360degreetv

Our Social Network

author Coder Beta Jan 16, 2026

मकर संक्रांति इतिहास, महत्व और इस पावन पर्व का वास्तविक अर्थ

मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है।

Blog Image

मकर संक्रांति- इतिहास, महत्व, परंपराएँ, भोजन और इस पावन पर्व का वास्तविक अर्थ

भूमिका 

 

मकर संक्रांति भारत का एक अत्यंत पवित्र, प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध त्योहार है, जिसे हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को पूरे देश में श्रद्धा, उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा संबंध प्रकृति, कृषि, खगोल विज्ञान और सामाजिक जीवन से भी जुड़ा हुआ है। मकर संक्रांति वह अवसर है जब सूर्य देव अपनी दिशा बदलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण काल की शुरुआत होती है। यही परिवर्तन इस पर्व को विशेष और शुभ बनाता है।

भारतीय संस्कृति में सूर्य को ऊर्जा, जीवन और चेतना का स्रोत माना गया है। इसलिए जब सूर्य की गति उत्तर दिशा की ओर होती है, तो इसे सकारात्मकता, उन्नति और शुभ समय का संकेत माना जाता है। मकर संक्रांति हमें यह सिखाती है कि जीवन में परिवर्तन स्वाभाविक है और हर परिवर्तन नई शुरुआत लेकर आता है।

 

मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?

मकर संक्रांति मनाने के पीछे धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक तीनों कारण हैं।

 

1. धार्मिक कारण

हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब उत्तरायण काल प्रारंभ होता है, जिसे देवताओं का दिन कहा गया है। मान्यता है कि इस काल में किए गए स्नान, दान, जप और तपस्या का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस दिन गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है।

2. वैज्ञानिक कारण

वैज्ञानिक दृष्टि से भी मकर संक्रांति का बड़ा महत्व है। इस समय पृथ्वी का झुकाव ऐसा होता है कि सूर्य की किरणें उत्तर गोलार्ध पर सीधी पड़ने लगती हैं। इससे:

दिन लंबे होने लगते हैं

ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है

शरीर को अधिक सूर्य प्रकाश मिलता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है

यही कारण है कि इस पर्व को स्वास्थ्य और ऊर्जा से जुड़ा पर्व भी माना जाता है।

 

3. सामाजिक कारण

मकर संक्रांति सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। इस दिन लोग पुराने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और मिल-जुलकर उत्सव मनाते हैं।

 

मकर संक्रांति का ऐतिहासिक महत्व

मकर संक्रांति का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों जैसे महाभारत और पुराणों में भी मिलता है। मान्यता है कि महाभारत के भीष्म पितामह ने उत्तरायण काल में ही इच्छामृत्यु का वरदान स्वीकार किया था, क्योंकि इस समय मृत्यु को मोक्षदायक माना जाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन काल से ही उत्तरायण को अत्यंत शुभ माना गया है।

 

किसानों के लिए मकर संक्रांति का महत्व

भारत एक कृषि प्रधान देश है और मकर संक्रांति का सीधा संबंध कृषि और किसानों से है। इस समय रबी की फसल पककर तैयार होती है। किसान अपनी मेहनत का फल पाकर प्रसन्न होते हैं और धरती, सूर्य तथा प्रकृति का आभार व्यक्त करते हैं। इसी कारण मकर संक्रांति को फसल पर्व (Harvest Festival) भी कहा जाता है।

यह त्योहार हमें यह सिखाता है कि:

अन्न का सम्मान करना चाहिए

किसान के परिश्रम का मूल्य समझना चाहिए

प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना चाहिए

 

मकर संक्रांति पर स्नान, दान और पुण्य का महत्व

मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और पुण्य को अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।

इस दिन क्या दान किया जाता है?

तिल

गुड़

अन्न

वस्त्र

धन

तिल को पवित्रता और गुड़ को मिठास का प्रतीक माना जाता है। दान का उद्देश्य केवल देना नहीं, बल्कि अहंकार त्यागकर सेवा भावना को अपनाना है।

 

मकर संक्रांति पर क्या खाया जाता है?

मकर संक्रांति के भोजन का भी विशेष धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखते हुए इस दिन ऐसे खाद्य पदार्थ खाए जाते हैं, जो शरीर को गर्मी और ऊर्जा प्रदान करते हैं।

 

प्रमुख व्यंजन:

तिल-गुड़ के लड्डू

रेवड़ी

चिक्की

खिचड़ी

पोंगल (तमिलनाडु)

पीठा (असम, बंगाल)

तिल और गुड़ का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसके साथ ही “तिल-गुड़ खाओ और मीठा बोलो” की परंपरा समाज में मिठास, प्रेम और सौहार्द का संदेश देती है।

 

भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति

भारत की विविधता इस पर्व में भी देखने को मिलती है। हर राज्य में यह त्योहार अलग नाम और परंपरा के साथ मनाया जाता है, लेकिन भाव एक ही होता है।

गुजरात – उत्तरायण (पतंगबाजी)

पंजाब / हरियाणा – लोहड़ी

तमिलनाडु – पोंगल

असम – माघ बिहू

कर्नाटक / आंध्र प्रदेश – संक्रांति

उत्तर भारत – खिचड़ी पर्व

यह विविधता भारत की सांस्कृतिक एकता को दर्शाती है।

 

पतंगबाजी का महत्व

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा केवल मनोरंजन नहीं है। इसके पीछे भी कारण हैं:

धूप में रहने से विटामिन D मिलता है

सामूहिक उत्सव से मानसिक प्रसन्नता बढ़ती है

आकाश की ओर पतंग उड़ाना स्वतंत्रता और आनंद का प्रतीक है

 

मकर संक्रांति का आध्यात्मिक संदेश

मकर संक्रांति हमें जीवन का एक गहरा संदेश देती है:

अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना

नकारात्मकता छोड़कर सकारात्मकता अपनाना

स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के लिए सोचना

यह पर्व आत्मशुद्धि, आत्मविकास और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है।

 

निष्कर्ष 

मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और जीवन दर्शन का प्रतिबिंब है। यह पर्व हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीवन जीना, परिश्रम का सम्मान करना और आपसी संबंधों में मिठास बनाए रखना सिखाता है। जैसे सूर्य उत्तरायण होकर प्रकाश फैलाता है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में सद्भाव, सकारात्मकता और मानवता का प्रकाश फैलाना चाहिए।

Blog Comments (0)

Leave a Comment

Tags
मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति
Share:
Website Logo

360degreetv is your hub for the latest in digital innovation, technology trends, creative insights. Our mission is to empower creators, businesses, valuable resource.

© 2025 360degreetv, Inc. All Rights Reserved.