फरहीन : अस्सलामुअलैकुम
फ़रहीद चाचा : वा अलैकुमुस्सलाम
मैं एक नया लड़का लाया हुँ म्युजियम की देखभाल के लिए इसका नाम अब्दुल राशिद है
फरहीन : मगर अब्बा अभी कहीं काम से बाहर गए हैं।
फ़रहीद चाचा : ठीक है हम इसे आज से ही काम पर रख लेते हैं
फरहीन : ठीक है
फरहीद चाचा : लड़का अच्छा है, यहाँ शहर में पढ़ाई करने आया है। इसे कॉलेज में पढ़ना है
फरहीन : अच्छा, सब्जेक्ट क्या है तुम्हारा ?
राशिद : साइंस बायो
फरहीन : अच्छा
, देखो कॉलेज में दाखिले की तारीख के लिये कुछ ही दिन बचे हैं, एक काम करो तुम कल ही युनिवर्सिटी कॉलेज में प्रवेश ले लो
राशिद दुसरे दिन कॉलेज में-
राशिद दाखिले के लिए प्रवेश कार्यालय में गया। राशिद कॉलेज में सबसे घबरा रहा था क्योंकी एक तो वो कमज़ोर और दुसरा इतने स्टूडेंट्स के बीच उसे पढ़ने की आदत नहीं थी और इसी बीच राशिद अपनी कॉमन लाइफ जीने लगा, फरहीद चाचा के साथ रहता, लाइब्रेरी में काम करता, और फोन पर अपने मां बाप से बात करता।
एक दिन राशिद के साथ कॉलेज में बहुत बुरा हुआ-
राशिद कॉलेज में जा रहा था तभी उसे कॉलेज के ही कुछ लड़को ने घेर लिया
राशिद : हा भाई क्या हुआ
तभी एक लड़के ने राशिद का बेग छीन लिया, राशिद इसका विरोध करने लगा, तभी दुसरे लड़के ने राशिद को बुरी तरह मारना शुरू कर दिया, बेचारा राशिद पहले ही इतना सबसे डर रहा था ऊपर से अब मार भी खा रहा था
राशिद जैसे ही म्युजियम में आया उसकी हालत देख कर फरहीन जोरो से हँसने लगी
फरहीद चाचा समझ गये थे कि राशिद के साथ कुछ बुरा हुआ है
फरहीद चाचा :- राशिद , बेटा कुछ बुरा हुआ है
राशिद :- नही चाचा बस कॉलेज से आते वक्त रास्ते में फिसल के गिर गया था
फरहीन (हँसते हुये) :- सकल से तो ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने बहोत मारा हो
फरहीद चाचा :- चलो कोई नही बेटा आओ अंदर आकर हाथ मुँह धोलो
राशिद के साथ सचमुच में शहर में सबकुछ बुरा हो रहा था , यहाँ तक कि म्युजियम में काम करने वाले दुसरे वर्कर्स के साथ भी राशिद कि नही बनती थी
किसी दुसरे दिन :-
उस वक्त चाचा फरहीद और राशिद मिलकर म्युजियम में काँच कि खिड़कियों को साफ कर रहे थे
फरहीद चाचा - बेटा अगर पानी गंदा हो जाये तो मग में साफ पानी भरकर काँच पोछना वर्ना काँच गंदा ही रह जायेगा
राशिद - अच्छा चाचा
फरहीद चाचा - अच्छा बेटा राशिद मुझे एक बात बताओगे
राशिद - क्या चाचा
फरहीद चाचा - बेटा तुम्हारे पेशानी में यह लकीरे क्यों खींची रहती है
बेटा क्या सोचते रहते हो तुम
राशिद :- कुछ नही चाचा बस मुझे थोड़ी ही अपनी और थोड़ी सी इस दुनिया कि फिक्र रहती है
फरहीद चाचा :- दुनिया कि कैसी फिक्र है बेटा ?
