डॉ विलियमसन : चलो राशिद , यह तुम्हारा दिन है थोड़ी तकलीफ होगी शरीर गर्म हो सकता है
राशिद :- मैं हर दर्द सहने के लिये तैय्यार हुँ सर
राशिद को ख़ुशी थी क्योंकि इसके बाद उसकी ज़िन्दगी बदलने वाली थी
राशिद पर एक्सपेरिमेंट शुरू कर दिया गया था ताबुत के बाहर की नलियाँ जो अंदर पाइपो से जुड़ी हुयी थी और इनके सिरे इंजेक्शन की तरह राशिद के पुरे शरीर पर एक साथ चुभा दिये जाते है
राशिद जोरो से चिल्लाता है
इसके बाद सीरम की बूंदे धीरे धीरे राशिद के नसो में उसके खुन के साथ घुलने लग जाते हैं
राशिद अब अपने शरीर में परेशानी महसूस करने लगा था
डॉ. विलियमसन राशिद की हालत देखकर कुछ समझ नहीं पा रहे थे
दुसरे वैज्ञानिक दर्द से और जलन से तड़पते हुये राशिद को उस ताबुत के अंदर बंद कर देते है
कुछ देर बाद ताबुत का हिलना बंद हो गया
ताबुत के अंदर बंद राशिद अब अपनी आँखे बंद कर लेता है और बेहोश हो जाता है
डॉ विली , उन वैज्ञानिकों से
डॉ विली :- डॉ फिलिप्स ताबुत को खोलो देखो कहीं वो मर तो नही गया
वैज्ञानिकों के उस ताबुत के पास जाते ही ताबुत हल्का हल्का हिलने लगा कोई कुछ समझता कि उसके पहले ही
राशिद ताबुत को तोड़ता हुआ उससे बाहर निकलता है
और दर्द के मारे चिल्लाता हुआ इधर से उधर भागता रहता है गिर रहा होता है ,
और लैब में तोड़ फोड़ शुरू हो जाती है
कोई उसे रोकता कि उससे पहले ही अचानक से राशिद लैब से निकलकर हाई वे की तरफ निकल जाता है
डॉ विली, राशिद की तरफ भागते है मगर राशिद उस वक्त तक गिरते पड़ते बहुत दूर जा चूका था, और अब रात के अँधेरे में डॉ. विलियमसन को राशिद नहीं मिलता है
डॉ. विलियमसन ( मन में ) :- जैसा मैंने सोचा था वैसा कुछ भी नही हुआ , आखिर राशिद गया कहाँ पर , अगर उसने किसी पुलिस वाले को बताया तो मुश्किल हो जाएगा, समझ में नहीं आता क्या करूं।
बहुत रात हो गई थी
इधर फरहीद चाचा म्युजियम में ही थे , राशिद सुबह से गायब था और फरहीद चाचा उसका अभी भी इंतजार कर रहे थे।
राशिद लैब से बहुत दूर सुनसान हाई वे में बेहोश पड़ा हुआ था, थोड़ी देर बाद उस हाई वे से एक कार गुजर रही थी,
कार के ड्राइवर ने कहा : सर , सड़क पर कोई लड़का बेहोश हालत में पड़ा हुआ है,
प्रोफ़ेसर जाफ़र: कार, रोको
प्रोफेसर जाफर कार से उतरते हैं और अपने ड्राइवर से कहते हैं
प्रो. जाफ़र :- दिखने में मुझे तो शरीफ़ घर का लगता है , चलो इसे कार में उठाते हैं, पता नहीं यहाँ रात को क्या कर रहा था।
प्रो. जाफ़र, राशिद को ऊठाकर अपने साथ अपने घर ले आते हैं और जैसे ही वो अपने घर में लेकर आते है तभी फरहीन उसे पहचान लेती है
फरहीन : ये तो राशिद है, मगर इसकी ऐसी हालत किसने की , देखो कितना फूल गया है, कल तक तो कितना कमज़ोर था।
प्रो. जाफ़र : बेटी, तुम इसे जानती हो ?
फरहीन : हाँ ये तो हमारी ही म्युजियम में काम करता है, फरहीद चाचा इसे लेकर आये थे
प्रोफ़ेसर जाफर राशिद को अपने बिस्तर पर लिटा देते हैं , और फरहीन से कहते हैं
प्रो. जाफ़र : ये हमें शहर से दूर हाई वे में बीच सड़क में मिला है
फरहीन: पता नहीं जब से आया है इसके साथ कुछ न कुछ बुरा होता रहता है।
प्रो. जाफर : क्या फरहीद चाचा इसे जानते हैं ?
