एक लकड़हारे की अनोखी जीत - Motivational Story
एक छोटे से गाँव में राघव नाम का एक साधारण लकड़हारा रहता था। वह हर दिन जंगल जाता, लकड़ियाँ काटता और उन्हें बेचकर अपनी रोज़ी कमाता था। मेहनती होने के बावजूद उसकी कमाई बहुत कम थी। कई बार वह थक जाता और सोचता - “क्या मैं कभी अपनी ज़िंदगी बदल पाऊँगा?”
एक दिन जंगल में उसकी मुलाकात एक बूढ़े संत से हुई। संत ने राघव को देखा और पूछा,
“बेटा, तुम इतने थके हुए क्यों लग रहे हो?”
राघव ने दुखी होकर कहा,
“बाबा, मैं रोज़ इतनी मेहनत करता हूँ लेकिन जितना काम करता हूँ, उतनी कमाई नहीं होती। मैं क्या करूँ?”
संत मुस्कुराए और बोले,
“मेहनत जरूरी है, लेकिन सही दिशा में मेहनत उससे भी ज्यादा जरूरी है।”
यह सुनकर राघव चौंक गया। उसने पूछा,
“लेकिन मैं अपनी मेहनत को सही दिशा में कैसे लगाऊँ?”
संत ने कहा,
“कल से लकड़ी काटने से पहले अपनी कुल्हाड़ी को तेज किया करो - बस एक छोटा सा बदलाव, लेकिन बड़ा असर।”
राघव ने सोचा—“क्या सिर्फ इतना करने से फर्क पड़ेगा?”
पर उसने संत की बात मान ली।
अगले दिन उसने लकड़ी काटना शुरू करने से पहले अपनी कुल्हाड़ी को तेज किया। वह लगभग 20 मिनट तेज करने में लगा। उसे लगा कि आज तो और देर हो जाएगी।
लेकिन जैसे ही उसने लकड़ी काटना शुरू किया -
लकड़ी आसानी से टूट रही थी, कम मेहनत लग रही थी, और ज्यादा लकड़ी कट रही थी!
जिस काम में उसे पहले 6 घंटे लगते थे, वही काम वह अब सिर्फ 3 घंटे में कर रहा था। उसके पास समय भी बच रहा था और कमाई भी दोगुनी होने लगी।
एक हफ्ते बाद उसने फिर संत को जंगल में देखा और उत्साह से बोला,
“बाबा! आपकी बात ने मेरी ज़िंदगी बदल दी। अब मैं ज्यादा लकड़ी काटता हूँ, कम थकता हूँ और ज्यादा कमाता हूँ।”
संत ने मुस्कुराकर कहा,
“याद रखो बेटा - “जरूरी नहीं कि हर लड़ाई ताकत से जीती जाए, कई लड़ाइयाँ दिमाग से जीती जाती हैं।”
अगर तुम हर दिन थोड़ा सा खुद को बेहतर बनाओगे, तो एक दिन बड़ी जीत खुद तुम्हारे दरवाजे पर खड़ी होगी।”
राघव ने उस दिन एक बात हमेशा के लिए समझ ली -
“अपनी मेहनत की दिशा सही हो, तो मंजिल खुद-ब-खुद आसान हो जाती है।”
At The End The Moral of the Story
सिर्फ मेहनत नहीं, सही दिशा में मेहनत जरूरी है।
रोज़ थोड़ा-थोड़ा सुधार करना बड़े बदलाव लाता है।
स्मार्ट वर्क + हार्ड वर्क = सफलता।
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