राशिद :- लोग , जमाना बहोत बुरे है चाचा , लगता है शायद में इस दुनिया के लिये बना ही नहीं
फरहीद चाचा , राशिद की बातो को समझ रहे थे
फरहीद चाचा , राशिद को हैरानी से देखते है , राशिद यह सब एक कुर्सी पर बैठा बैठा कह रहा था
फरहीद चाचा, राशिद के पास जाकर उसके कँधे पर हाथ रखते है
और एक लम्बी साँस लेकर कहते हैं
फरहीद चाचा :- बेटा तुम गौरो फिक्र करते हो तुम्हारी यह बात तारीफ के काबिल है
और तुम्हारा भी दुनिया में आने का एक मकसद है और मुझे यकीन है कि तुम इस मकसद में कामयाब जरूर होओगे , अल्लाह तुम्हारा मददगार हो
राशिद - इंशाअल्लाह चाचा जरूर
फरहीद चाचा - इंशाअल्लाह
फरहीद चाचा , राशिद के पीठ पर धीरे से थपथापाते हैं और कहते
फरहीद चाचा :- बेटा एक जंग का मैदान था जहाँ एक दुश्मनो की फौज थी ऐसे लम्बे कदकाठी के दुश्मन जिनके सामने हम मुसलमान बौने के समान थे दुश्मनों की फौज देखकर मुसलमानों के पैर काँप रहे थे मगर वही होता है जो अल्लाह चाहता है उसी जंग के मैदान में हजरत दाऊद अलैहिस्सलाम ने अपने से कई गुना ज्यादा लम्बे चौड़े जालुत का कत्ल किया और वही से दुश्मन फौज के हौसले पस्त हो गये और यह जंग हम मुसलमानों ने जीती थी
अल्लाह पर मुकम्मल यकीन ही तुम्हें फतेह देगी बेटा
राशिद :- जी चाचा
अब आज हिम्मत करके राशिद कॉलेज में जा रहा था उसके दिल में अभी भी उन लोगों का डर मौजूद था
राशिद कॉलेज में दाखिल होने से पहले एक दीवार में छुपके से उन लोगो को देख रहा था कि जब वो वहाँ से जायेंगे तब वो कॉलेज में जाएगा। तभी अचानक से डॉ. विलियमसन पीछे से उसके कंधे पर हाथ रखते हैं और राशिद डर जाता है
डॉ विली : क्या हुआ यहाँ क्यू खड़े हो ? अंदर चलो
राशिद( हड़बड़ाहट से ) : हाँ सर
डॉ विली : नये छात्र हो
राशिद : हाँ
राशिद कॉलेज से पढ़ाई करके वापस म्युजियम में आ गया था म्युजियम में भी राशिद को फरहीन के तानो और मज़ाक झेलने पड़ते थे, फरहीन भी राशिद का मज़ाक बनाती थी और कोई अहमियत भी नहीं देती थी।
सुबह जैसे ही राशिद कॉलेज गया फिर से उन स्टूडेंट ने राशिद को पकड़ लिया और उसे परेशान करने लगे, मार ने लगे, तभी वही पर डॉ. विली. आये और उन्होंने उन स्टूडेंट'स को और राशिद को अपने ऑफिस में लेकर गये
और डॉ. विली उन छात्रों को सिर्फ एक आखिरी मौका देकर छोड़ देते हैं। और राशिद की तरफ देख कर कहतें हैं
डॉ विली : क्या बात है तुम इतने कमज़ोर क्यों हो राशिद
राशिद उदास हो गया था
डॉ विली: देखो तुम्हें चेकअप की ज़रूरत है, तुम्हें किसी डॉक्टर के पास जाना चाहिए
राशिद :- मैंने चेकअप के बारे में कभी नहीं सोचा सर
डॉ विली :- मैं तुम्हारा चेकअप करूँगा