फरहीन : हा वही तो इसे लेकर आये हैं , मगर कल तक तो ये कमज़ोर और मरियल सा था, पता नहीं कैसे ये पहलवान बन गया।
प्रो. जाफर : फिर भी लड़का शकलो सूरत से काफी शरीफ दिखता है।
राशिद घर पर नहीं आया था फरहिद चाचा, राशिद के बारे में सोचते-सोचते सो गए थे, सुबह हुई तो उन्होंने सोच ही लिया कि पुलिस की मदद लेंगे। और वो पुलिस स्टेशन की तरफ निकल पड़ने का इरादा करने लगे।
और इधर राशिद अपनी हालत से बहार निकल कर होश में आने लगा,
प्रो. जाफ़र, राशिद के पास जाकर उसे संभालने लगे, राशिद अब थोड़ा थोड़ा होश में आने लगा था
प्रो. जाफर: तुम ठीक हो राशिद
राशिद:- आप कौन हैं, और मैं कहाँ हूँ (होश में आते हुये आहिस्ते से) ?
प्रो. जाफ़र : घबराओ नहीं तुम मेरे घर पर हो
राशिद : आप कौन हैं ?
प्रो. जफर : तुम मुझे रास्ते में मिले थे, मैं तुम्हें अपने साथ ले आया, घर आया तो मेरी बेटी फरहीन ने कहा कि तुम हमारे म्युजियम में ही काम करते हो
राशिद होश में आ गया था और अपने आप को बहोत ताकतवर देख रहा था , उसकी बॉडी किसी बॉक्सर जैसी हो गई थी। वो अपने पुरे जिस्म को देखने लगा
राशिद: हाँ , क्या आप उस म्युजियम के मालिक हैं
प्रो. जाफर : हाँ
फरहीन उस कमरे में आती है
फरहीन : क्या ये होश में आ गया ?
प्रो. जाफर : हाँ
फ़रहीन : कैसे हो राशिद ?
राशिद : मैं ठीक हूं, मगर फरहीद चाचा कहाँ हैं ?
शायद वो मेरा इंतजार कर रहे होंगे
फरहीन: ठीक है, अभी उन्हें कॉल करती हुँ , लेकिन ये बताओ राशिद, तुम्हारी हालत इतनी बदल कैसे गयी , तुम तो पहले कितने दुबले पतले थे
राशिद ( मन में डॉ की बात याद करता है ) : मुझे नहीं पता (हड़बड़ाहते हुये)
फरहीन (मन में ): ये कुछ छुपा रहा है, नहीं तो यह कैसे हो सकता है ?
राशिद :- मुझे जाना होगा
प्रो. जफ़र : कहाँ?
राशिद : फरहीद चाचा के पास
राशिद, फरहीद चाचा के पास चला गया उनके घर पर
राशिद : फरहीद चाचा
फरहीद चाचा : राशिद, तुम कहाँ थे मैं तुम्हारा कितना इंतज़ार कर रहा था
राशिद: अब मैं आ गया चाचा
फरहीद चाचा : बेटा तुम ऐसे मत जाया करो
राशिद : मुझे माफ़ करदो चाचा
फरहीद चाचा , राशिद को गौर से देखते हैं
फरहीद चाचा : लेकिन तुम इतने ताकतवर कैसे हो गये ? वो भी एक रात में
राशिद : मैं नहीं बता सकता, मैंने किसी से वादा किया है चाचा
फरहीद चाचा : चलो, अब तुम्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं हैं ।
फरहीद चाचा : तुम्हें कहीं से भी ताकत मिली हो, मगर ये बात हमेशा याद रखना “अपनी ताकत हमेशा नेक कामो के लिए आज़माना”
राशिद को अब सब अच्छा लगने लगा था, राशिद अपने चारो और सब ठीक महसूस कर रहा था
करीब एक हफ्ते के बाद राशिद कॉलेज में जाता है उसे वो लड़के मिले जो उसकी रैगिंग किया करते थे उन्होंने भी देखा की राशिद अब बदल चुका है। उसकी शारिरीक हालत बदल चुकी है।
तभी उनमें से एक लड़का :- देखो वो ही , बहोत दिनो बाद आ रहा है
दुसरा लड़का :- अबे लेकिन यह कैसे पहलवान बन गया
तीसरा लड़का :- इसकी पहलवानी तो में निकालता हुँ रूको जरा देखके आता हुँ इसको
कहानी जारी है ………………..
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