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author Nijamul Feb 23, 2026 5 min

Zaeim - A Superhero Among Us Episode 5

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सारी लड़ाई हो जाने के बाद न्यूज़ रिपोर्टर भी हाल ही मे वहाँ पहुँच गये थे , कि इससे पहले ही लोगो ने विडियो बना बना कर सोशल मीडिया में डालना शुरू कर दिया था

और न्यूज रिपोर्टर का वहाँ पहुँच जाना मतलब आप जानते हैं कि घटना का हर न्युज चैनल और हर सोशल मीडिया में वायरल हो जाता है  यह खबर आग की तरह पुरे शहर , गांव और यहाँ तक की देश दुनिया में फैल गयी थी

हजारों लोग टीवी मोबाईल पर राशिद का यह कारनामा देख रहे थे

हाथो हाथ पुलिस की दो टुकड़ियाँ आ गयी थी एक जो एक एक करके अन्य चोरो को हिरासत में ले लेती है
मरे हुये चोरो के लिये फॉरेंसिक टीमों का एक जत्था आ गया था

 

दुसरी पुलिस जो राशिद पर हथियार ताने उसे भी सरेंडर करने का हुक्म देती है

राशिद उस वक्त असमंजस में आ गया था कि उसने यह काम सही किया की गलत

पुलिस इन्चार्ज कासिम :- तुम जो कोई भी हो इन्सान या जिन्न हमें खतरा तुमसे भी है 
राशिद :- मैं एक इन्सान ही हुँ , और मैंने चोरो को पकड़ने में आपकी मदद की है तो आप लोगो मुझसे ऐसा सलुक क्यो कर रहे हैं 
पुलिस इन्चार्ज कासिम :- हमारे पास तुमसे बहस का वक्त नही है इसलिये अपने आपको हमारे हवाले कर दो 
वरना मजबूरन हमें तुम्हें गिरफ्तार करना होगा

राशिद खुद को गिरफ्तार करवा देता है

 

यह खबर पुरे शहर के साथ साथ म्युजियम में फरहीद चाचा , फरहीन यहाँ तक की प्रोफेसर जाफर तक पहुँच गयी थी

जगह - शहर का पुलिस स्टेशन

राशिद पुलिस की कस्टडी में था

फरहीद चाचा , फरहीन और प्रोफेसर जाफर वहाँ पहुँच जाते है

फरहीद चाचा पुलिस स्टेशन में राशिद को गिरफ्तार देखकर भावुक हो जाते है प्रोफेसर जाफर  , फरहीद चाचा को संभालते है

प्रोफ़ेसर जाफर ( फरहीद चाचा से ) :- आप गम ना करे फरहीद भाई , मैं आपके इस रिश्तेदार को किसी भी हालत में छुड़ा कर ले आऊँगा अभी अभी मैंने शहर के सबसे बड़े वकील को हायर किया है वो आता ही होगा

 

पुलिस कस्टडी में

पुलिस इन्चार्ज कासिम  - तुमने जो काम किया है वो एक आम इंसान नही कर सकता 
अब सच सच बताओ कि तुम कौन हो
राशिद:- मैं भी आप की तरह ही एक आम इंसान हुँ मेरा यकीन करें 
पुलिस इन्चार्ज कासिम :-  तुमने कानुन को तोड़ा है और तीन खुन और एक हाफ मर्डर के चार्जस तुम पर लग चुके है 
राशिद :- सर मेरा मकसद किसी को मारना नही था मैने तो बस अफनी हिफाजत के लिये उन पर हमला किया था उनकी मौत के जिम्मेदार वो खुद थे
पुलिस इन्चार्ज कासिम :- देखो राशिद तुम अभी एक नादान बच्चे हो उन चोरो से हम निपटते मगर तुमने बीच में आकर सब खराब कर दिया 
हमें उन चोरो को मारना नही था उन्हें जिंदा पकड़ कर उनके गिरोह के सरगना तक पहुँचना था 
राशिद  :- मैने जो भी किया अपनी और आवाम की हिफाजत के लिये किया आप इसे किसी भी तरह देखे मुझे इससे कोई फर्क नही

 

इन्चार्ज कासिम को एक दुसरा अफ्सर आकर उसके कान में कुछ कहता है 
:- सर ऊपर से हमें हुक्म हुआ है कि अप इस शख्स को छोड़ दें 
इन्चार्ज कासिम  :- क्या बक रहे हो 
वो जुनियर अफ्सर :- जी मुझे हेड क्वार्टर से यह हुक्म मिला है जनाब
इन्चार्ज कासिम  :- मगर यह कैसे हो सकता है ?

