कुरआन करीम न केवल इंसान की हिदायत के लिए है बल्कि इसमें कई ऐसे वैज्ञानिक तथ्य (Scientific Facts in Quran) भी बताए गए हैं जो आधुनिक विज्ञान (Modern Science) से पूरी तरह मेल खाते हैं। खासकर जब बात सूरज (Sun), चाँद (Moon) और पृथ्वी (Earth) की हरकतों की आती है, तो कुरआन का संदेश हमें हैरान कर देता है। आइए समझते हैं कि कुरआन और विज्ञान (Quran and Science) इन तीनों के बारे में क्या बताते हैं।
भाइयों मैंने अक्सर गैर मुस्लिम या काफिरों (नास्तिको) को यह कहते सुना है कि कुरान में लिखा है कि पृथ्वी बीच में स्थित है और सूर्य पृथ्वी के चारों ओर चक्कर काट रहा है और जब मैं उनसे कहा कि वह आयत दिखाओ जिसमें यह लिखा हुआ है तो उन्होंने कुरान की सूरह अल-अनब्या (21) और आयत (33) दिखाई।
जो इस प्रकार है.....
और वही है जिसने रात और दिन, और सूर्य और चंद्रमा को बनाया; प्रत्येक एक कक्षा में तैर रहा है।".
लेकिन दोस्तों मैंने उन्हें बताया कि इस आयत में तीनों को एक सर्कल में तैरते हुए बताया गया है और जब तीनों को एक सर्कल में तैरते हुए बताया गया है तो पृथ्वी बीच में रुकी कैसे हो सकती है तब वह अगली बगली झांकने लगा। तब मैंने उसे समझाया ना चांद रुका है ना कुछ भी रुकी है ना सूरज रुका है यहां तक की हमारी आकाशगंगा भी एक जगह स्थित नहीं है यह सब अपने केंद्र में स्थित ऑब्जेक्ट का चक्कर काट रहे हैं। जैसे चांद पृथ्वी का पृथ्वी सूर्य का और सूर्य अपने केंद्र में स्थित ब्लैक होल का चक्कर काट रहा है उसी प्रकार या ब्लैक होल भी हमारे यूनिवर्स का चक्कर काट रहा है।
कुरान की एक ओर सूरह अर रहमान की आयत नंबर 5 में लिखा है
कि सूरज और चांद एक मुकर्रर हिसाब से चल रहे हैं।
अब कोई समझदार व्यक्ति होगा वह इस आयत को पढ़कर यह समझ जाएगा कि सूरज चांद और पृथ्वी जिस समय में अपना चक्कर पूरा करते हैं उसे समय की बात हो रही है मतलब की चांद पृथ्वी का चक्कर तेज दिन में पूरा कर लेता है और पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर 365 दिन में पूरा कर लेती है इस तरह यह सूरज अपने केंद्र में स्थित ब्लैक होल का एक चक्कर लगभग 225 से 250 मिलियन (22.5 से 25 करोड़) साल में पूरा कर लेता है।इस समयावधि को "गांगेय वर्ष" या "ब्रह्मांडीय वर्ष" कहते हैं और अब कोई पागल या कुंठित व्यक्ति होगा वह बात को आगे बढ़ाने के लिए और लड़ाई झगड़ा करने के लिए ये कहेगा कि चला तो पृथ्वी पर जाता है और ब्रह्मांड में कैसे चला जा सकता है। अगर आपको कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाता है तो जितनी जल्दी हो सके उससे दूरी बना ले।
अब आइये इसको और बारीकी से समझते हैं……..
