मध्य पूर्व का गाज़ा इलाका कई दशकों से इज़रायल और फिलिस्तीन (हमास) के बीच संघर्ष का केंद्र रहा है। बार-बार की हिंसा, बमबारी और नागरिकों की मौतों ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। अब 2025 में आखिरकार एक नया युद्धविराम (Gaza ceasefire) लागू हुआ है — जिसकी मध्यस्थता किसी और ने नहीं बल्कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने की है। इसे “ट्रम्प पीस प्लान (Trump’s Peace Plan)” या “20 पॉइंट शांति प्रस्ताव” कहा जा रहा है। यह योजना इस लंबे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक बड़ी पहल मानी जा रही है।
युद्धविराम कब और कैसे लागू हुआ?
9 अक्टूबर 2025 को इज़रायल और हमास ने एक प्रारंभिक युद्धविराम समझौते (Initial Ceasefire Agreement) पर हस्ताक्षर किए। ट्रम्प के प्रस्तावित शांति प्लान के पहले चरण के रूप में यह समझौता 24 घंटे के भीतर लागू किया। इसमें यह तय हुआ कि दोनों पक्ष अपनी सभी सैन्य गतिविधियाँ रोक देंगे और राहत सामग्री को गाज़ा में प्रवेश की अनुमति देंगे। समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि अब तक चले युद्ध में जो बंधक (Hostages) बनाए गए थे, उन्हें अगले 72 घंटों में रिहा किया जाना है। इसके बदले में इज़रायल लगभग 2,000 फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ने पर सहमत हुआ है।
ट्रम्प का 20 पॉइंट पीस प्लान क्या है?
ट्रम्प ने सितंबर 2025 में एक 20 बिंदुओं वाला शांति प्रस्ताव जारी किया था। इसका उद्देश्य था — युद्ध रोकना, मानवीय सहायता पहुँचाना, गाज़ा का पुनर्निर्माण करना और स्थायी शांति की दिशा में रास्ता बनाना।
मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. तत्काल युद्धविराम: सभी सैन्य कार्रवाइयाँ रोक दी जाएंगी और दोनों पक्ष 24 घंटे के भीतर हथियारबंद संघर्ष से पीछे हटेंगे।
2. बंधकों की रिहाई: हमास द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों को रिहा किया जाएगा, जबकि इज़रायल हजारों फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ेगा।
3. मानवीय सहायता: गाज़ा में फंसे नागरिकों को पानी, भोजन, बिजली और चिकित्सा सुविधाएं पहुँचाने की अनुमति दी जाएगी।
4. गाज़ा का पुनर्निर्माण: अमेरिका, यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों की मदद से गाज़ा की सड़कें, अस्पताल और मकान दोबारा बनाए जाएंगे।
5. हमास की स्थिति: जो हमास सदस्य हिंसा छोड़ देंगे, उन्हें माफ़ी दी जाएगी या उन्हें सुरक्षित बाहर जाने की अनुमति दी जाएगी।
6. अंतरराष्ट्रीय निगरानी बल: गाज़ा में एक “International Stabilization Force (ISF)” तैनात की जाएगी जो सुरक्षा व्यवस्था और नए पुलिस बल को प्रशिक्षित करेगी।
7. राजनीतिक ढांचा: गाज़ा का प्रशासन एक अंतरिम तकनीकी समिति चलाएगी जिसमें फिलिस्तीनी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि होंगे — हमास को सीधे सत्ता में शामिल नहीं किया जाएगा।
8. इज़रायल की आंशिक वापसी: इज़रायली सेना कुछ क्षेत्रों से पीछे हटेगी लेकिन सीमाओं की सुरक्षा कुछ समय तक उनके नियंत्रण में रहेगी।
9. दीर्घकालीन लक्ष्य: जब गाज़ा स्थिर हो जाए और फिलिस्तीनी प्रशासन मजबूत बने, तब फिलिस्तीनी राज्य (Palestinian Statehood) पर आगे बातचीत की संभावना रहेगी।
समझौते की शर्तें और चुनौतियाँ
हालाँकि यह समझौता एक बड़ा कदम है, लेकिन इसके साथ कई राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं। इजरायल चाहता है कि हमास पूरी तरह निरस्त्र (disarm) हो जाए और उसकी सैन्य ताकत खत्म की जाए। हमास इस शर्त पर अब तक पूरी तरह सहमत नहीं हुआ है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बल गाज़ा की सुरक्षा संभाल सकते हैं, लेकिन राजनीतिक स्थायित्व तभी संभव है जब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा करें। यह युद्धविराम फिलहाल अस्थायी माना जा रहा है, और स्थायी शांति की राह अभी लंबी है।
इस युद्धविराम का प्रभाव
गाज़ा में लाखों नागरिक लंबे समय से भूख, बीमारी और विस्थापन झेल रहे हैं।
यह युद्धविराम उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आया है। राहत सामग्री और दवाइयों की आवाजाही शुरू हो चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय — संयुक्त राष्ट्र (UN), अमेरिका, और अरब देशों — ने इस पहल का स्वागत किया है।
अगर यह योजना सफल होती है, तो यह मध्य पूर्व की राजनीति का नया अध्याय लिख सकती है और आने वाले समय में फिलिस्तीन-इज़रायल विवाद का शांतिपूर्ण समाधान संभव हो सकता है।
ट्रम्प का गाज़ा पीस प्लान और वर्तमान युद्धविराम समझौता एक ऐतिहासिक कदम है जो वर्षों से चल रहे संघर्ष के बीच शांति की उम्मीद जगाता है।
हालाँकि अभी यह “पहला चरण” है और कई विवाद बाकी हैं, लेकिन अगर दोनों पक्ष अपनी शर्तों का पालन करें तो यह क्षेत्र में स्थायी शांति की नींव बन सकता है।
Thanks
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