पितृ पक्ष 2025: महत्व, तिथियां, श्राद्ध विधि और करने योग्य कार्य
1. पितृ पक्ष क्या है?
हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, बेहद पवित्र और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह समय साल में एक बार आता है और आमतौर पर भाद्रपद (भादो) माह की पूर्णिमा के अगले दिन से लेकर आश्विन अमावस्या तक चलता है।
इस अवधि को खास इसलिए माना जाता है क्योंकि माना जाता है कि इस समय हमारे पितर (पूर्वज) धरती पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान को स्वीकार करते हैं।
श्राद्ध का अर्थ ही है श्रद्धा के साथ अर्पण करना। इसलिए इसे केवल एक कर्मकांड न मानकर पूर्वजों के प्रति हमारी कृतज्ञता और सम्मान का प्रतीक समझा जाना चाहिए।
2. पितृ पक्ष 2025 की तिथियां
इस वर्ष पितृ पक्ष 8 सितंबर 2025 से 17 सितंबर 2025 तक मनाया जाएगा।
हर दिन किसी न किसी तिथि का विशेष महत्व होता है। उदाहरण के लिए,
प्रतिपदा से पूर्णिमा तक – हर तिथि पर उस तिथि को दिवंगत हुए पितरों का श्राद्ध किया जाता है।
अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) – यह दिन खास है क्योंकि जिनका निधन तिथि ज्ञात न हो, उनके लिए इसी दिन श्राद्ध किया जाता है।
महालय अमावस्या – इस दिन पितरों का स्मरण कर, पूरे परिवार की ओर से श्राद्ध और तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
3. पितृ पक्ष का महत्व
पितृ पक्ष को लेकर पुराणों और धर्मग्रंथों में कई मान्यताएं मिलती हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार, पितरों के आशीर्वाद से ही व्यक्ति का जीवन सुख-समृद्धि और संतानों से परिपूर्ण होता है।
महाभारत में भी श्राद्ध पक्ष का महत्व बताया गया है। भीष्म पितामह ने स्वयं युधिष्ठिर को पितरों का पूजन और श्राद्ध करने का निर्देश दिया था।
माना जाता है कि पितरों की आत्मा को शांति तभी मिलती है जब उनके वंशज श्रद्धा भाव से तर्पण और श्राद्ध करते हैं।
आधुनिक दृष्टिकोण से देखें तो यह हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और परिवार की परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश देता है।
4. पितृ पक्ष में करने योग्य कार्य
श्राद्ध और तर्पण – पवित्र नदी या घर पर गंगाजल से तर्पण करना।
ब्राह्मण भोजन और दान – ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा देना।
सात्विक आहार – इस समय मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज आदि से परहेज कर सात्विक भोजन करें।
पौधारोपण और गौसेवा – पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण करना या गौसेवा करना भी पुण्यकारी है।
ध्यान और प्रार्थना – अपने पितरों के लिए नियमित प्रार्थना और मंत्रजप करना।
5. पितृ पक्ष में क्या न करें
विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य इस अवधि में नहीं करने चाहिए।
मांसाहार, शराब, तामसिक भोजन और नकारात्मक आचरण से दूर रहना चाहिए।
इस समय किसी का अपमान, झूठ बोलना या दूसरों को कष्ट पहुँचाना पितरों को अप्रसन्न कर सकता है।
नई वस्तुएँ खरीदने और नया व्यापार शुरू करने से भी परहेज करना चाहिए।
6. आधुनिक जीवन में पितृ पक्ष का संदेश
आज की तेज़-रफ़्तार जिंदगी में लोग अक्सर अपनी जड़ों और परंपराओं को भूल जाते हैं। पितृ पक्ष हमें यह याद दिलाता है कि हमारी पहचान और संस्कार हमारे पूर्वजों से ही जुड़े हैं।
यह समय हमें आभार प्रकट करने का अवसर देता है।
यह हमें सेवा, दान और सहानुभूति जैसे गुण सिखाता है।
सामाजिक दृष्टि से भी यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे समाज में सहयोग और दान की भावना फैलती है।
7. निष्कर्ष
पितृ पक्ष 2025 केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि हमारे संस्कार और आस्था का प्रतीक है। इस समय पूर्वजों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और हमें उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
यह हमें यह भी सिखाता है कि पूर्वजों का सम्मान कर, उनकी परंपराओं को अपनाकर ही जीवन में वास्तविक सफलता और शांति प्राप्त की जा सकती है।
इस पितृ पक्ष, श्रद्धा और भक्ति के साथ अपने पितरों को याद करें और उनके आशीर्वाद से जीवन को सुख-समृद्धि से भर दें।
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