“लोक अदालत” का अर्थ है “जनता की अदालत” या People’s Court। यह भारत की एक वैकल्पिक न्याय प्रणाली (Alternative Dispute Resolution System) है जहाँ विवादों को आपसी समझौते (Mutual Settlement) के माध्यम से सुलझाया जाता है — बिना किसी लंबी कानूनी प्रक्रिया के।
लोक अदालतों का संचालन National Legal Services Authority (NALSA), State Legal Services Authority (SLSA) और District Legal Services Authority (DLSA) के माध्यम से किया जाता है।
लोक अदालत क्यों बनाई गई? | Why Lok Adalat Was एस्टेब्लिश्ड
भारत की अदालतों में लाखों केस सालों तक लंबित रहते हैं। इसी समस्या को देखते हुए 1987 में Legal Services Authorities Act के तहत लोक अदालत की शुरुआत हुई।
इसका उद्देश्य था — “लोगों को सस्ता, तेज़ और न्यायसंगत समाधान देना।”
यह व्यवस्था उन लोगों के लिए वरदान साबित हुई जो न्याय पाने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
लोक अदालत के प्रकार (Types of Lok Adalat in India)
1. National Lok Adalat (राष्ट्रीय लोक अदालत):
पूरे देश में एक ही दिन आयोजित की जाती है।
2. State Lok Adalat (राज्य लोक अदालत):
राज्य स्तर पर मामलों का निपटारा।
3. District Lok Adalat (जिला लोक अदालत):
जिले के विवादों को निपटाने का मंच।
4. Mobile Lok Adalat (मोबाइल लोक अदालत):
गाँव या दूरदराज क्षेत्रों में जाकर लोगों को न्याय पहुँचाना।
लोक अदालत के फायदे (Benefits of Lok Adalat)
- Free Justice (मुफ्त न्याय):
कोई कोर्ट फीस नहीं, और यदि केस पहले से कोर्ट में है तो फीस वापस मिलती है।
2. Speedy Disposal (तेज़ समाधान):
निर्णय कुछ घंटों या दिनों में होता है।
3. Mutual Settlement (आपसी समझौता):
कोई हार या जीत नहीं होती — दोनों पक्ष संतुष्ट रहते हैं।
4.Legal Validity (कानूनी मान्यता):
लोक अदालत का निर्णय अंतिम होता है और इसे उच्च अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।
5. Social Harmony (सामाजिक सद्भाव):
आपसी रिश्ते और भाईचारा बना रहता है।
लोक अदालत में सुने जाने वाले मामले (Cases Handled by Lok Adalat)
- सड़क दुर्घटना मुआवज़ा (Motor Accident Claims)
- बैंक लोन, रिकवरी और EMI विवाद
- बिजली, पानी, टेलीफोन बिल विवाद
- पारिवारिक झगड़े (Matrimonial Disputes)
- मजदूरी या श्रम विवाद (Labour Disputes)
- भूमि विवाद या छोटे नागरिक मामले (Civil Cases)
किन मामलों की सुनवाई नहीं होती (Cases Not Admissible)
लोक अदालत गंभीर आपराधिक मामलों जैसे — हत्या, बलात्कार, डकैती आदि की सुनवाई नहीं करती।
लोक अदालत (Lok Adalat) भारत की न्याय व्यवस्था में एक ऐतिहासिक पहल है।
इसने लोगों को सस्ता, तेज़ और सरल न्याय (Affordable and Speedy Justice) उपलब्ध कराया है।
यह न केवल न्याय का वैकल्पिक माध्यम है, बल्कि समाज में सद्भाव और विश्वास को भी मजबूत बनाता है। लोक अदालत – न्याय को जनता के दरवाजे तक पहुँचाने का सबसे सफल प्रयास।”
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