 

थोड़ी देर बाद

इन्चार्ज कासिम ( राशिद से ) :- फिल्हाल के लिये तुम जा सकते हो मगर हर हफ्ते में आकर अपनी अटेंडेन्स लगाते रहना 
अब जाओ यहाँ से 
राशिद  - शुक्रिया सर

 

राशिद  , कस्टडी रूम से बाहर आते हुये देखता है कि फरहीद चाचा रो रहे थे जिन्हे प्रोफेसर जाफर संभाले हुये थे

राशिद :- फरहीद चाचा 
फरहीद चाचा :- राशिद  
कहते हुये उसे राशिद को अपने गले से लगा लेते हैं 

प्रोफ़ेसर जाफर  :- राशिद  , पुलिस इन्चार्ज ने तुमसे क्या कहा है , 
क्या उन्होंने तुम्हें छोड़ दिया है ?

राशिद :- हाँ

प्रोफ़ेसर जाफर  , भी आगे बढ़कर राशिद को गले लगा लेते है 
जिसे देखकर  , फरहीन के आँखों में भी खुशी के आंसु आ जाते हैं

 

वहाँ पर प्रोफेसर जाफर का हायर किया हुआ वकील भी पहुँचता है मगर अब उसकी कोई जरूरत नही होती है

अब जैसे ही राशिद  , फरहीद चाचा  , प्रोफेसर जाफर,   फरहीन ,
स्टेशन के बाहर निकलते है

 

सारा शहर राशिद को देखने के लिये इकट्ठा हो जाता है पुलिस वाले भीड़ पर नियंत्रण खो देते है 
प्रेस वाले एक के बाद एक राशिद से सवालो का सिलसिला शुरू कर देते हैं 
और जैसे ही भीड़ को राशिद का नाम पता चलता है  , भीड़ राशिद के जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर देते हैं

भीड़ में एक आदमी :- तुमने बहोत सही काम किया है जवान
बहोत ही बहादुरी का काम किया है 
राशिद :- यह तो मेरा फर्ज था

भीड़  :- तुम हमारे जईम(लीडर) हो राशिद , जईम(लीडर)..........

 

इस पुरे शहर को राशिद का साथ देते देख फरहीद चाचा को राशिद पर गर्व हो रहा था उनका सीना गर्व से तन गया था 
फरहीद चाचा राशिद के माथे को चुमते हुये कहते है 
फरहीद चाचा : अपनी ताकत का हमेशा सही इस्तेमाल करना बेटा
राशिद : बिल्कुल चाचा, यह ताकत मैं हमेशा सच्चाई और इंसाफ के लिये इस्तेमाल करूँगा

 

कहानी खत्म होती है 

लेखक :- निजामुल अली मौला ( राहिल )

 


पोस्ट क्रेडिट सीन ऑफ स्टोरी  :-

जगह :- इराक के एक सरकारी हेडक्वार्टर में

पुलिस इन्चार्ज कासिम :- सर जब हमने उसे गिरफ्तार कर लिया था तो फिर आपने हमें यह हुक्म क्यों दिया कि हम उसे छोड़ दे
जनरल वक्कार युनुस :- वो उसकी शराफत थी कि उसने खुद को तुम्हारे हवाले कर दिया था 
पुलिस इन्चार्ज कासिम :- मगर सर वो बहोत ही ताकतवर है हमें उसे ऐसे ही नही छोड़ना चाहिये
जनरल वक्कार युनुस :- उसे फिलहाल के लिये ऐसे ही रहने दो और अपने दो जासूस को हर वक्त उसके पीछे लगा दो 
मुझे उसके जड़ तक पहुँचना है

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