कुरआन की रोशनी में सूरज और चाँद
सूरह यासीन (36:38-40) में अल्लाह तआला फरमाते हैं:
“और सूरज अपने ठहराव की तरफ़ दौड़ रहा है, यह अल्लाह का तय किया हुआ सिस्टम है। और चाँद के लिए भी मंज़िलें (स्टेज़) तय कर दी गई हैं, यहाँ तक कि वह पुरानी सूखी डाल की तरह हो जाता है। सूरज के लिए यह मुमकिन नहीं कि वह चाँद को पकड़ ले और न रात दिन से आगे निकल सकती है। सब अपनी-अपनी कक्षा में तैर रहे हैं।”
इसी तरह सूरह अंबिया (21:33) में भी यही बात दोहराई गई है:
“और वही है जिसने रात और दिन, सूरज और चाँद पैदा किए, सब अपनी-अपनी कक्षा में तैर रहे हैं।”
इन आयतों में साफ बताया गया है कि सूरज, चाँद और पृथ्वी तीनों स्थिर नहीं हैं बल्कि अपनी-अपनी परिक्रमा (Orbit) में लगातार घूम रहे हैं।
विज्ञान की नज़र से
आज का आधुनिक विज्ञान भी यही बताता है:
सूरज (Sun): सूरज हमारी गैलेक्सी "मिल्की वे" में लगभग 8 लाख 28 हज़ार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूम रहा है। यानी सूरज भी अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ रहा है।
चाँद (Moon): चाँद पृथ्वी की परिक्रमा करता है और 27.3 दिन में अपना एक पूरा चक्कर लगाता है। इसी वजह से हमें अमावस्या, पूर्णिमा और बाकी चाँद की मंज़िलें दिखाई देती हैं।
पृथ्वी (Earth): पृथ्वी दो तरीकों से हरकत करती है। पहला, यह अपनी धुरी पर घूमती है जिससे दिन और रात बनते हैं। दूसरा, यह सूरज के चारों ओर एक साल (365 दिन) में पूरा चक्कर लगाती है।
यानी आज का विज्ञान वही कह रहा है जो कुरआन ने 1400 साल पहले बयान कर दिया था – “कुल्लुन फी फलकिन यस्बहून” यानी सब अपनी-अपनी कक्षा में तैर रहे हैं।
कुरआन और विज्ञान का मेल
कुरआन का अंदाज़ बहुत खूबसूरत है। इसमें तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि ऐसी आसान भाषा अपनाई गई है जिसे आम इंसान भी समझ सके और चाहें तो साइंस का आलिम भी उस पर रिसर्च कर सके।
जब कुरआन कहता है कि सूरज अपनी मंज़िल की तरफ़ दौड़ रहा है, तो आज विज्ञान बताता है कि सूरज भी अंतरिक्ष में लगातार आगे बढ़ रहा है।
जब कुरआन चाँद की मंज़िलों की बात करता है, तो यह वैज्ञानिक सच्चाई है कि चाँद के अलग-अलग फेज़ होते हैं।
और जब कुरआन कहता है कि सब अपनी-अपनी कक्षा में तैर रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर ग्रहों और उपग्रहों की परिक्रमा की तरफ इशारा करता है।
कुरआन करीम में 1400 साल पहले बताया गया कि सूरज, चाँद और पृथ्वी सभी अपनी-अपनी परिक्रमा में हरकत कर रहे हैं। उस समय इंसान के पास न टेलीस्कोप था और न ही आधुनिक विज्ञान। आज जब साइंस ने ब्रह्मांड के रहस्यों को खोलना शुरू किया तो यह बात साबित हो गई कि कुरआन का यह बयान पूरी तरह सच है। यानि कुरआन सिर्फ एक धार्मिक किताब नहीं, बल्कि हकीकत की वह रोशनी है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में राह दिखाती है।
दुनिया में बहुत से ऐसे कुंठित लोग हैं जो यह मानने को तैयार ही नहीं है कि कुरआन ईश्वरीय किताब है जबकि कुरान सबूत के साथ उतर गया एक जिंदा और बाकी रहने वाला चमत्कार है कुरान में लिखी गई बातें जिसकी पुष्टि आज दुनिया भर के वैज्ञानिक कर रहे हैं और उसको वैज्ञानिक कसौटी पर सही पा रहे हैं। दुनिया भर में आज मुसलमान की संख्या दूसरे नंबर पर आती है जो कि लोगों के द्वारा निरंतर इस्लाम कबूल करने की वजह से बढ़ रही है इसका सिर्फ एकमात्र कारण है कि कुरान कि जब भी वैज्ञानिक कसौटी पर जांच की जाती है तो वह खरा उतरता है और जो इसके ऊपर झूठा करते हैं उनका मुंह काला हो जाता है। यहां तक की कुरान ने भी यह चैलेंज कर रखा है कि अगर तुम सच्चे हो तो इसकी जैसी एक सूरह भी आओ और तुमको जिस पर भी भरोसा है उन सबको इकट्ठा कर लो तब भी तुम इसकी जैसी एक सूरह नहीं बना सकते।
यह चैलेंज आज भी 1400 सालों से बरकरार है।
Thanks
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