरह
आरिब : तुम्हारे कहने का क्या मतलब है
साहिल : मेरे कहने का मतलब है हम दोनो इस प्रोजेक्ट पर एक साथ काम कर रहे हैं
आरिब : साहिल ऐसी मशीन बनने मे काफी वक्त लगेगा हो सकता है इतनी ऊँचे तकनीक के मशीनो के लिए इंजिनियर्स तैयार नही है |
साहिल : मगर हम यह प्रोजेक्ट बनायेंगे
आरिब: नही साहिल मेरा प्रोजेक्ट कुछ और है मैं तुम्हारा अभी साथ नही दे सकता
साहिल : ठीक है दोस्त जैसी तुम्हारी मर्जी
मगर जब तुम्हारी जरूरत पढ़ेगी क्या तुम मदद करोगे
आरिब - हाँ क्यों नही
जगह - तुर्की
न्युटेक टॉवर सर मेहमेत अलियार का अॉफिस
सर मेहमेत अलियार - तो इंजीनियर साहिल खान आपका प्रोजेक्ट जेट फ्लाई मशीन मुझे पसंद आया सच में लोगों को प्राकृतिक आपदा से बचाने के लिए हमें ऐसी तकनीकों की जरूरत है आपको जानकर खुशी होगी की हमारी कम्पनी न्युटेक इंडस्ट्री आपके इस प्रोजेक्ट को स्पॉन्सर कर रही है आपको आपका लेब दिखा दिया जायेगा
साहिल - थेंक्स सर
सर मेहमेत अलियार - इस प्रोजेक्ट में अगर अापको किसी नयी तकनीक के उपकरणों की जरूरत है तो हमे बताना
साहिल - बिल्कुल
सर मेहमेत अलियार और साहिल खान एक दुसरे से हाथ मिलाते हुए
साहिल - मदद के लिए शुक्रिया
सर मेहमेत अलियार - आपका भी शुक्रिया
न्युटेक इंडस्ट्री का मैनेजर साहिल खान को उसका लेब दिखाता हुआ
मैनेजर - यह रहा आपका लेब
साहिल - ठीक है
मैनेजर - क्या यह प्रोजेक्ट आने वाले कल के लिये सफल होगा
साहिल - क्यों नही बिल्कुल सफल होगा
तुर्की मिलट्री के हेड जनरल यासर गुलेर न्युटेक इंडस्ट्री के मालिक सर मेहमेत अलियार से मिलते हुए जनरल
जनरल यासर गुलेर - आपसे मिलकर खुशी हुई
सर मेहमेत अलियार - मुझे भी और सुऩाईये जनरल हमारी इंडस्ट्री से किस तरह के प्रोडक्टस चाहिये आपको
जनरल यासर गुलेर - हम एक फौज बना रहे है एक ऐसी फौज जो तकनीक मे बहुत बेहतर हो जिसके लिए हमें मशीनी शुट की जरूरत है
सर मेहमेत अलियार - में समझ गया जनरल आप एक मशीनी शुट की बात कर रहे हैं जिसे सैनिक पहन सके और वह मशीनी शुट हवा में भी उड़ सके और वह शुट उच्च और नयी तरह के तकनीक से भरे हथियारों से लेश हो
जनरल यासर गुलेर - हाँ
सर मेहमेत अलियार - हम इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं प्रोजेक्ट फ्लाई मशीन के नाम से
जनरल यासर गुलेर - ठीक है , मैं तुमसे कोल पर बात करूँगा
ओआइसी की बैठक
ऑआइसी प्रेसिडेंट :- जनरल यासर गुलेर , हमने आपको इस फौज के लिसे एक विशेष तरीके कि टेक्नॉलॉजी से लेश आरमर के लिये कहा था
क्या उस पर कोई काम हुआ
जनरल यासर गुलेर :- मैं आप सभी को बताना चाहता हुँ कि इस तरह कि टेक्नॉलॉजी पर काम शुरू हो रहा है , अगर इस तरह कि टेक्नॉलॉजी हमारे पास हो जाती है तो इंशा अल्लाह हमारी फौज दुनिया के सबसे ताकतवर फौजो में शामिल होगी
इंशा अल्लाह
डिजिटल कॉन्फ्रेंस मिटिंग में मौजुद सभी सदस्य - इंशा अल्लाह , इंशा अल्लाह
ईरान मिलिट्री जनरल ( ) - इंशा अल्लाह जनरल , जितनी लागत लगनी है वो सारी लगा दी जाये , अगर यह टेक्नॉलॉजी हमारे पास होती है तो हम , इजरायल से सीधी जंग छेड़ देंगे ,
डिजिटल कॉन्फ्रेंस मिटिंग में मौजुद सभी सदस्य - बिल्कुल
पाकिस्तान मिलट्री जनरल ( कमर जावेद बाजवा ) - बिल्कुल इस तरह का प्रोजेक्ट इस्लामी फौज को अभी से कई गुना ज्यादा ताकतवर बना देगी
इसके बन जाने के बाज मिलिट्री एक्सरसाइज के लिये ज्यादा देरी नही होनी चाहिये , जनरल
ओआइसी प्रेसिडेंट - हमें अपने फौजीयों कि हिफाजत के लिये जितने तरह के टेक्नॉलॉजीस कि जरूरत है वो सब जितनी जल्दी हो सके बना ली जाये तो सही होगा
जनरल यासर गुलेर - बिल्कुल , यह प्रोजेक्ट हम इसलिये ही चाहते है कि जंग के मैदान में कम से कम सैनिकों कि शहादत हो
ओआइसी प्रेसिडेंट - ठीक है
कहानी जारी है ………….
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