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author Nijamul Jan 21, 2026 6 min

Parvaaz E Ababeel Episode 8

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साहिल खान जब इस्लामिक मिलिट्री फोर्स में शामिल होने के लिये आता है
तब जनरल यासर गुलेर से मिलता है

साहिल:- आपसे मिलकर खुशी हुयी सर
जनरल यासर गुलेर :- मुझे भी साहिल

जनरल यासर गुलेर  :-
चलो मैं तुम्हे दुनिया के सबसे ताकतवर लड़ाकु एयरक्राफ्ट्स दिखाता हुँ

यह सब जेट विमान है साहिल

यह है F-16 Fighting Falcon
कम समय में दुश्मनो पर हमला करने में सक्षम 
दुनिया के किसी भी लक्ष्य को भेदने में सक्षम

और यह दुनिया के सबसे ताकतवर लड़ाकु विमानों मे से एक
Raffale 
जोकि हर नयी तकनीक से लेस है
परमाणु हमले में सक्षम
अपना खुद का रडार सिस्टम जो दुश्मनो के ठिकाने का पता लगाकर उनको जबाव देने की ताकत रखता है

और इसका तो किया ही कहने
Chengdu j10
किसी भी मौसम में किसी भी लक्ष्य पर तेजी से हमले करने में सक्षम 
इसमें लेजर गाइडेड बमों और सेटैलाइट गाइडेड बमों की क्षमता है
एक बार की उड़ान में कई ठिकानो पर बम गिराने में सक्षम

और यह है 
T - 50 sukhoi pak-fa
किसी भी प्रकार के रडार के पकड़ में नही आता

यह
SR - 31 Blackbird है
विश्व का सबसे तेज गति से उड़ने वाला लड़ाकू जेट वायु यान है। यह यान ध्वनि की गति से ३.४ गुना ज्यादा गति से उड़ सकता है।

और इसके जैसे दस एयरक्राफ्ट एक साथ दुश्मन के पैदल सेना पर हमला करे तो
दुश्मनो की कमर पुरी तरह से तोड़ देगा
F-35 lightning
अब तक का सबसे ताकतवर लड़ाकु विमान 
इसके लिये बस एक ही शब्द काफी है 
यह वो लड़ाकु विमान है जिसका तोड़ अभी तक विकसित नही हुआ

हमारे पास दुनिया कि हर तरह कि तकनीकी ताकत मौजूद हैं

यह हमारा मिलिट्री बेस है साहिल यह ही पृथ्वी की सबसे बड़ी मिलिट्री बेस है 
इस मिलिट्री बेस में करीब दुनिया के पच्चास से भी ज्यादा देशो की फौज मौजुद है
वायु सेना , थल सेना  , जल सेना
यह दुनिया की सबसे ज्यादा वायुयान और मिसाइले , और टैंक्स रखने वाला मिलिट्री बेस है
हमारा फ्युचर प्रोजेक्ट इससे भी बड़ा है
दुनिया के और इलाको में ठीक इस तरह के ही मिलिट्री बेस बनाने का काम चल रहा है 
मगर साहिल आने वाले वक्त में इस्लामिक मिलिट्री फोर्स का मिलिट्री बेस जमीन पर नही बल्कि हवा मैं तैर रहा होगा
साहिल - जनरल आपका मतलब है स्पेस स्टेशन
जनरल यासर गुलेर - बिल्कुल ठीक साहिल , स्पेस मिलिट्री बेस ऑफ अर्थ के नाम से जाना जायेगा

साहिल , जनरल यासर गुलेर की बातों से ध्यान हटाता हुआ मन ही मन कुछ सोचता

जनरल यासर गुलेर - क्या हुआ साहिल किस सोच में पड़ गये
साहिल - मै जब भी नींद मैं होता हुँ तो बस एक ही ख्वाव देखता हुँ के हिंदुस्तान के मुसलमानों को लेकर एक नये सफर में जा पहुँचु 
के मेरे पेशानी पर चिंता कि लकीरे साफ जाहिर करती हैं कि मेरी मंजिल मुझसे कितनी दुर है और उसे पाने के रास्ते कितने कठीन
मैं दिन भर सोचता रहता हुँ के इस कौम को कैसे उस ऊँचाईयों तक ले जाऊँ , 

मगर 
मैं जब मेरे मुस्लिम भाईयों पर गौर करता हुँ तो मैं क्या पाता हुँ कि मेरे मुसलमान भाई अपने लिये जिते हैं सबको अपनी पड़ी है , गलती करके चालाकी से अपने आपको बचाना बखुबी जानते है 
मगर अपनी गलती मानकर खुद को कुर्बान करना नहीं आता

और में किस किस पर इल्जाम लगाऊँ और यही मुसलमान जिनके सामने गिड़गिड़ा रहे है
यही समाज में ऊँचे तबके के लोग जिनकी नजरों मैं यही मुसलमान दो कौड़ी के ठैले वाले , ऑटो वाले , पंचर बनाने वाले , नाई हजाम से ज्यादा और कुछ नही है
मगर यहीं मुसलमान , मुस्लिम इत्तेहाद पर कभी गौरो फिक्र नहीं करते 
यही मुसलमान हमारे कौम के सबसे बड़े मुनाफिक है

जनरल यासर गुलेर :- सही कहा साहिल,  हिंदुस्तान में मुसलमानों ने कभी भी हमें अपनी मौजूदगी का एहसास नहीं कराया

जनरल यासर गुलेर , साहिल को , वक्कार युसुफ से मिलवाता है
जो इस्लामिक मिलिट्री फोर्स का कॉ हेड था

