Episode 3
“मैं वही हूँ जिसने जंगल को प्राण दिए, और वही जिसने उसका श्राप सहा। तुझे जंगल ने नहीं चुना, तुझे तेरे कर्मों ने बुलाया है।”
रुद्र कुछ पल चुप रहा, फिर बोला, “मैं इंसान था। मैंने कभी प्रकृति से वैर नहीं किया। मैंने सिर्फ़ एक आदमखोर को मारने निकला था।”
“आदमखोर?” आवाज़ में दर्द झलका। “वो जानवर नहीं था, रुद्र। वो मानव था — जो मेरी प्रजा की रक्षा करता था।
डॉ. विशाल मल्होत्रा के प्रयोगों ने उस पर जीन-परिवर्तन किए। वह मानव और बाघ का मिश्रण बना दिया गया। जब उसने सत्य जाना, तो भाग गया… और जंगल ने उसे अपने भीतर समा लिया।
तू उसी का वारिस है।”
रुद्र ने कदम पीछे खींचे। “तो मैं… किसी अभिशप्त प्रयोग का हिस्सा हूँ?”
“नहीं,” आवाज़ शांत थी, “तू उस प्रयोग का सुधार है। तू संतुलन है — इंसान और प्रकृति के बीच। पर याद रख, हर शक्ति का एक मूल्य होता है। जब तू इस शक्ति का उपयोग करेगा, तेरी मानवता का एक अंश खोएगा।”
रुद्र ने आँखें बंद कीं। हवा उसके चारों ओर घूमी, बाल उड़ने लगे, और उसके भीतर वही हरी ऊर्जा फिर से धड़कने लगी।
उसने ताबीज़ को छुआ, और महसूस किया — उसके शरीर में स्थिरता आ गई।
अब उसके भीतर का जानवर शांत था, जैसे उसने उसे स्वीकार लिया हो।
“मैंने अपनी नियति स्वीकार की,” रुद्र ने कहा, “पर अब मुझे उस व्यक्ति को रोकना होगा जिसने ये सब शुरू किया — डॉ. विशाल।”
आवाज़ गायब हो गई, पर हवा में एक वाक्य गूँजा —
“जंगल तेरा साथ देगा, वृक्षक। पर याद रख, हर शिकारी अपने ही साये से हारता है।”
रात घनी हो चुकी थी।
कुंभलगढ़ के उत्तरी हिस्से में वैज्ञानिकों के वाहनों की कतारें बढ़ रही थीं।
डॉ. विशाल के काफ़िले में दर्जनों सैनिक, ट्रैंक्विलाइज़र गन और मोशन सेंसर लगे हुए थे।
विशाल अपने मोबाइल लैब के भीतर बैठा था — सामने जंगल का थ्री-डी मॉडल, चारों ओर मॉनिटर।
“टीम अल्फा, सिग्नल नॉर्थ रेंज में एक्टिव है,” सहायक की आवाज़ आई।
विशाल बोला, “कैप्चर ज़ोन सेट करो। उस जीव को ज़िंदा चाहिए, किसी भी हालत में।”
सहायक ने हिचकते हुए पूछा, “सर, अगर वो हमला करे?”
विशाल ने मुस्कराया, “वो हमला नहीं करेगा। वो अपनी रक्षा करेगा। और जब वो ऐसा करेगा, मैं उसे समझ लूँगा।”
उसने मॉनिटर पर देखा — एक थर्मल सिग्नेचर जंगल के भीतर धीरे-धीरे हिल रहा था।
वो रुद्र था।
रुद्र ने दूर से वाहनों की रोशनी देखी।
वह झाड़ियों के बीच छिप गया।
हवा में रासायनिक गंध थी — ट्रैंक्विलाइज़र और धुएँ का मिश्रण।
वह समझ गया, जंगल पर हमला होने वाला है।
“ये जंगल तेरा घर है,” उसके भीतर की आवाज़ बोली। “इसे बचा।”
उसने आँखें बंद कीं, और हवा का रुख़ महसूस किया।
चारों ओर की हर हरकत उसकी नसों में उतर गई — पत्तों की सरसराहट, कदमों की थाप, गाड़ियों के इंजन की गूंज।
वह अब सिर्फ़ एक इंसान नहीं था; वह जंगल की इंद्रियाँ बन चुका था।
उसने पेड़ों के बीच छलाँग लगाई, टहनियों पर दौड़ा, और कुछ ही पलों में काफ़िले के ऊपर पहुँच गया।
नीचे सैनिक आगे बढ़ रहे थे।
अचानक हवा में एक छाया उभरी — और अगले ही क्षण तीन सैनिक ज़मीन पर थे।
कोई आवाज़ नहीं, बस झाड़ियों में हरकत।
“टारगेट साईटेड!” किसी ने चिल्लाया।
गोलियाँ चलीं, रोशनी फैली।
पर वो वहाँ नहीं था — हवा में था।
उसकी चाल में जानवर की फुर्ती, और इंसान की योजना दोनों थीं।
उसने एक ट्रक के इंजन पर पंजा मारा — मशीन फट गई, आग भड़क उठी।
सैनिक बिखर गए।
डॉ. विशाल ने दूर से देखा और कहा, “कमाल है… वह अपने वातावरण से ऊर्जा लेता है। यही वो जैव-स्तर है जो मानव विकास की सीमा को तोड़ देगा।”
उसने वायरलेस पकड़ा, “सभी यूनिट्स, ग्रिड फॉर्मेशन में आओ। अगर वो जंगल है, तो हमें धुएँ से साफ़ करना होगा।”
गाड़ियों से गैस के बादल उठे।
पेड़ों पर बैठे पक्षी उड़ गए, हवा भारी हो गई।
रुद्र के लिए साँस लेना मुश्किल था, पर जंगल उसकी ढाल था।
उसने मिट्टी में हाथ रखा, और जैसे कोई शक्ति उस मिट्टी से उसके भीतर चली आई।
हरे निशान उसकी बाँहों पर चमके, और अगली ही पल वह गाड़ियों की ओर झपटा।
उसने ट्रैंक्विलाइज़र गन तोड़ी, ड्रोन गिराए, और सैनिकों को पीछे धकेल दिया।
पर तभी किसी ने उसके कंधे पर गोली चलाई — नशीला द्रव्य उसकी नसों में फैल गया।
रुद्र लड़खड़ाया, और धरती पर गिर पड़ा।
“पकड़ लो उसे!” विशाल चिल्लाया।
सैनिकों ने उसे बाँध लिया, गाड़ियों की लाइटें उस पर पड़ीं।
रुद्र की आँखें अब भी हरी थीं, लेकिन उनमें एक अजीब शांति थी।
कहानी जारी है ……………..
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