डॉ विलियमसन राशिद कि फिजिकल कंडीशन देखकर, उन्हें वो एक्सपेरिमेंट याद आ गया जिसे वो आज से कुछ साल पहले करना चाहते थे। दअरसल डॉ. विलियमसन आज से 15 साल पहले तक बहुत ही बड़े वैज्ञानिक हुआ करते थे। इन्होने एक सुपर सोल्जर टाइप का सीरम बनाया था , जो लोगो की फिजिकली पावर बढ़ाता है उनका मकसद इस सीरम के जरिये सुपर सोल्जर तैय्यार करना था जिनको वो किसी भी मिलिट्री फोर्स को देकर अच्छा मुनाफा कमाना चाहते थे और इस सीरम को इराक सरकार ने जब दूसरे वैज्ञानिक से लैब में जाँच कराई तो इस बैठक में मौजुद तमाम देशों के वैज्ञानिकों ने इस सीरम को लोगो के लिए खतरा बताया। तब इराक सरकार ने इस सीरम पर पाबंदी लगा दी , उसके बाद लोग डॉ. विलियमसन की काबिलियत को ठुकराने लगे, और यहीं से डॉ. विलियमसन नेगेटिव जोन पर चले गये और हमेशा अपने मुल्क के खिलाफ काम करने लगे, उन्होने ऐसे संगठनों से हाथ मिला लिया जो किसी भी देश में गृहयुद्ध कराने के जिम्मेदार थे , जो हमेशा अपने पड़ोसी मुल्क को दुश्मन मानती थी। मगर अब डॉ. विलियमसन को इस सीरम के प्रयोग के लिए सही इंसान मिल गया था। तो डॉ। विली. ने राशिद को बुलाया और उसका चेकअप कराया और उससे झूठ कहा के उसके शरीर में कुछ विटामिन्स की कमी के कारण एक सीरम लगाना चाहते हैं
डॉ विली: देखो राशिद तुम्हारे शरीर में कुछ विटामिन की कमी है।जिसके चलते, तुम्हारे जिस्म में कुछ तरह के हार्मोंस काम नहीं कर रहे, जिससे तुम्हारे शरीर में इजाफ़ा नहीं हो रहा है।
तुम बायो के स्टूडेंट हो तो तुम इस बात को अच्छे से समझ सकते हो
राशिद: अच्छा, मगर मैं ठीक कैसे होऊँगा
डॉ विली : मैं तुम्हारे शरीर में इंजेक्शन के जरीये एक सीरम लगा दूंगा जिससे ये सीरम तुम्हारे नसो में जाकर तुम्हारे रक्त को शुद्ध करेगा , और तुम्हारी माँस-पेशियों को मजबूती देगा तुम शारीरिक रूप से मजबूत हो जाओगे और एक बेहतरीन माचो लुक के मालिक बन जाओगे
डॉ विली उसे कुछ पिकचर्स इमेजेस दिखाते हैं जिसमें बहोत से बॉक्सर की फोटो होती है
राशिद को ये सब ठीक लगा क्योंकी उसके कमज़ोर होने के कारण उसकी हर जगह मज़ाक बनती थी, और वो कुछ नहीं कर पता था।
राशिद ( कुछ सोचने के बाद ) : लेकिन मैं इसके लिए आपको कोई पैसे नहीं दे पाऊंगा सर
डॉ विलियमसन मन में (पैसो की कोई जरूरत नहीं मेरा इनाम तो तुम हो, बस ये सीरम काम कर जाये )
डॉ विली: ठीक है, वैसे भी ये प्रयोग है कोई बड़ा ऑपरेशन नहीं। मगर ये बात अभी हम दोनों के दरमियान ही रहना चाहिये।
और फिर दोनो एक दूसरे से हाथ मिलाते है
राशिद के जाने के बाद
डॉ विलियमसन अपनी लैब में चले गये जहां उन्होने इस सीरम पर नये तरीके से काम करना चालु कर दिया
कमसकम दस पंद्रह दिनो के बाद आज प्रयोग का दिन था
डॉ विलियमसन का लैब शहर से बहोत दूर था
डॉ विलियमसन , राशिद को अपने कार में अपने साथ ले आते है लेब में पहले से ही साइंटिस्टो की एक टीम मौजूद थी
राशिद :- यह लैब तो बहुत बड़ा है सर
डॉ विली :- तुम्हें क्या लगा मैं तुम्हें एक इंजेक्शन लगा कर छोड़ दुँगा
कुछ डॉक्टर्स , राशिद को एंटी बायोटिक इंजेक्शन लगाकर उसे एक्सपेरिमेंट के लिये तैयार कर रहे थे
यह एक्सपेरिमेंट एक बंद अत्याधुनिक लोहे के ताबुत नुमा बक्से के अंदर होना था जिसके बाहर की तरफ काँच की नलियाँ एक तरह के खास सीरम के टैंको से जुड़ी हुयी थी
डॉ। विलियमसन ( राशिद को उस बक्से के अंदर लिटा देते हैं )
कहानी जारी है ……………….
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