जनरल यासर गुलेर - साहिल यह हमारे जाँबाज लेफ्टिनेंट वक्कार युसुफ ,

साहिल और वक्कार युसुफ एक दुसरे से हाथ मिलाते हुये
वक्कार युसुफ - अस्सलामु अलैकुम 
साहिल - वा अलैकुमुस्सलाम
वक्कार युसुफ - इस्लामिक मिलिट्री फोर्स में आपका स्वागत है सर
साहिल - बहुत बहुत शुक्रिया सर

जनरल यासर गुलेर ( वक्कार युसुफ से ) - ऑफिसर वक्कार युसुफ , आज से आप साहिल के इन्सट्रक्टर है 
वक्कार युसुफ - यस सर
जनरल यासर गुलेर ( साहिल से ) - आज से वक्कार युसुफ आपको वायु सेना से सम्बन्धित सारी जानकारी समझादेंगे आपका यह कोर्स पुरे तीने महीने का होगा उसके बाद आपका चयन करके आपको इस्लामिक मिलिट्री फोर्स में शामिल कर लिया जायेगा
जनरल यासर गुलेर ( साहिल और पोत से हाथ मिलाते हुये ) - अच्छा तो फिर मिलते है तीन महीने के बाद
वक्कार युसुफ ( जनरल यासर गुलेर को सैल्युट करते हुये )
वक्कार युसुफ की देखा देख साहिल भी जनरल यासर गुलेर को सैल्युट करता हैं
जनरल यासर गुलेर दोनो की तरफ सिर हिलाकर दोनो को सैल्युट करते है

कहानी कभी भी खत्म नही होती हर कहानी पुरी होने के बाद एक ऐसी बात अपने पीछे छोड़ जाती है जिसे लेकर एक नयी कहानी का जन्म होता है
कुछ कहानीयाँ लम्बी होती है मगर उनमें कुछ ज्यादा सीख नही होती
मगर कुछ कहानियाँ छोटी होकर भी , उनमें सीख बड़ी होती है
ऐसे ही हमारी जिंदगी में छोटी छोटी घटने वाली कहानियाँ भी कोई ना कोई बड़ी सीख , सबक दे जाती है
जिसका प्रभाव हम अपनी जिंदगी पर भी देखते हैं
अक्सर हालात ही किसी काम के होने के वजह होते है
हालात ही हमें हमारे आने वाले कल को सुनिश्चित करते है

इस कहानी के कुछ हिस्से में हम एक ऐसी जंग की बात कर रहे है जिस पर कभी कभी सारी दुनिया गौरो फिक्र करती नजर आयेगी
एक ऐसी जंग जो अभी भी अपने होने के कारण खोजे जा रही है
एक ऐसी जंग जो इस देश के लोगो को तबाह कर रही थी
एक ऐसी जंग जिसपर कायम होने वाले यह लोग , अपने ही देश में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे थे

यह वक्त २० वी सदी का था जहाँ पश्चिमी देशों में यहुदियों पर अत्याचार बढ़ रहा था , इस बीच यहुदियों में अपने लिये एक राष्ट्रवाद कि भावना जागृत हो रही थी , यहुदियों कि इसी भावना को जियोनिज्म के नाम से दुनिया में जाना जाता है
विश्व भर के यहुदी , फिलिस्तीन में आकर पनाह ले रहे थे , फिलिस्तीन १९२० तक खिलाफते उस्मानिया का हिस्सा हुआ करता था मगर प्रथम विश्व युद्ध के बाद यह क्षेत्र ब्रिटेन के अधिकृत में हो गया
इस क्षेत्र में यहुकी अपने प्रस्तावित देश इजरायल को बनाना चाहते थे , मगर फिलिस्तीनयो को यह मंजुर नही था
और यही से इस क्षेत्र में एक विवाद सा छीड़ गया , दोनो पक्ष एक दुसरे से नफरत करने लगे
साल १९५७ में युनाइटेड नेशन ने यह फैसला लिया कि , फिलिस्तीन को दो भागो में बाँट दिया जाये , और साल १९५८ में इजरायल को स्वतंत्र देश घोषित कर दिया गया , जिसके बाद अरब मुसलमान देशो और इजरायल के बीच जंग छीड़ गया
इजरायल को पश्चिमी देशो की मजबुत सहायत थी जिसके बदौलत इजरायल ना सिर्फ यह जंग जीता बल्कि इसके बाद हुये सिक्स्थ डे वॉर भी जीत गया 
इसके बाद इजरायल ने बेस्ट बैंक , गाजा स्ट्रिप , पर कब्जा कर लिया
जहाँ अब फिलिस्तीन अपनी आजादी कि लड़ाई लड़ने लगे

हालांकि दोनो पक्षो के दरमियान यह समझौता भी हुआ कि अगर दोनो पक्षों को एक दुसरे तो देश मान लेना चाहिये और एक दुसरे से रिश्ते सुधार लेना चााहिये 
मगर फिलिस्तीनी इससे राजी नही थे बल्कि वो तो अपना पुरा क्षेत्र वापिस चाहते है
इसके लिये कुछ संगठन तैय्यार हुये जैसे अल कस्साम ब्रिगेड और हमास 
जहाँ बेस्ट बैंक में आज भी इजरायल का गैर कानुनी तरीके से कब्जा है
वहीं इजरायल सैन्य फौज की बेस्ट बैंक में मौजुद मस्जिद अल अक्सा में गैर कानुनी तरीके से दखअंदाजी से 
जबाव में फिलिस्तीनी मुसलमानों और इजरायली फौज मैं तनाव बढ़ जाता है

 

कहानी जारी है ………..

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